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क्या COPD के मरीजों में लंग कैंसर का खतरा ज्यादा होता है? डॉक्टर ने बताया समय पर जांच कराना क्यों जरूरी?

Lung Cancer Day: लंग कैंसर डे के मौके पर हम एक्सपर्ट से जानेंगे किस तरह से फेफड़ों के कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और किन बातों का ध्यान रखना इससे बचाव करने के लिए जरूरी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : August 3, 2026 10:25 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Peush Bajpai

लंग कैंसर को दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसर में से एक माना जाता है, क्योंकि यह कैंसर से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण होता है। द्वारका दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के यूनिट हेड एंड सीनियर डायरेक्टर डॉ. पीयूष बाजपेयी ने लंग कैंसर से जुड़ी कुछ बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां दी। फेफड़ों का कैंसर भारत में तेजी से बढ़ रहा है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मरीजों में इसका पता तब चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। अगर कैंसर शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए, तो इलाज आसान होता है और मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इस लेख में हम फेफड़ों से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां लेंगे जो आपके काफी काम आ सकती हैं।

फेफड़ों में कैंसर के लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

फेफड़ों में होने वाले कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत आम होते हैं और अक्सर इस कारण से इन्हें इग्नोर कर दिया जाता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को नीचे दिए गए लक्षण 2-3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से जरूर मिलें -

  • लगातार रहने वाली या बढ़ती हुई खांसी
  • खांसी में खून आना
  • सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ
  • आवाज का लंबे समय तक भारी रहना
  • सीने में दर्द
  • बिना कारण वजन कम होना
  • हमेशा थकान महसूस होना
  • बार-बार निमोनिया या फेफड़ों का संक्रमण होना

हालांकि, इस बात का आपको ध्यान रखना भी जरूरी है कि हर बार खांसी होना जरूरी नहीं है कि कैंसर का ही संकेत हो। लेकिन अगर लक्षण बार-बार हों या इलाज के बाद भी ठीक न हों, तो जांच जरूर करानी चाहिए।

सिर्फ लक्षण आने का इंतजार न करें

लंग कैंसर की एक बात जो इसे बेहद खतरनाक और जानलेवा बनाती है, शुरुआत में इनसे बहुत ही आम लक्षण देखने को मिलते हैं जिन्हें कई बार लोग सामान्य सर्दी-जुकाम वाले लक्षण मान लेते हैं। इसलिए कुछ लोगों में समय-समय पर जांच कराना ज्यादा जरूरी है। खासतौर पर जो लोग धूम्रपान करते हैं, पहले कई साल तक धूम्रपान कर चुके हैं या COPD से पीड़ित हैं, तो नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराते रहना चाहिए और डॉक्टर के द्वारा दी गई सलाह का ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए।

डॉक्टर द्वारा की जाने वाली जरूरी जांच

डॉक्टर से जांच के दौरान अगर डॉक्टर को किसी भी तरह का संदेह होता है, तो वे जरूरत के अनुसार कुछ टेस्ट कर सकते हैं जैसे कि Low-Dose CT Scan आदि। लो-डोज सीटी स्कैन एक खास प्रकार का सीटी स्कैन है, जिससे फेफड़ों के कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल सकता है। दुनिया भर के कई बड़े अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि सही लोगों में समय पर की गई यह जांच जान बचा सकती है।

  • किन लोगों के लिए स्क्रीनिंग जरूरी?
  • कुछ कंडीशन के आधार पर देखा जा सकता है कि कुछ लोगों में लंग कैंसर का खतरा अन्य से ज्यादा हो सकता है -
  • जिनकी उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो
  • लंबे समय से धूम्रपान करते हो (अब छोड़ दिया हो या अभी भी करते हों)
  • प्रदूषण वाले शहरों में रहने वाले लोग
  • गैस या केमिकल के काम वाली फैक्ट्री में काम करने वाले लोग
  • COPD या एम्फिसीमा के मरीज

कैसे करे बचाव?

फेफड़ों के कैंसर से बचने का सबसे जरूरी है समय रहते धूम्रपान छोड़ना बहुत जरूरी है। धूम्रपान छोड़ने के बाद भी खतरा कुछ वर्षों तक बना रह सकता है, इसलिए ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच करानी चाहिए। World Lung Cancer Day पर हमारा संदेश साफ है, अगर आप धूम्रपान करते हैं या COPD के मरीज हैं, तो केवल लक्षणों का इंतजार न करें। समय पर जांच कराएं। शुरुआती अवस्था में पकड़ा गया फेफड़ों का कैंसर अक्सर सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। सही समय पर उठाया गया एक कदम आपकी जिंदगी बचा सकता है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल लंग कैंसर के बारे में जानकारियां देना है और इस लेख में दी गई कोई भी जानकारी किसी भी स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए नहीं है। अगर आपको किसी भी तरह की परेशानी होती है, तो उसके लिए अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।