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Written By: Anshumala | Published : June 5, 2018 2:29 PM IST
Wood smoke can cause respiratory problems in women. © Shutterstock
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), जिसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव लंग डिजीज (सीओएलडी) भी कहते हैं। सीओपीडी को बोलचाल की भाषा में हम क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या फिर फेंफड़े की बीमारी भी कहते हैं। सीओपीडी शरीर में ऑक्सीजन के घटते प्रवाह से होता है। जब शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाले छोटे-छोटे वायु तंत्रों में गड़बड़ी होने लगती है, तो सांस लेने में परेशानी होने लगती है। यदि इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें सांस लेने में तकलीफ, खांसी और कफ अधिक बनना शामिल है।
सीओपीडी के लक्षण
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या सीओपीडी से ग्रस्त लोगों में सांस की नलियों में ब्लॉकेज होने या कम लचीले होने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इसे मेडिकल भाषा में ''लंग हाइपरइंफ्लेशन'' कहते हैं। इससे दिल के काम करने की क्षमता भी जुड़ी होती है।
अध्ययन का क्या है कहना
सीओपीडी को फेफड़ों से जुड़ी लंबे समय तक चलने वाली बीमारी माना जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और शरीर में हवा का प्रवाह प्रभावित होता है। इससे कोर्डियोवैस्कुलर डिजीज जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रोगी के दिव्यांग होने के साथ-साथ मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। सीओपीडी के कई रोगियों को दिल से जुड़ी बीमारियां भी हो रही हैं, जिसके कारण मृत्युदर में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, एक नए अध्ययन के अनुसार, सीओपीडी के बेहतर इलाज की उम्मीद बढ़ी है।
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अध्ययन में पहली बार हृदय की कार्यक्षमता और लंग हाइपरइंफ्लेशन के ब्रोनकोडायलेशन के दोहरे प्रभाव की जांच की गई। लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में प्रकाशित क्लेम अध्ययन में दर्शाया गया है कि लंग हाइपरइंफ्लेशन से पीड़ित सीओपीडी रोगियों का दोहरे ब्रोनकोडायलेटर के साथ उपचार करने से दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता में काफी सुधार होता है।
21 करोड़ लोग हैं प्रभावित
सीओपीडी से पूरी दुनिया में लगभग 21 करोड़ लोग प्रभावित हैं। यह मृत्यु का चौथा कारण बनी हुई है। दुनिया भर में इस बीमारी से जितनी मृत्यु होती है, उसमें से एक चौथाई हिस्सा भारत का है। 2016 में सीओपीडी के 2 करोड़ 22 लाख रोगी थे। मेट्रो अस्पताल के पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक तलवार का कहना है कि सीओपीडी रोगियों में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण कई प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलते हैं। इससे उनकी जिंदगी की गुणवत्ता कम होने लगती है। रोगियों में आमतौर पर इस्केमिक हार्ट डिजीज, हार्ट फेलियर, कार्डियक एरिथमिया जैसी सीवीडी की बीमारियां देखने को मिलती हैं।" सीओपीडी और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से बचने के लिए एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट लेना बेहद जरूरी है। ब्रोनकोडायलेटर सबसे प्रभावी इलाज के तौर पर उभरकर सामने आया है।
चित्रस्रोत- Shutterstock Images.