हार्ट अटैक को नजदीक ला सकती है फेफड़ों की ये बीमारी, किन लक्षणों के देखते ही इलाज शुरू करना जरूरी है?

National COPD Awareness Month: सीओपीडी COPD को अक्सर सिर्फ फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, जैसे कि सांस लेने में दिक्कत और धीरे-धीरे बढ़ती कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। लेकिन यह हार्ट अटैक जैसी स्थिति भी पैदा कर सकता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : November 28, 2025 7:07 PM IST

COPD and heart problems: हमारे फेफड़ों का स्वास्थ्य हमारे हार्ट से भी जुड़ा होता है और इसलिए अगर आपको हार्ट से जुड़ी समस्याएं हैं तो फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा रहता है। उसी प्रकार अगर आपको फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हैं, तो भी हार्ट अटैक जैसी कंडीशन होने का खतरा बढ़ जाता है। फेफड़ों की कई बीमारियां हैं, जो खुद को जानलेवा हैं ही साथ ही में हार्ट अटैक जैसी कई जानलेवा कंडीशन भी पैदा कर देती हैं। सीओपीडी भी ऐसी ही एक फेफड़ों से जुड़ी बीमारी हैं, जिसका हार्ट पर भी असर पड़ सकता है। डॉ. अभिजीत सिंह, सीनियर कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेटरी मेडिसिन, शारदा केयर हेल्थ सिटी, ग्रेटर नोएडा के अनुसार सीओपीडी और दूसरी क्रोनिक बीमारियों का आपस में संबंध दिल की बीमारी और डायबिटीज से काफी गहराई से होता है, जिसकी खास देखभाल जरूरी है।

सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है सीओपीडी

सीओपीडी सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं होती बल्कि यह कई और बड़ी बीमारियों जैसे दिल की बीमारी और डायबिटीज से गहराई से जुड़ी होती है। अगर मरीज सिर्फ फेफड़ों की दवाइयों पर ध्यान देता है, तो इलाज अधूरा रह जाता है। इसलिए इंटीग्रेटेड केयर यानी समन्वित देखभाल आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। फेफड़ों का शरीर से गहरा संबंध हमारा शरीर एक प्रणाली की तरह काम करता है।

दिल पर बढ़ता है दबाव

सीओपीडी के दौरान श्वास नलियों और हवा की थैलियों (Air Sacs) में सूजन आ जाती है और इससे फेफड़ों के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। जब फेफड़े ठीक से ऑक्सीजन नहीं भेज पाते हैं, तो उसके कारण हार्ट से ज्यादा ब्लड पंप करना पड़ता है और उस पर काम का ज्यादा दबाव बढ़ जाता है। लगातार बढ़ते दबाव से दिल की बीमारियां जैसे दिल की धड़कन में गड़बड़ी, दिल की कमजोरी और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कहा जाता है फेफड़े कमजोर हों तो दिल पर बोझ पड़ता है और दिल कमजोर हो तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

सीओपीडी और डायबिटीज संबंध

सीओपीडी में पूरे शरीर में हल्की-सी सूजन बनी रहती है और यही सूजन इंसुलिन को ठीक से काम नहीं करने देती, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और आगे चलकर डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, सीओपीडी के लिए दी जाने वाली स्टेरॉयड दवाइयां भी कुछ समय के लिए शुगर बढ़ा सकती हैं। जब इन दो या तीन बीमारियों का मेल हो इसे मल्टीमोरबिडिटी कहते हैं तो मरीज की हालत और कठिन हो जाती है। अगर किसी व्यक्ति को ये दोनों ही बीमारियां एक साथ हो जाती हैं, तो स्वास्थ्य से जुड़ी कई बीमारियां पैदा हो सकती हैं।

इंटीग्रेटेड केयर मरीज केंद्रित इलाज

मरीज को कई बार अलग-अलग समस्याओं के कारण अलग-अलग डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है, फेफड़ों के लिए पल्मोनोलॉजिस्ट, दिल के लिए कार्डियोलॉजिस्ट और डायबिटीज के लिए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट। ऐसे में अलग-अलग सलाह और दवाइयां मरीज को परेशान कर देते हैं। इसीलिए इंटीग्रेटेड केयर की जरूरत है, जहां एक टीम मिलकर मरीज के लिए एक ही प्लान बनाती है। इंटीग्रेटेड केयर से मरीज को लाभ एक ही इलाज योजना फेफड़ों, दिल और डायबिटीज तीनों को ध्यान में रखकर एक प्लान बनाया जाता है। लाइफस्टाइल गाइडेंस एक जैसी सलाह जैसे व्यायाम, सही खानपान और धूम्रपान छोड़ना मरीज को सुधारने में मदद करती है। बेहतर मॉनिटरिंग एक ही जगह से सभी बीमारियों की निगरानी आसान हो जाती है ।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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