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दूषित पानी बढ़ा सकता है हेपेटाइटिस का खतरा, किन बातों का रखें ध्यान?

बरसात के मौसम में कई तरह के संक्रमण हमारे आसपास मौजूद होते हैं, जिसकी वजह से कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहत है, जिसमें हेपेटाइटिस भी शामिल हैं। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : August 1, 2026 3:10 PM IST

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Medically Verified By: Abhinav Kumar Gupta

बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इन्हीं में से एक है हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई, जो अक्सर दूषित पानी और संक्रमित भोजन के जरिए फैलते हैं। समस्या यह है कि शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार या पेट की गड़बड़ी जैसे लग सकते हैं, जिससे कई लोग समय पर जांच नहीं करवाते।

जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉक्टर अभिनव गुप्ता का कहना है कि मानसून के दौरान पानी की पाइपलाइन में सीवेज का रिसाव, जलभराव और साफ पानी का दूषित पानी से मिल जाना संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी लीवर को प्रभावित करने वाले संक्रमण का कारण बन सकती है।

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कैसे फैलता है संक्रमण?

हेपेटाइटिस ए और ई वायरस मुख्य रूप से फीकल-ओरल रूट से फैलते हैं। यानी यदि किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन का सेवन किया जाए, तो वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है। सड़क किनारे खुले में रखा भोजन, बिना धोए फल-सब्जियां, बर्फ के असुरक्षित टुकड़े और उबाला या फिल्टर न किया गया पानी संक्रमण के सामान्य स्रोत हो सकते हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण दूषित पानी से नहीं फैलता। वे संक्रमित रक्त, असुरक्षित सुई, असुरक्षित यौन संपर्क (विशेषकर हेपेटाइटिस बी) या संक्रमित मां से नवजात शिशु में फैल सकते हैं।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

संक्रमण के बाद कुछ दिनों से लेकर कई सप्ताह तक कोई लक्षण न भी दिखाई दें। लेकिन बीमारी बढ़ने पर लगातार थकान, भूख कम लगना, मितली, उल्टी, हल्का बुखार, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द, गहरे रंग का पेशाब और आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।

गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस ई संक्रमण अधिक गंभीर हो सकता है। वहीं, पहले से लीवर की बीमारी से जूझ रहे लोगों में भी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

बचाव के लिए क्या करें?

हेपेटाइटिस ए और ई से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका स्वच्छ पानी और सुरक्षित भोजन है। इसके लिए कुछ सरल सावधानियां अपनाई जा सकती हैं, जैसे-

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  • सिर्फ उबला हुआ, अच्छी तरह फिल्टर किया हुआ या सुरक्षित पैक्ड पानी ही पिएं।
  • बर्फ का उपयोग तभी करें जब उसके पानी का स्रोत सुरक्षित हो।
  • भोजन हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ खाएं।
  • फल और सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
  • खाना बनाने और खाने से पहले तथा शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत अपनाएं।
  • खुले में बिकने वाले कटे हुए फल, सलाद या लंबे समय से खुले रखे भोजन से बचें।

हेपेटाइटिस ए के लिए प्रभावी टीका उपलब्ध है, जो बच्चों के साथ-साथ जोखिम वाले वयस्कों के लिए भी लाभकारी हो सकता है। हालांकि हेपेटाइटिस ई का कोई स्वीकृत टीका अधिकांश देशों में उपलब्ध नहीं है, इसलिए स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल ही सबसे मजबूत बचाव हैं।

Disclaimer : मानसून में पेट से जुड़ी हर समस्या को सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। अगर बुखार, कमजोरी या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो समय पर जांच करवाना जरूरी है। सही समय पर पहचान और उचित इलाज से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं और लीवर को गंभीर नुकसान से भी बचाया जा सकता है।