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कॉन्टैक्ट लेंस कैसे काम करते हैं? डॉ. पुरेंद्र भसीन बता रहे हैं इस्तेमाल करने का तरीका और सावधानी

आजकल कॉन्टैक्ट लेंस अलग-अलग जरूरतों के अनुसार उपलब्ध हैं। जैसे सिंगल विजन, टोरिक और मल्टीफोकल लेंस। इतना ही नहीं बाजार में कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो आंखों का रंग बदलने वाले कॉन्टैक्ट लेंस बेच रही है और लोग एक फैशन प्रोडक्ट की तरह भी यूज कर रहे हैं।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : January 28, 2026 3:21 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Purendra Bhasin

Contact Lenses uses an Ophthalmologist Shares Tips To Safeguard Eyesight : कॉन्टैक्ट लेंस आंखों पर सीधे लगाए जाने वाले पतले, पारदर्शी ऑप्टिकल लेंस होते हैं, जिन्हें आंख की सतह यानी कॉर्निया पर रखा जाता है। इनका उपयोग आंखों के अपवर्तन दोष जैसे मायोपिया (नजदीकी नजर कमजोर होना), हाइपरोपिया (दूर की नजर कमजोर होना) और एस्टिग्मेटिज्म को ठीक करने के लिए किया जाता है। डॉ. पुरेंद्र भसीन कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में कॉन्टैक्ट लेंस चश्मे का सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरे हैं।

जिन लोगों को चश्मा लगाने में परेशानी या शर्म महसूस होती है, स्पोर्ट्स पर्सन के लिए कॉन्टैक्ट लेंस लगाना सुविधाजनक होता है। आजकल कॉन्टैक्ट लेंस अलग-अलग जरूरतों के अनुसार उपलब्ध हैं। जैसे सिंगल विजन, टोरिक और मल्टीफोकल लेंस।

इतना ही नहीं बाजार में कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो आंखों का रंग बदलने वाले कॉन्टैक्ट लेंस बेच रही है और लोग एक फैशन प्रोडक्ट की तरह भी यूज कर रहे हैं।

Contact lens in monsoon

कॉन्टैक्ट लेंस कैसे काम करते हैं?

  1. डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि कॉन्टैक्ट लेंस आंख की कॉर्निया सतह पर बैठकर काम करते हैं।
  2. यह आंख में प्रवेश करने वाली रोशनी को सही तरीके से मोड़ते हैं, जिससे रेटिना पर साफ और स्पष्ट तस्वीर बनती है।
  3. कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और दृष्टि दोष सुधरता है। इससे व्यक्ति को पहले से ज्यादा साफ नजर आते हैं।
  4. कॉन्टैक्ट लेंस आंखों की लेंस पर इस तरह से सेट होते हैं कि आंखों के साथ ही हिलते हैं, इसलिए इससे देखने का फील बिल्कुल नेचुरल लगता है।

कॉन्टैक्ट लेंस या चश्मा क्या है ज्यादा बेहतर

डॉ. पुरेंद्र भसीन कहते हैं हमारे जो लोग आते हैं वो अक्सर ये सवाल पूछते हैं कि उनके लिए कॉन्टैक्स लेंस बेहतर या चश्मा लगाना। लेकिन इस सवाल का जवाब कोई भी डॉक्टर नहीं दे सकता है। आपको कॉन्टैक्स लेंस का यूज करना है या फिर चश्मे का ये पूरी तरह से आप किसमें आरामदायक महसूस करते हैं, इस पर निर्भर करता है। आपके लिए क्या सही है ये जानने के लिए नीचे बताई गई टेबल देखें....

पॉइंट चश्माकॉन्टैक्ट लेंसकिसका फायदा ज्यादा?
यूज करने में आसानआसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।लगाना और निकालना सीखना पड़ता है।चश्मा लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है।
कंफर्टलंबे समय तक लगाने से नाक- कान में दर्द होता हैसही तरीके से पहनें तो कंफर्टेबललेंस (अगर सही से यूज करें)
देखने की क्वालिटीकिनारों से डिस्टॉर्शन हो सकती हैज्यादा नेचुरल और क्लियर विजनलेंस ज्यादा अच्छा होता है
फील्ड ऑफ व्यूफ्रेम के कारण सीमित रहता हैपूरा नेचुरल व्यू मिलता है।लेंस बेहतर तरीके से काम करता है।
खेल/एक्टिविटी मेंगिरने और टूटने का रिस्कलेंस पहनकर आसानी से एक्टिविटी कर सकते हैं।लेंस
सुरक्षाआंख को टच नहीं करता (कम रिस्क)इंफेक्शन व एलर्जी का रिस्क हो सकता है। चश्मा
आंखों की सेहतसुरक्षित, ज्यादा परेशानी नहींगलत यूज से इंफेक्शन हो सकता है चश्मा
पैसों के लिहाज सेकम खर्च में लंबे समय तक यूज कर सकते हैं।काफी महंगा होता है। साल में 1 बार बदलना पड़ सकता है। चश्मा
समयलंबे समय तक बिना किसी तकलीफ के पहन सकते हैं।ज्यादा समय पहनने पर जलन/ड्रायनेस हो सकती है। चश्मा

कॉन्टैक्स लेंस चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें

  1. भारत में 10 में से 7 लोग सिर्फ आंखों को नंबर देखकर ही कॉन्टैक्ट लेंस खरीद लेते हैं। लेकिन कॉन्टैक्स लेंस खीरदने के लिए आंखों की पूरी जांच जरूरी है।
  2. आंखों की जांच करने के बाद ही डॉक्टर आपको आंखों का नंबर, बेस कर्व (BC) और डायमीटर (DIA) की जानकारी देते हैं।
  3. डॉक्टर की जानकारी के आधार पर ही कॉन्टैक्स लेंस खरीदना चाहिए, ताकि वो पूरी तरह से आंखों पर फिट हो सके।
  4. इसके अलावा कॉन्टैक्ट लेंस खरीदते समय इसके प्रकार, जैसे डेली डिस्पोजेबल या मंथली लेंस, आंखों में सूखापन, एलर्जी की प्रवृत्ति और व्यक्ति की लाइफस्टाइल जैसे स्क्रीन टाइम या बाहर के काम को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

गलत कॉन्टैक्स लेंस चुनने के नुकसान

किसी भी कारण से अगर आप गलत कॉन्टैक्ट लेंस को चुनते हैं, तो इससे आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है। गलत कॉन्टैक्ट लेंस चुनने से नीचे बताई गई परेशानियां हो सकती हैं।

  • आंखों में जलन
  • आंखों के अंदर लालिमा
  • आंखों से पानी आना
  • लेंस सही से न बैठने के कारण संक्रमण

कॉन्टैक्ट लेंस कैसे चुनें?

  1. कॉन्टैक्ट लेंस कई प्रकार के होते हैं। एक व्यक्ति को अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से ही कॉन्टैक्ट लेंस चुनना चाहिए। कॉन्टैक्ट लेंस चुनते वक्त नीचे बताई गई बातों का ध्यान रखें।
  2. डेली डिस्पोजेबल लेंस- जिन लोगों की आंखें संवेदनशील होती हैं या जिन्हें एलर्जी की समस्या रहती है, उनके लिए डेली डिस्पोजल लेंस बेहतर माने जाते हैं। डेली डिस्पोजल लेंस का इस्तेमाल करने से संक्रमण का जोखिम कम होता है।
  3. मंथली लेंस- कांटेक्ट लेंस लगाने के बाद अगर आपको किसी प्रकार की खुजली या जलन नहीं हो रही है, तब आप मंथली लेंस का चुनाव कर सकते हैं। इन लेंस में नियमित साफ-सफाई और सही रखरखाव बहुत जरूरी होता है, ताकि आंखें सुरक्षित रहें।

कॉन्टैक्ट लेंस कितनी देर पहनना चाहिए?

जब हमने इस बारे में डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति को कितने समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना ये पूरी तरह से आंखों की सहनशीलता और लेंस के प्रकार पर निर्भर करता है। शुरुआत में आप 4 से 6 घंटे तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना बेहतर होता है, ताकि आंखें धीरे-धीरे इसकी आदत डाल सकें। बाद में आदत पड़ने पर भी रोजाना 8 घंटे भी इसे पहन सकते हैं।  डॉ. पुरेंद्र भसीन एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा कॉन्टैक्ट लेंस नहीं पहनना चाहिए।

क्या रात को सोते समय कांटेक्ट लेंस पहन सकते हैं?

जी नहीं, रात को सोते समय कॉन्टैक्ट लेंस बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए। रात को कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आंखों में संक्रमण, सूजन और लालिमा की समस्या होती है। डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, रात को सोते समय कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आंखों को सही ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में रात को कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर बिल्कुल न सोएं।

कॉन्टैक्ट लेंस यूज करते वक्त सावधानी

  1. डॉक्टर कहते हैं कॉन्टैक्ट लेंस यूज करते वक्त कुछ सावधानियां बरती जाए, तो आंखों को बेहतर सुरक्षा मिल सकती है।
  2. कॉन्टैक्ट लेंस लगाने या निकालने से पहले हाथों को अच्छे से धोएं।
  3. लेंस सॉल्यूशन को नियमित रूप से बदलना जरूरी होता है।
  4. नहाते, स्विमिंग करते समय कॉन्टैक्ट लेंस बिल्कुल न करें।

अगर कॉन्टैक्ट लेंस का यूज करने के बाद आपको आंखों में दर्द, जलन, धुंधलापन या लालिमा महसूस हो रही है, तो इस विषय पर डॉक्टर से बात करें और अपना इलाज करवाएं।