
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Purendra Bhasin
Contact Lenses uses an Ophthalmologist Shares Tips To Safeguard Eyesight : कॉन्टैक्ट लेंस आंखों पर सीधे लगाए जाने वाले पतले, पारदर्शी ऑप्टिकल लेंस होते हैं, जिन्हें आंख की सतह यानी कॉर्निया पर रखा जाता है। इनका उपयोग आंखों के अपवर्तन दोष जैसे मायोपिया (नजदीकी नजर कमजोर होना), हाइपरोपिया (दूर की नजर कमजोर होना) और एस्टिग्मेटिज्म को ठीक करने के लिए किया जाता है। डॉ. पुरेंद्र भसीन कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में कॉन्टैक्ट लेंस चश्मे का सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरे हैं।
जिन लोगों को चश्मा लगाने में परेशानी या शर्म महसूस होती है, स्पोर्ट्स पर्सन के लिए कॉन्टैक्ट लेंस लगाना सुविधाजनक होता है। आजकल कॉन्टैक्ट लेंस अलग-अलग जरूरतों के अनुसार उपलब्ध हैं। जैसे सिंगल विजन, टोरिक और मल्टीफोकल लेंस।
इतना ही नहीं बाजार में कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो आंखों का रंग बदलने वाले कॉन्टैक्ट लेंस बेच रही है और लोग एक फैशन प्रोडक्ट की तरह भी यूज कर रहे हैं।

डॉ. पुरेंद्र भसीन कहते हैं हमारे जो लोग आते हैं वो अक्सर ये सवाल पूछते हैं कि उनके लिए कॉन्टैक्स लेंस बेहतर या चश्मा लगाना। लेकिन इस सवाल का जवाब कोई भी डॉक्टर नहीं दे सकता है। आपको कॉन्टैक्स लेंस का यूज करना है या फिर चश्मे का ये पूरी तरह से आप किसमें आरामदायक महसूस करते हैं, इस पर निर्भर करता है। आपके लिए क्या सही है ये जानने के लिए नीचे बताई गई टेबल देखें....
| पॉइंट | चश्मा | कॉन्टैक्ट लेंस | किसका फायदा ज्यादा? |
| यूज करने में आसान | आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। | लगाना और निकालना सीखना पड़ता है। | चश्मा लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है। |
| कंफर्ट | लंबे समय तक लगाने से नाक- कान में दर्द होता है | सही तरीके से पहनें तो कंफर्टेबल | लेंस (अगर सही से यूज करें) |
| देखने की क्वालिटी | किनारों से डिस्टॉर्शन हो सकती है | ज्यादा नेचुरल और क्लियर विजन | लेंस ज्यादा अच्छा होता है |
| फील्ड ऑफ व्यू | फ्रेम के कारण सीमित रहता है | पूरा नेचुरल व्यू मिलता है। | लेंस बेहतर तरीके से काम करता है। |
| खेल/एक्टिविटी में | गिरने और टूटने का रिस्क | लेंस पहनकर आसानी से एक्टिविटी कर सकते हैं। | लेंस |
| सुरक्षा | आंख को टच नहीं करता (कम रिस्क) | इंफेक्शन व एलर्जी का रिस्क हो सकता है। | चश्मा |
| आंखों की सेहत | सुरक्षित, ज्यादा परेशानी नहीं | गलत यूज से इंफेक्शन हो सकता है | चश्मा |
| पैसों के लिहाज से | कम खर्च में लंबे समय तक यूज कर सकते हैं। | काफी महंगा होता है। साल में 1 बार बदलना पड़ सकता है। | चश्मा |
| समय | लंबे समय तक बिना किसी तकलीफ के पहन सकते हैं। | ज्यादा समय पहनने पर जलन/ड्रायनेस हो सकती है। | चश्मा |
किसी भी कारण से अगर आप गलत कॉन्टैक्ट लेंस को चुनते हैं, तो इससे आपकी आंखों को नुकसान हो सकता है। गलत कॉन्टैक्ट लेंस चुनने से नीचे बताई गई परेशानियां हो सकती हैं।

जब हमने इस बारे में डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति को कितने समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना ये पूरी तरह से आंखों की सहनशीलता और लेंस के प्रकार पर निर्भर करता है। शुरुआत में आप 4 से 6 घंटे तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना बेहतर होता है, ताकि आंखें धीरे-धीरे इसकी आदत डाल सकें। बाद में आदत पड़ने पर भी रोजाना 8 घंटे भी इसे पहन सकते हैं। डॉ. पुरेंद्र भसीन एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा कॉन्टैक्ट लेंस नहीं पहनना चाहिए।
जी नहीं, रात को सोते समय कॉन्टैक्ट लेंस बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए। रात को कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आंखों में संक्रमण, सूजन और लालिमा की समस्या होती है। डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, रात को सोते समय कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सोने से आंखों को सही ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में रात को कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर बिल्कुल न सोएं।
अगर कॉन्टैक्ट लेंस का यूज करने के बाद आपको आंखों में दर्द, जलन, धुंधलापन या लालिमा महसूस हो रही है, तो इस विषय पर डॉक्टर से बात करें और अपना इलाज करवाएं।