
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 3, 2020 2:01 PM IST
Constipation is when bowel movements become less frequent, and stools become difficult to pass. It mostly happens due to inadequate intake of fibre. Figs or anjeer contain fibres, which helps remove waste from the body. Pistachios, dates and prunes can also help promote bowel movements and relieve constipation. The soluble and insoluble fibres in them may help improve digestion and keep your gut healthy.
कॉन्स्टिपेशन (Constipation) या कब्ज़ की समस्या काफी कॉमन है। लेकिन, यह समस्या छोटी नहीं। लोग अक्सर, कब्ज़ को केवल पेट की मामूली समस्या मान लेते हैं। लेकिन, कुछ लोगों को यह समस्या कई साल परेशान कर सकती है। आंकड़ों के अनुसार भारत में 22 फीसदी लोगों को कभी न कब्ज़ की समस्या हुई है। कब्ज़ की परेशानी अलग-अलग लोगों को अलग तरीके से होती है। अगर, इस समस्या पर समय पर ध्यान ना दिया जाए तो यह गम्भीर हो सकती है। कई लोगों को क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन की समस्या भी होती है। ( Constipation Problems Causes)
आमतौर पर कब्ज़ अनहेल्दी इटिंग हैबिट्स यानि ग़लत खान-पान के ग़लत तरीकों से होती है। जैसे, डायट में कम मात्रा में फाइबर वाली चीज़ों का समावेश या कम मात्रा में पानी पीने की आदत। इसके अलावा कुछ बीमारियों, दवाइयों के साइड-इफेट्स और सोने-जागने के समय जैसे अन्य कारणों से भी कॉन्स्टिपेशन होता है।
बहुत से लोग मल या पेशाब को रोकने की ग़लति करते हैं तो कॉन्स्टिपेशन की समस्या होती है। शौच या पेशाब आने पर उसे रोकने का प्रयास करते हैं तो कब्ज़ की समस्या बनने लगती है।
डायट में फाइबर युक्त फल, सब्ज़ियां और साबुत अनाज शामिल करने से कब्ज़ की समस्या नहीं होती है। लेकिन, प्रोसेस्ड, जंक या अन्य प्रकार की अनहेल्दी डायट लेने वाले लोगों को कब्ज़ यानि कॉन्स्टिपेशन होने लगता है।
जो लोग पानी कम पीते हैं उन्हें भी कॉन्स्टिपेशन की समस्या होती है। दिन भर में 8-10 गिलास (2 लीटर) पानी पीना चाहिए। इसके अलावा सूप, जूस लें। तरबूज़, ककड़ी और स्ट्राबेरी जैसे रसीले फलों और सब्ज़ियों का सेवन भी करना चाहिए।
कसरत ना करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और एक जगह पर बैठे रहने से पाचन क्रिया प्रभावित होता है। इससे कॉन्स्टिपेशन की समस्या होती है।