बच्चों में आम से दिखने वाले ये लक्षण हो सकते हैं हेपेटाइटिस बी का संकेत, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें इससे बचाव

Hepatitis b in children: हेपेटाइटिस बी के लिए वैक्सीनेशन शेड्यूल होने के बावजूद भी इसकी पूरी तरह से रोकथाम नहीं हो पा रही है। इस आर्टिकल में डॉक्टर से बच्चों में हेपेटाइटिस से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : March 2, 2023 5:15 PM IST

हेपेटाइटिस कई प्रकार का होता है, जिसमें सबसे हानिकारक हेपेटाइटिस बी को माना जाता है। यह लिवर को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो बड़ों से लेकर बच्चों तक किसी को भी गंभीर रूप से बीमार बना सकती है। लेकिन इसके ज्यादा मामले बच्चों में ही पाए जाते हैं। वैसे तो भारत में जन्म से ही बच्चों को हेपेटाइटिस बी का टीका देना शुरू कर दिया जाता है। लेकिन इसके बावजूद भी हेपेटाइटिस बी के मामलों पर पूरी तरह से रोकथाम नहीं लग पाई है। देखा जा रहा है कि हेपेटाइटिस बी बच्चों में ज्यादा गंभीर समस्याएं पैदा कर रहा है। दरअसल, हेपेटाइटिस बी एक गंभीर बीमारी है और यदि खासतौर पर बच्चों में इसकी समय रहते देखभाल न की जाए तो यह जानलेवा स्थिति भी पैदा कर सकती है। इसलिए इस बारे में पूरी तरह से जानकारी होना जरूरी है। इस बारे में हमने डॉक्टर परविंदर सिंह नारंग से बात की उन्होंने बच्चों में हेपेटाइटिस बी की स्थिति से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी। डॉक्टर पी एस नारंग शालीमार बाग के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डायरेक्टर हैं और पीडियाट्रिक्स व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के स्पेशलिस्ट हैं। चलिए जानते हैं, इस बारे में

एक वायरल इन्फेक्शन है हेपेटाइटिस बी

डॉक्टर पी. एस नारंग कहते हैं कि हेपेटाइटिस बी एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन है, जो एक्यूट एंड क्रोनिक हेपेटाइटिस, लिवर सिरोसिस और कार्सिनोमा जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। डॉक्टर नारंग बताते है कि हेपेटाइटिस बी इन्फेक्शन एक बहुत की गंभीर प्रकार का इन्फेक्शन है, लेकिन वैक्सीन की मदद से इसकी शत-प्रतिशत रोकथाम की जा सकती है। हेपेटाइटिस बी फैलने के दो सबसे आम तरीके हैं, एक संक्रमित मां से बच्चे तक यह संक्रमण फैलना। दूसरा है बचपन में कम्युनिटी बेस्ड ट्रांसमिशन, जिसमें बच्चे को दूषित खून चढ़ाने, दूषित इंजेक्शन सुई या आईवी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से होता है। हालांकि, यदि मां को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लगी हुई है, तो यह बीमारी मां से बच्चे तक नहीं फैल पाती है। इसलिए हर प्रेग्नेंट महिला की समय रहते जांच की जानी चाहिए और यदि किसी महिला को हेपेटाइटिस बी है, तो उसे वैक्सीन की अतिरिक्त डोज जरूर लगनी चाहिए।

हेपेटाइटिस बी वैक्सीनेशन जन्म से जरूरी

डॉक्टर पी. एस नारंग ने बताया कि वैसे तो हेपेटाइटिस बी वैक्सीनेशन नेशनल इम्यूनाइजेशन शेड्यूल के तहत 18 देशों में लागू है और हम भाग्यशाली हैं कि यह हमारे देश में भी नेशनल इम्यूनाइजेशन शेड्यूल में भी शामिल है। हर बच्चे को उसके जन्म से लेकर 6 महीने तक हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की 4 डोज लगाई जाती हैं। सही व पूर्ण टीकाकरण के साथ-साथ समय-समय पर जांच भी जरूरी है, ताकि हेपेटाइटिस बी से होने वाली गंभीर जटिलताओं के होने के खतरे को कम किया जा सके।

रोकथाम करने का सिर्फ एक ही तरीका

डॉक्टर पीएस नारंग कहते हैं कि हेपेटाइटिस की पूरी तरह से रोकथाम करने का सिर्फ एक ही तरीका है और वह है जन्म से ही हेपेटाइटिस बी वैक्सीनेशन करवा लेना। साथ ही जिनका बचपन में हेपेटाइटिस बी वैक्सीनेशन नहीं उन्हें जितना जल्दी हो सके इसकी वैक्सीन की सभी जरूरी डोज लगवा लेनी चाहिए। हेपेटाइटिस बी इन्फेक्शन का इलाज एंटीवायरल थेरेपी से किया जाता है और उसके लिए इसकी जितना जल्दी हो सके जांच कर लेना ही जरूरी है।

इन लक्षणों को न करें इग्नोर

आपको बता दें कि बच्चों में हेपेटाइटिस के लक्षण बहुत ही आम हो सकते हैं, जिनमें पेट दर्द, गहरे रंग का पेशाब आना, बुखार, जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, थकान, त्वचा पीली पड़ना और जी मिचलाना व उल्टी आदि हो सकती है। हालांकि, जरूरी नहीं है कि बच्चे को हो रहे ये लक्षण हेपेटाइटिस बी का ही संकेत हों, लेकिन फिर इन लक्षणों का संकेत मिलते ही एक बार जांच जरूर करवा लेनी चाहिए।

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