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International Epilepsy Day 2022: मिर्गी या एपिलेप्सी एक गम्भीर न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर (Neurological Disorder) है, जिसमें लोगों को दौरे आते हैं। मिर्गी की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं जिसमें पुरानी चोट या बर्थ इफेक्ट या कोई अनुवांशिक कारण भी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के आंकड़ों के मुताबिक विश्वभर में तकरीबन 5 करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। वहीं, भारत में मिर्गी के मरीजों की संख्या लगभग 60 लाख है। भारत ही नहीं विश्वभर में मिर्गी या एपिलेप्सी के साथ कई भ्रांतियां और मिथक जुड़े हुए हैं। मिर्गी से जुड़े ऐसे ही कुछ मिथकों (Common Myths About Epilepsy) के बारे में पढ़ें यहां और साथ ही पढ़ें उसके पीछे के तथ्य।
मिर्गी को ब्रेन या दिमाग से जुड़ी बीमारी बताया जाता है लेकिन, एक्सपर्ट के अनुसार यह एक मानसिक समस्या नहीं है। एपिलेप्सी फाउंडेशन की रिपोर्टस् के मुताबिक मिर्गी मेंटल डिज़िज़ या मानसिक बीमारीनहीं कही जा सकती। यह एक प्रकार का डिसॉर्डर है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। वहीं, मिर्गी से पीड़ित लोगों को स्ट्रेस (Stress), डिप्रेशन (Depression) और एंग्जायटी (Anxiety) जैसी समस्याएं होने की संभावना अधिक होती है।

मिर्गी से जुड़ा यह एक मिथक (Myths About Epilepsy)है कि मिर्गी की बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकती है। लेकिन, एक्सपर्ट्स के अनुसार यह पूरी तरह गलत है। मिर्गी की बीमारी संक्रामक नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक बिल्कुल नहीं फैलती क्योंकि यह एक नॉन-कम्युनिकेबल डिसॉर्डर (non communicable diseases) है। हालांकि,विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक,दुनिया में आधे से अधिक लोगों में मिर्गी के कारणों का पता नहीं चल सका है।
(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई बीमारी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)