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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 50 फीसदी लोग मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। सर्जरी सहित मोतियाबिंद के साथ कई गलत धारणाएं जुड़ी हुई हैं। विन विजन आई हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर श्रीलक्ष्मी निमगड्डा आपको मोतियाबिंद से जुड़े कुछ मिथक और उनका सच बता रही हैं
मिथक 1
मोतियाबिंद की सर्जरी बहुत दर्दनाक है
पहले सर्जरी के लिए आंखों को सुन्न करने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि अब आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जाता है। उसके बाद सर्जरी के लिए 5-7 मिनट की बात है, जो कि बिल्कुल दर्द रहित है। अब लेजर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रोगी को आसानी होती है।
मिथक 2
मोतियाबिंद केवल बुजुर्गों को होता है
वास्तव में यह समस्या वयस्कों और बच्चों को भी हो सकती है। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जब कुछ शिशुओं ने इस समस्या के साथ जन्म लिया है। गर्भावस्था के दौरान वायरल इन्फेक्शन और स्टेरॉयड जैसी कुछ दवाओं के इस्तेमाल से शिशु को मोतियाबिंद होने का जोखिम हो सकता है। ऐसे परिवार या समुदाय में शादी होना जहां पहले से किसी को ययह समस्या हो, तो आपको मेटाबोलिक डिसऑर्डर हो सकते हैं जिससे अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों में मोतियाबिंद होने का जोखिम हो सकता है।
मिथक 3
मोतियाबिंद सर्जरी के बाद चश्मा लगाना जरूरी है
आपको बता दें कि ये तथ्य सही नहीं है। वास्तव में सर्जरी के बाद पहले से अधिक स्पस्ट दृष्टि हो जाती है। इसके अलावा अगर आप पहले से ही चश्मा लगाते थे, तो सर्जरी से आपकी दृष्टि सही हो सकती है और आप चश्मे से छुटकारा पा सकते हैं। जरूरत होने पर सर्जरी के दौरान लेंस लगाए जाते हैं, जहां सर्जरी के दौरान मोतियाबिंद हटा दिया जाता है और उसी समय में कृत्रिम लेंस लगाए जाते हैं। मोनो-फोकल प्रत्यारोपण में आपको पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत होती है जबकि मल्टीफोकल प्रत्यारोपण में आपको चश्मे की जरूरत नहीं होती है।
मिथक 4
सर्जरी के बाद रिकवर होने में कई हफ्ते लगते हैं
ऐसा नहीं है। चूंकि सर्जरी कुछ मिनट में ही हो जाती है इसलिए रिकवर होने में ज्यादा से ज्यादा एक या दो दिन लग सकते हैं। बल्कि दूसरे दिन से आप अपने दैनिक कामकाज कर सकते हैं। साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए आपको क्या करें और क्या नहीं, इस बात का ख्याल रखना चाहिए। हालांकि यह प्रक्रिया सुरक्षित है, इसमें घाव से संबंधित इन्फेक्शन का खतरा है लेंस के कारण नहीं। घाव सर्जरी से हो सकता है। इसके अलावा किसी भी जोखिम से बचने के लिए डायबिटीज के मरीजों को अपने ब्लड शुगर लेवल को मेन्टेन रखना चाहिए।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock