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Myths about organ donation: अंगदान या ऑर्गन डोनेशन (Organ donation) एक ऐसी स्थिति है जहां किसी व्यक्ति के शरीर से किसी खास अंग या ऑर्गन को निकालकर किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया में किसी जीवित या मृत व्यक्ति के शरीर से किसी अंग टिश्यूज को निकालकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। आमतौर पर जिन अंगों का ट्रांसप्लांट किया जाता है उनमें किडनी (kidneys), दिल (heart), लिवर (liver), पैंक्रियाज (pancreas), बोन मैरो ( bone marrow) और कॉर्निया (corneas) जैसे अंग शामिल हैं। हालांकि, अंगदान से जुड़ी कई गलत जानकारियां और मिथक भी हमारे आसपास फैले हुए हैं जिनकी वजह से लोगों को अंगदान में झिझक होती है। यहां पढ़ें अंगदान से जुड़े कुछ मिथकों और उनके पीछे का सच। (myths about organ donation in Hindi.)

आमतौर पर यह कहा जाता है कि किडनी दान करने वाले व्यक्ति की किडनी निकालने के बाद लोगों को मां-बाप बनने में दिक्कत आ सकती है। खासकर, महिलाओं के लिए गर्भधारण मुश्किल हो सकता है। लेकिन, यह सच नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, किडनी दान करने वाली महिलाएं और पुरुषों के लिए आगे चलकर मां-बाप (parenthood after kidney donation) बन पाते हैं और यह पूरी तरह से सुरक्षित होगा। हालांकि, महिलाओं को थोड़ा अधिक सावधान रहने की सलाह दी जाती है। किडनी डोनेट करने के बाद महिलाओं को एक साल तक अपना ख्याल रखने और रिकवरी के लिए इंतजार करने की सलाह दी जाती है। उसके बाद वह महिला गर्भधारण कर सकती है। (chances of conceiving after organ donation)
इस बारे में काफी चर्चा होती है कि पुरुषों और महिलाओं के अंग एक-दूसरे को ट्रांसप्लांट नहीं किए जा सकते। लेकिन, एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह केवल मिथक है और इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। खासकर किडनी और लिवर जैसे अंग जिनके बारे में यह मिथक काफी अधिक प्रचलित है उनका भी प्रत्यारोपण काफी आसानी से और पूरे सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।
छोटे बच्चों के अंग किसी और बच्चे को ट्रांसप्लांट (Organi transplantation in kids) नहीं किए जा सकते हैं। लेकिन, यह केवल एक गलत धारणा हैं। बच्चों में भी मृत्यु के बाद अंगदान किया जा सकता है। हालांकि, अभिभावकों की मंजूरी के बाद ही बाद ही बच्चों के अंग लिए जाते हैं या उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। हालांकि, इससे पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अंगदान करने वाले बच्चे को किसी प्रकार की बीमारी ना हो। डॉक्टरों और जानकारों की रिपोर्ट और मंजूरी के बाद ही बच्चों के अंग दान किए जा सकते हैं।
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