
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Medically Verified By: Dr. Sanjay Gupta
बारिश की पहली फुहार जहां भीषण गर्मी से राहत देती है, वहीं मानसून अपने साथ कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जगह-जगह पानी जमा होने लगता है और खाने-पीने की चीजों के दूषित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून को संक्रामक बीमारियों का मौसम भी कहा जाता है। पुबमेड की वेबसाइट पर मौजूद रिसर्च बताती है कि मानसून में डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, वायरल फीवर, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ते हैं। खास बात यह है कि इस तरह की मानसून में बीमारियों की चपेट में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग जल्दी चपेट में आते हैं। दिल्ली, नोएडा समेत पूरे उत्तर प्रदेश में जब मानसून दस्तक दे चुका है तब हम आपको बताने जा रहे हैं इस मौसम में कौन सी 5 बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली के मॉडल टाउन स्थिति यथार्थ हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि मानसून में हवा में नमी होने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के पनपने के लिए सही माहौल मिलता है। यही सभी चीजें मिलकर लोगों को बीमार करती हैं।
- डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि मानसून में जगह- जगह पानी जमा होने लगता है, जिसके कारण मच्छर जमा होते हैं और मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
- मानसून में साफ पानी के भी दूषित या खराब होने की संभावना कई गुणा ज्यादा होती है।
- इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। जिससे खान भी जल्दी खराब होता है।
बारिश में इंफेक्शन वाले बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में होने वाली कई जलजनित और वेक्टर बोन डिजीज का खतरा सामान्य की तुलना में ज्यादा होता है।
मानसून में मच्छर ज्यादा होने के कारण डेंगू का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है। द लसेंट द्वारा की गई रिसर्च बताती है कि डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है।
डेंगू के लक्षणों की जानकारी देते हुए डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि यह वायरल संक्रमण से थोड़ा अलग होता है।
डॉक्टर बतते हैं कि डेंगू के गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं और मरीज को अस्पताल में तुरंत भर्ती करवाना पड़ सकता है।
मानसून में आप या आपके परिवार का कोई सदस्य डेंगू की चपेट में न आए इसके लिए आप नीचे बताए गए उपायों को अपना सकते हैं।
बारिश में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
मानसून में मलेरिया के मामले भी ज्यादा बढ़ जाता हैं। मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। रिसर्च बताती है कि डेंगू की तुलना में मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ते हैं।
मलेरिया होने पर सामान्य तौर पर जो लक्षण नजर आते हैं?
WHO के अनुसार, मलेरिया का इलाज संक्रमण के प्रकार और गंभीरता के अनुसार एंटी-मलेरियल दवाओं से किया जाता है। इससे बचाव के लिए आप नीचे बताए गए उपायों को अपना सकते हैं।
डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि बारिश के मौसम में तापमान और हवा में नमी ज्यादा होने के कारण वारयल फीवर के मामले भी बढ़ जाते हैं। वायरल फीवर वो होता है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है। अगर परिवार में किसी को एक बार वायरल फीवर हो जाए तो धीरे- धीरे परिवार के अन्य सदस्य भी उसकी चपेट में आ जाते हैं।
वायरल फीवर के लक्षण लगभग सामान्य बुखार जैसे ही होते हैं। लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण सामान्य की तुलना में अलग नजर आते हैं।
WHO की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी बताती है वायरल फीवर या मानसून में होने वाले वारयल इंफेक्शन से बचाव का सबसे आसान तरीका है अपने हाथों की सही तरीके से साफ- सफाई करना। हाथ साफ होंगे तो इंफेक्शन के एक-दूसरे के पास इंफेक्शन फैलने का खतरा भी कम होना। वायरल फीवर से बचने के लिए आप नीचे बताए गई चीजों को को भी अपना सकते हैं।
मानसून में वायरल फीवर तेजी से फैलता है।
मानसून में वायरल फीवर तेजी से फैलता है।
टायफाइड मुख्य रूप से गंदे पानी द्वारा फैलने वाली बीमारी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिसर्च बताती है कि टायफाड ईसाल्मोनेला टायफी नामक जीवाणु के कारण होता है। मानसून में सड़क किनारे मिलने वाले कटे फल, चाट, गोलगप्पे और दूषित पानी इसके प्रमुख कारण बन सकते हैं।
टायफाइड होने पर नीचे बताए गए लक्षण नजर आते हैंः
मानसून में होने वाले टायफाइड से बचाव करने के लिए सबसे जरूरी है साफ पानी पीना। मानसून में केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
टायफाइड से बचने के लिए बाहर का खाना खाने से बचें। जहां तक संभव हो घर पर पका हुआ ताजा खाना ही खाएं।
अपने खाने में ताजा फल और हरी सब्जियां ज्यादा मात्रा में शामिल करें।
गैस्ट्रोएंटेराइटिस मुख्य रूप से पेट से जुड़ी हुई बीमारी है। मानसून में वायरल इंफेक्शन, गंदे खाने और साफ पानी न पीने के कारण गैस्ट्रोएंटेराइटिस की समस्या तेजी से बढ़ती है। जर्नल Clinical Microbiology Reviews में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मानसून के दौरान डायरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामले भारत में ज्यादा दर्ज किए जाते हैं। डॉ. संजय गुप्ता के अनुसार, बारिश के दिनों में जो लोग बाहर ठेले या रेस्त्रां में पका हुआ खाना ज्यादा खाते हैं, उनमें यह बीमारी देखी जाती है।
गैस्ट्रोएंटेराइटिस होने पर विभिन्न लक्षण नजर आते हैंः
गैस्ट्रोएंटेराइटिस पेट से जुड़ी बीमारी है। इस स्थिति में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए ORS, नारियल पानी और फलों का ताजा जूस पिएं।
रिसर्च और डॉक्टर के साथ बातचीत के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि मानसून का मौसम जितना सुहावना होता है, उतना ही हेल्थ के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। डेंगू, मलेरिया, टायफाइड, वायरल फीवर, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियां इस मौसम में तेजी से फैलती हैं। हालांकि साफ पानी पीना, फ्रेश खाना, हाथों की सफाई रखना, मच्छरों से बचाव किया जाए तो बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।