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डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है। भारत में यह बीमारी तेजी से अपने पैर पसार रही है। खासकर दक्षिण भारत के लोगों को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। दुर्भाग्य से इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है केवल बेहतर जीवनशैली, खानपान और एक्सरसाइज के जरिए ही इसे कंट्रोल किया जा सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर डायबिटीज के मरीजों के उचित देखभाल की सलाह देते हैं। केवल व्यस्क ही नहीं बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। आपको बता दें कि खाने-पीने से जुड़ी ख़राब आदतें इसका मुख्या कारण हैं। चेन्नई स्थित मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर में हेड कॉर्पोरेट एंड वेलनेस डॉक्टर गीता रंगनाथन आपको बच्चों में डायबिटीज के मुख्य कारण बता रहे हैं।
1) लगातार ठंड
जब आपका शरीर ठंड की गिरफ्त में रहता है, तो आपका इम्यून सिस्टम लड़ने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करता है। एंटीबॉडी कोल्ड को नष्ट करने के लिए खत्म होती है इससे इंसुलिन कम होता है और डायबिटीज का खतरा होता है।
2) वायरल इन्फेक्शन
कुछ वायरल इन्फेक्शन से टाइप 1 डायबिटीज का खतरा हो सकता है क्योंकि वे इंसुलिन सेल्स को नष्ट कर देते हैं। हालांकि यह डायबिटीज का आम कारण नहीं है।
3) फिजिकल एक्टिविटी की कमी
फिजिकल एक्टिविटी की कमी कारण इंसुलिन उत्पादन करने वाली सेल्स प्रभावित हो सकती हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है जिससे डायबिटीज का खतरा होता है।
4) ज्यादा खाना
कार्बोहाइड्रेट के अधिक सेवन से यह शरीर में फैट के रूप मर जमा हो सकता है। इसके अलावा शुगर, चॉकलेट और मिठाई आदि से पैन्क्रीऐटिक ग्लैंड पर भार बढ़ा सकते हैं। इंसुलिन सेल्स के क्रमिक थकावट से डायबिटीज हो जाता है।
5) जेनेटिक
बच्चे को डायबिटीज होना जेनेटिक कारण भी है। अगर पेरेंट्स में किसी को डायबिटीज है, तो बच्चा इस बीमारी के साथ पैदा हो सकता है या उसे 25 से 50 वर्ष की उम्र में इसका खतरा हो सकता है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock