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कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल ने हरियाणा के सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए निशुल्क हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया।
कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल (गुरुग्राम) ने हरियाणा (Haryana) के चौमा विलेज के सरकारी स्कूल (Government School) में छात्रों व शिक्षकों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया। शिविर में छात्रों और शिक्षकों ने पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी), बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) टेस्ट, रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट आदि की नि: शुल्क जांच करवाई। नियमित परीक्षणों के अलावा, दंत समस्याओं के लिए मुफ्त परामर्श भी प्राप्त किया । इस स्वास्थ्य जांच शिविर का लाभ 150 लोगों ने उठाया।
डॉ. मंजीता नाथ दास, इंटरनल मेडिसिन, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल का कहना है कि सर्दियों में बच्चो और बुजुर्गों पर कठोर मौसम का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। स्कूली बच्चों को सुबह की ठंडी हवा में निकलना पड़ता है, जो सबसे ज्यादा नुक्सानदेह होती है। इस से श्वांस की समस्या, सर्दी खांसी, फ्लू जैसी बीमारियाँ हो जाती हैं। बदलते हुए मौसम में भी ये बीमारियाँ आम हैं। हाथ, खाने और मुंह की बीमारी, पेट दर्द, कंजंक्टिवाइटिस , कान का संक्रमण इत्यादि बच्चों में सबसे आम बीमारियां हैं। इनका इलाज बहुत सरल होता है और दवाइयों से जल्द इलाज हो जाता है, लेकिन साफ-सफाई और सावधानी रखने से इन बीमारियों को होने से पहले ही रोका जा सकता है। बच्चों में नियमित जांच और देख भाल की आवश्यकता है। नियमित व्यायाम, साफ-सफाई एक महत्वपूर्ण कदम हैं स्वस्थ्य जीवनशैली के लिए।
इस तरह के कार्यक्रम एक पहल की शुरुआत है, जो लोगो को एनसीडी की बढ़ती घटनाओं के प्रति जागरूक बनाती है। इस साल ठंड का मौसम विस्तारित हो गया है, जिसकी वजह से नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के मामले भी बढ़ गए हैं। ऐसे में बच्चों के स्वस्थ्य का ख्याल रखना बेहत आवश्यक है। प्रचलित कोरोना वायरस जैसी बीमारियों का दुनिया भर में भय बना हुआ है, ऐसे में निवारण ही सबसे अच्छा उपाय है। इस कैंप के दौरान बच्चों में स्वस्थ्य जागरूकता के साथ व्यक्तिगत स्वत्छता के बारे में बच्चों को बताया गया।
डॉ. ने यह भी कहा कि इस तरह के शिविर गुरुग्राम और पूरे भारत में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन कदम के रूप में देखा जा रहा है। अध्ययनों से पता चला है कि प्रति सप्ताह 150 मिनट का व्यायाम, जिसमें प्रतिरोध प्रशिक्षण के साथ-साथ मध्यम और शारीरिक गतिविधि शामिल है, मृत्यु दर को 30% तक कम कर सकता है। अवसाद, मधुमेह, स्ट्रोक और कैंसर के जोखिम को भी कम कर सकता है।