पीरियड्स जैसा दर्द? कहीं यह कोलन कैंसर का संकेत तो नहीं! स्त्री रोग विशेषज्ञ ने बताए लक्षण
भारत में महिलाएं अक्सर पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को पीरियड्स से जोड़कर देखती हैं। जिसका नतीजा यह होता है कि महिलाओं के होने वाले कोलन कैंसर का पता देरी से चलता है। यही कारण है आज हम आपको बताने जा रहे हैं कोलन कैंसर के लक्षण, जिन पर महिलाओं को गौर करना चाहिए।
शायद गैस होगी, पीरियड आने वाले हैं, कब्ज की वजह से पेट दर्द हो रहा होगा। हम महिलाएं अक्सर पेट के निचले हिस्से के दर्द को ऐसे ही टाल देती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही दर्द कोलन कैंसर यानी बड़ी आंत के कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है? नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट द्वारा की गई रिसर्च बताती है कि कोलन कैंसर के कई लक्षण पीरियड के क्रैम्प्स, IBS या पाइल्स से इतने मिलते-जुलते हैं कि लोग महीनों तक इसे नजरअंदाज कर देते हैं। दिल्ली के सनराइज हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निकिता त्रेहन बताती हैं कि महिलाओं को होने वाले कोलन कैंसर शुरुआती स्टेज में पीरियड्स के दर्द जैसा होता है। तो चलिए देर किस बात की है डॉक्टर से जानते हैं कि कोलन कैंसर का दर्द कैसा होता है, इसके दूसरे लक्षण क्या हैं और समय पर पकड़ में आने पर इसका इलाज कितना संभव है।
कोलन कैंसर का दर्द पीरियड के दर्द जैसा क्यों लगता है?
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. निकिता त्रेहन कहती हैं- हमारी बड़ी आंत यानी Colon पेट के निचले हिस्से में ही होती है। वहीं गर्भाशय और अंडाशय भी होते हैं। जब कोलन में ट्यूमर बढ़ता है तो वो आंत को ब्लॉक करने लगता है। इससे गैस, ऐंठन और मरोड़ वाला दर्द होता है। ये दर्द बिल्कुल पीरियड के समय होने वाले क्रैम्प्स जैसा लगता है। फर्क सिर्फ इतना है कि पीरियड का दर्द 3-5 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन कोलन कैंसर का दर्द आता-जाता रहता है और धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी द्वारा की गई स्टडी बताती है कि महिलाओं के पेट दर्द और ऐंठन कोलन कैंसर के सबसे आम शुरुआती लक्षणों में से एक हैं।
कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
डॉ. निकिता त्रेहन बताती हैं कि कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण एक नहीं बल्कि कई होते हैं। इन लक्षणों को समय रहते पहचानना बहुत जरूरी है। कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षणों में मुख्य रूप से शामिल हैः
- पेट दर्द और ऐंठन- पीरियड जैसा, गैस जैसा या मरोड़ वाला दर्द जो बार-बार हो और दवा से ठीक न हो।
- मल की आदत में बदलाव- 2 हफ्ते से ज्यादा समय तक दस्त या कब्ज का होना। या फिर कब्ज और दस्त का बारी-बारी से आना।
- मल का पतला होना- स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि अगर ट्यूमर आंत को सिकुड़ा दे तो पेंसिल जैसी पतली पॉटी आने लगती है।
- खून आना- कोलन कैंसर के मामलों में महिला को अपनी पॉटी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। अगर आपको पॉटी में चमकीला लाल खून या मल का रंग गहरा नजर आता है, तो डॉक्टर बात करें।
- थकान और कमजोरी- आंत से खून रिसने की वजह से शरीर में खून की कमी यानी Anemia हो जाती है। जिसकी वजह से हर समय थकान लगती है। कुछ मामलों में यह गंभीर शारीरिक कमजोरी के कारण भी होता है।
- बिना वजह वजन घटना- खाना सही खा रहे हैं फिर भी 2-3 किलो वजन कम हो जाए तो ये चेतावनी है कि कोलन कैंसर और किसी गंभीर बीमारी का।
- पेट फूलना और गैस- आंत ब्लॉक होने की वजह से पेट में गैस और सूजन बनी रहती है। यह भी कोलन कैंसर का एक लक्षण माना जाता है।
- अधूरी पॉटी का एहसास- कई महिलाओं को पॉटी के बाद भी पेट साफ नहीं हुआ जैसा महसूस होता है। अगर यह परेशानी लगातार हो रही है तो डॉक्टर से बात करें।
क्यों होता है कोलन कैंसर?
कोलन कैंसर किसी एक कारण से नहीं होता है। किसी महिला को कोलन कैंसर होने के पीछे कई कारण होते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल है-
- उम्र 50+ - 90% केस 50 साल के बाद आते हैं
- पारिवारिक इतिहास - घर में किसी को कोलन कैंसर रहा हो
- खान-पान - लाल मीट, प्रोसेस्ड फूड ज्यादा और फाइबर कम खाना
- लाइफस्टाइल - मोटापा, शराब, धूम्रपान और एक्सरसाइज न करना
- IBD - Crohn's और Ulcerative Colitis
कोलन कैंसर का पता कैसे लगाते हैं?
डॉक्टर बताती हैं कि महिलाओं में अगर ऊपर बताए गए लक्षण 2 सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहते है तो उन्हें तुरंत मेडिकल एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए। डॉक्टर कोलन कैंसर का पता लगाने के लिए विभिन्न प्रकार के मेडिकल टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं-
- Colonoscopy - ये सबसे जरूरी टेस्ट है। कैमरे वाली ट्यूब से पूरी आंत देखी जाती है और जरूरत पड़े तो बायोप्सी भी ली जाती है।
- CT Scan - कैंसर फैला है या नहीं ये देखने के लिए सीटी- स्कैन किया जाता है।
- ब्लड टेस्ट - खून की कमी और CEA मार्कर देखने के लिए यह टेस्ट होता है।
- Stool Test - पॉटी में छुपा हुआ खून देखने के लिए मल की जांच भी की जाती है।
क्या कोलन कैंसर ठीक हो सकता है?
इस बारे में दिल्ली के आर्ट ऑफ हीलिंग कैंसर के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा कहते हैं- हां, किसी भी महिला को अगर कोलन कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो यह 90% तक पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
इस कैंसर का इलाज पूरी तरह से बीमारी के स्टेज और इसका इलाज कैसे किया जा रहा है, इस बात पर निर्भर करता है।
1. सर्जरी
कोलन कैंसर के इलाज में मुख्य रूप से सर्जरी की जाती है। इसमें सर्जन ट्यूमर वाले हिस्से और उसके आसपास की आंत को काटकर निकाल देते हैं। शुरुआती स्टेज में यही काफी है।
2. कीमोथेरेपी
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा कहते हैं कि सर्जरी के बाद या एडवांस केस में कैंसर की कोशिकाओं को मारने के लिए दवाएं दी जाती हैं।
3. रेडिएशन थेरेपी
कोलन कैंसर से पहले ट्यूमर को छोटा करने के लिए रेडिएशन थेरेपी दी जाती है। ट्यूमर का साइज छोटा होने पर सर्जरी आसान हो जाती है।
कोलन कैंसर से बचाव कैसे करें?
डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा बताते हैं कि कोलन कैंसर से बचाव के लिए रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में खानपान और एक्सरसाइज को शामिल करना बहुत जरूरी है। कोलन कैंसर से बचाव के लिए नीचे बताई गई चीजों को जरूर अपनाएं।
- फाइबर बढ़ाएं - रोज फल, सब्जी, साबुत अनाज खाएं। फाइबर आंत को साफ रखने में मदद करता है।
- एक्सरसाइज - हफ्ते में 150 मिनट टहलना या वर्कआउट करने से शरीर एक्टिव रहता है और कैंसर का खतरा कम होता है।
- शराब और सिगरेट छोड़ें- किसी भी प्रकार की शराब या सिगरेट का सेवन कोलन कैंसर समेत अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।
- स्क्रीनिंग कराएं - 45 साल के बाद हर 10 साल में Colonoscopy कराना जरूरी है। इस टेस्ट के जरिए कोलन कैंसर का पता समय रहते चल जाता है।
- वजन कंट्रोल रखें- कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि मोटापा और बढ़ता हुआ वजन कैंसर की वजह बन सकता है। कोलन कैंसर से बचाव के लिए वजन को कंट्रोल में रखने की कोशिश करें।
कोलन कैंसर को Silent Killer कहा जाता है क्योंकि शुरुआती लक्षण बहुत आम होते हैं। पेट दर्द को हमेशा गैस या पीरियड समझकर दवा मत खाएं। अपने शरीर की सुनें। अगर कुछ अलग लग रहा है तो जांच जरूर करवाएं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आपको अपने अंदर किसी प्रकार का लक्षण नजर आ रहा है तो इस बारे में तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें।