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Written By: Atul Modi | Published : November 12, 2020 8:11 PM IST
सर्द मौसम में क्यों बढ़ जाता है हृदय रोगों का खतरा, एक्सपर्ट से जानिए सर्दियों में दिल को दुरुस्त रखने के उपाय
अक्सर यह देखा गया है कि मौसम के बदलाव के साथ ही उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में रहने वालों लोगों की हृदय की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, विशेषकर गर्मी की अपेक्षा सर्दियों में यह अधिक पाया जाता है। सर्दी के मौसम के साथ ही उच्च रक्तचाप, एंजायना, हार्ट अटैक, अचानक हृदयाघात, हार्टफेल और ब्रेन स्ट्रोक जैसी हृदय की अधिकांश बीमारियों की बाढ़ सी आ जाती है। अभी तक विश्वसनीय तरीके पर तो इसके कारण को समझा नहीं जा सका है लेकिन इसकी अंदरूनी और बाहरी वजहों को लेकर कई धारणाओं का विश्लेषण किया गया है।
हृदयरोग के मरीजों को विशेषकर इन दिनों में अपने आहार, व्यायाम गतिविधियों, दवाओं और नियमित रूप से डाक्टर से अपनी जांच पर ध्यान देना चाहिए।
सर्दी के मौसम में आपके हृदय की सही देखरेख के लिए जरूरी है कि आप हृदय की आवश्यकता के अनुरूप ही अपने आहार में फल, फाइबरयुक्त अनाज, दाने, मछली, सलाद और सब्जियों को शामिल करें। इसके साथ ही साथ चर्बीयुक्त और ट्रांस वसायुक्त खाद्य पदार्थ, कोलेस्ट्रॉल और मिठाइयों से परहेज ही रखना चाहिए जो अनावश्यक रूप से हृदय पर दबाव बनाते हैं। अपने शरीर को गर्म रखने की शक्ति देने के लिए हमेशा गर्मागर्म भोजन और पेय लें। सब्जियों का एकाध बाउल सूप स्वास्थ्यकारक तो होगा ही, वह पेट भी भटकेगा।
सर्दी का मौसम चूंकि बाहर के व्यायाम और मैदानी खेलों के लिए अनुकूल नहीं होता लेकिन अपने शरीर और हृदय को स्वस्थ रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप इंडोर में निरंतर व्यायाम करें। इसके अलावा यह भी सही होगा कि सर्दी की भोर में वॉक या जॉगिंग करने से बचा जाए क्योंकि तब हवा में सघन प्रदूषण भी काफी होता है।
अपने आप को गर्म रखने के लिए कोई बेहद मोटा कपड़ा पहनने के बदले कई कपड़ों की तह पहनना सही होता है। इससे इनके बीच हवा एक सुरक्षात्मक अवरोधक का निर्माण करती है। साथ ही साथ जब बाहर जा रहें हों तो टोपी या सिर ढकने वाला स्कार्फ, ग्लव्स और मोजे भी पहनने चाहिए क्योंकि इन अंगों से भी गर्मी निकल जाती है।
सर्दी के सघन मौसम में समुचित मात्रा में दवाओं को रखना बेहद अहम है क्योंकि वातावरण प्रतिकूल होने पर दवा की दुकान तक जाना ना हो पाए और आप डोज लेने से वंचित रह जाएं। इसके अलावा अपने डॉक्टर से जांच नियमित रूप से करवाएं जिससे आपके स्वास्थ्य के पैमाने में आए किसी भी बदलाव को तुरंत परखा और सही किया जा सके।
नोट: यह लेख मुंबई के एशियन हार्ट् इंस्टीट्यूट के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियालॉजिस्ट डॉ. तिलक सुवर्णा से हुई बातचीत पर आधारित है।