
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
liver Cancer and Cirrosis
लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, इस बात से हम सभी अच्छे से वाकिफ हैं। यह हमारे शरीर में होने वाली कई प्रक्रियाओं में भाग लेता है, जिसमें खाना पचाना, शरीर से डिटॉक्स पदार्थों को बाहर निकालना, शरीर के मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करना इत्यादि शामिल हैं। ऐसे में लिवर का स्वस्थ होना बहुत ही जरूरी है। अगर आप अपने लिवर को स्वस्थ नहीं रखते हैं, तो इससे कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। इसमें वायरल इंफेक्शन से लेकर फैटी लिवर की परेशानी शामिल है।
लिवर की तमाम समस्याओं में दो समस्याएं काफी गंभीर लिस्ट में शामिल होती हैं, जिसमें सिरोसिस और लिवर कैंसर है। अक्सर हम में से कई लोग इन्हें एक ही बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस में ये दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। हां, लेकिन यह सच है कि दोनों ही बीमारियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक बीमारी दूसरी के खतरे को बढ़ा सकती है। आइए इस विषय को H.O.P.E Oncology के मेडिकल ऑन्कोलॉजी, डायरेक्टर डॉ. अमीश वोरा से विस्तार से समझते हैं-
डॉक्टर कहते हैं कि सिरोसिस एक क्रॉनिक और प्रोग्रेसिव लिवर डिजीज है, जिसमें लिवर के स्वस्थ टिश्यू धीरे-धीरे नष्ट होकर उनकी जगह स्कार टिश्यू बन जाता है। इस बदलाव के कारण लिवर सख्त हो जाता है और उसका सामान्य कामकाज प्रभावित होने लगता है। सिरोसिस के मुख्य कारण लंबे समय तक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस B और C इंफेक्शन, फैटी लिवर डिजीज और लंबे समय तक लिवर पर दबाव डालने वाली दवाओं का सेवन करना शामिल है।
NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक, लिवर सिरोसिस होने पर कई सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।
ध्यान रखें कि सिरोसिस एक ऐसी स्थिति है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार अंतिम स्टेज में लिवर फेलियर तक पहुंच सकती है।
लिवर कैंसर, जिसे मेडिकल भाषा में हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (HCC) कहा जाता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और एक घातक ट्यूमर बना देती हैं। लिवर कैंसर होने के मुख्य कारण पुराना सिरोसिस, हेपेटाइटिस B या C का संक्रमण, अत्यधिक शराब का सेवन, फैटी लिवर और मोटापा इत्यादि हो सकता है।
कैंसर की शुरुआत होने पर इसके शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देनाा चाहिए, जिसपर ध्यान रखने की जरूरत होती है, जैसे-
नहीं, ये दोनों ही स्थितियां अलग-अलग हैं। सिरोसिस की स्थिति में लिवर का धीरे-धीरे खराब होता है। वहीं, लिवर कैंसर की स्थिति में कैंसर कोशिकाओं का बनना शुरू हो जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दोनों के बीच बहुत गहरा संबंध है। लंबे समय तक सिरोसिस रहने से लिवर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
जब लिवर लगातार डैमेज होता है, तो शरीर उसे रिपेयर करने की कोशिश करता है। इस लगातार रिपेयर प्रोसेस के दौरान कोशिकाओं में जेनेटिक बदलाव (DNA mutation) हो सकते हैं। यही बदलाव आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं। इसलिए सिरोसिस को लिवर कैंसर के लिए एक हाई रिस्क कंडीशन माना जाता है।
Disclaimer : सिरोसिस और लिवर कैंसर एक जैसी बीमारी नहीं हैं, लेकिन दोनों आपस में जुड़े हुए हैं। सिरोसिस लिवर की धीरे-धीरे खराब होती स्थिति है, जबकि लिवर कैंसर एक जानलेवा कैंसर है। समय पर जांच, सही जीवनशैली और जागरूकता से इन दोनों बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।