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घर में बच्चों के जन्म के बाद माता-पिता के साथ-साथ पूरा परिवार ही उसकी देखभाल में लगा रहता है। छोटे बच्चे बड़ों की तुलना में अधिक कोमल होते हैं। जिस कारण उनका ख्याल भी अधिक रखना होता है। ऐसे में यदि बच्चे को हल्का बुखार भी हो जाए, तो पूरे परिवार के हाथ पैर फूल जाते हैं। कई बार ऐसा होता है की बच्चों का सिर छूने पर गर्म लगता है। लेकिन वहीं जब थर्मामीटर से उसके तापमान को मापा जाता है, तो वह नॉर्मल होता है। जो मां-बाप की चिंता को और अधिक बढ़ा देता है। इस स्थिति में साधारण लोग यह नहीं समझ पाते कि ऐसा आखिर क्यों हो रहा है, और इसके पीछे क्या कारण है। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं कि बुखार न होने पर भी बच्चों का सिर का तापमान अधिक क्यों हो सकता है। आइए जानते हैं इसके 5 मुख्य कारण..
यदि आपका बच्चा बहुत देर तक पीठ के बल लेटा रहता है। तो इससे भी सिर का तापमान बाकी शरीर के अपेक्षा ज्यादा हो सकता है। यदि बच्चा घंटों तक पीठ के बल लेटा है, तो उसका सिर बाकी शरीर के अपेक्षा अधिक गर्म होने की संभावना हो सकती है।
बहुत अधिक रोना भी सिर के गर्म होने का कारण हो सकता है। बहुत अधिक रोने से बच्चों के शरीर में ऐसे रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जो उसके सिर के तापमान को बढ़ा देते हैं। आपको बता दें कि रोने से बच्चा तनावपूर्ण स्थिति का अनुभव करता है, जिसके कारण उसके मस्तिष्क का तापमान बढ़ जाता है।
बच्चों के दांत निकलना एक ऐसा समय होता है जब उनके सिर का तापमान बाकी शरीर की अपेक्षा अधिक बना रहता है। इसके अलावा जो बच्चे रेंग कर चलते हैं, उन्हें शारीरिक गतिविधियों के दौरान बाकी शरीर की अपेक्षा सिर का तापमान अधिक होता है।
वहीं बच्चों के सिर के गर्म होने के पीछे कुछ बायोकेमिकल चेंज भी जिम्मेदार होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब शरीर में बायोकेमिकल बदलाव होते हैं, तो इससे हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है हालांकि यह बायोकेमिकल बदलाव किसी तनावपूर्ण स्थिति में ही बनते हैं।
आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस बॉडी हीट का लॉस बड़े लोग शरीर से करते हैं उसी बॉडी हीट का लॉस बच्चे अपने सिर से करते हैं। ऐसे में शरीर की सारी गर्मी सिर से बाहर निकलती है, जिसके कारण बच्चे के सिर का तापमान ज्यादा बना रहता है। हालांकि ये एक प्रोसेस कुछ समय के बाद खुद ही बदल जाती है।