
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 9, 2021 1:44 AM IST
Myths about Oral Health : मज़बूत दांत और स्वस्थ मसूड़े हेल्दी बॉडी और ओवरऑल हेल्थ को प्रभावित करता है। दांतों की सही देखभाल और सही तरीके से उनकी सफाई जैसी आदतें बच्चों को बचपन से ही सिखायी जाती हैं, ताकि उनके दांत हमेशा चमकते रहें और ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी कम हों। फरवरी माह को चिल्ड्रेन्स डेंटल हेल्थ मंथ(Children's Dental Health Month)के तौर पर मनाया जाता है। ताकि, बच्चों को दांतों की सेहत से जुड़े सभी पहलुओं के बारे में अवगत कराया जा सके।
वहीं, बड़ों को भी डेंटल हेल्थ से जुड़ी सही जानकारी बहुत कम ही है। कमर्शियल उत्पादों की भीड़, जानकारी का अभाव और लाइफस्टाइल से जुड़ी ग़लतियों के चलते वयस्कों को भी अपने दांतों की देखभाल ठीक तरीके से करना मुश्किल हो जाता है। इसी तरह दांतों की देखरेख से जुड़े कई मिथक भी हमारे आसपास प्रचलित हैं। लेकिन क्या आप मिथकों का सच जानना चाहते हैं? यहां पढ़ें कुछ ऐसे ही मिथकों और उनके पीछे की सच्चाई के बारे में जो लोगों को मिथक ( Myths about Oral Health) कम और सच ज़्यादा लगते हैं।
यह एक आम मिथक है जिसपर लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं। क्योंकि, अक्सर ब्रश करते समय लोगों को दांतों या मसूड़ों में हल्की-फुल्की चोट लग जाती है और नतीजतन खून निकलने लगता है। लेकिन, यह समस्या छोटी नहीं है।दरअसल, मसूड़ों में सूजन की वजह से उनसे खून बहने लगता है। यह एक ओरल हेल्थ प्रॉब्लम है जिसका इलाज कराना चाहिए। यह मसू़ड़ों से जुड़ी बीमारियों जैसे बैक्टेरियल इंफेक्शन, प्लाक या जिंजिवाइटिस का एक संकेत हो सकता है। अगर इससे जुड़ी लापरवाही की जाती है तो आगे चलकर क्रोनिक ब्लीडिंग, मसूड़ों का कमज़ोर होना और दांतों के टूटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, फ्लॉसिंग की प्रक्रिया आपकी दैनिक ओरल केयर रूटीन का हिस्सा होना चाहिए। आंकड़ों के अनुसार टूठ फिलिंग कराने वाले 50 फीसदी लोगों के दांतों में ऐसी जगहों पर तकलीफ होती है जहां, ब्रश पहुंच नहीं पाता। आमतौर पर दांतों के बीच का हिस्सा ही वह स्थान होते हैं जहां इस तरह की दिक्कत आती है। ब्रश करने के बाद फ्लॉस का इस्तेमाल करने से दांतों के बीच के स्थानों में जमा गंदगी और भोजन के कणों को साफ कर देता है। जिससे दांतों और मसूड़ों में सड़न की समस्या कम होती है।
इसी तरह बहुत से लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब दांतों में तेज़ दर्द होता है। लेकिन, यह समझना ज़रूरी है कि शरीर की तरह ही दांतों की सेहत बी महत्वपूर्ण है। इसीलिए, दांतों या मसूड़ों से जुड़ी छोटी-मोटी समस्याओं पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। हर 6 महीने बाद ओरल चेकअप कराना चाहिए। इसी तरह किसी भी समस्या का पता चलने पर डेंटिस्ट से सम्पर्क करें। इस बात को समझें कि आप डेंटिस्ट से जितनी दूरी बनाएंगे या जितने दिनों तक लापरवाही बरतेंगे आपके दांतों की समस्या उतनी ही गम्भीर होती जाएगी।
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