OCD से ग्रस्त बच्चे कोरोना के कारण हो रहे हैं डिप्रेशन और एंग्जाइटी के शिकार, रिसर्च में आया सामने
ओसीडी एक मानसिक बीमारी है जिसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति कई ऐसी चीजों को बार बार करता है जिसे वह करतो नहीं चाहता लेकिन करने के लिए मजबूर हो जाता है। बीएमसी मनोचिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि कई ऐसे बच्चे और युवा जो पहले से ओसीडी से ग्रस्त हैं उन्होंने महसूस किया है कोरोना वायरस के चलते उनकी स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ गई है।
ओसीडी एक मानसिक बीमारी है जिसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति कई ऐसी चीजों को बार बार करता है जिसे वह करतो नहीं चाहता लेकिन करने के लिए मजबूर हो जाता है। बीएमसी मनोचिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन से पता चला है कि कई ऐसे बच्चे और युवा जो पहले से ओसीडी से ग्रस्त हैं उन्होंने महसूस किया है कोरोना वायरस के चलते उनकी स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ गई है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 युवाओं में मानसिक विकारों को विकसित कर रही है। यानि कि इस कोरोना काल में बच्चे और युवा दोनों ही तेजी से मानसिक रोगों की चपेट में आ रहे हैं।
रिसर्च में OCD की समस्या से शामिल लोगों का कहना है कि उन्होंने इस दिनों अपनी हालत बिगड़ते हुए महसूस किया है। इस ग्रुप में शामिल 73 प्रतिशत लोगों का कहना है कि कोरोना काल में उनकी हालत काफी बिगड़ी है और उन्होंने एंग्जाइटी और डिप्रेशन का अनुभव किया है। जबकि 43 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ डिप्रेशन महसूस हुआ है।
ओसीडी के लक्षण
1. जब आप कोई काम को सही तरह से करने के बावजूद उसे बार बार चेक करें तो यह भी इस डिसऑर्डरका का एक संकेत हो सकता है। जैसे कि बार-बार देखना कि गेट का दरवाजा बंद है या नहीं, गैस का बटन चेक करना, छत पर जाकर देखना कि कोई बैठा तो नहीं है या मोटर का बटन चेकर करना आदि। ओसीडी से पीड़ित लोगों में 3-4 घंटों के बाद पुन: चेक करना एक आम व्यवहार बन जाता है।
2. ओसीडी वाले लोग कुछ संख्यात्मक पैटर्न के अनुसार गतिविधियां करते हैं और वे ज्यादातर समय इसका पालन करते हैं। उदाहरण के लिए, सीढ़ियों की गिनती करते समय या किसी विशेष समय पर एक निश्चित गतिविधि करते समय। ये व्यवहार ज्यादातर अंधविश्वास आधारित हैं। उन्हें डर है कि अगर वे उस कार्य को नहीं करेंगे, तो कुछ बुरा हो सकता है। अगर आपको अपने अंदर इस तरह की आदत तो समझ लें कि ये ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (OCD) है।
3. हाथ धोना और सफाई करना एक अच्छी आदत है। इससे वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण के खतरे को कम करता है। लेकिन ओवरक्लीनिंग ओसीडी का संकेत हो सकता है। अगर आपको दिन में कई बार हाथ धोने या सैनिटाइज़र को रगड़ने की आदत हो गई है तो समझ लें कि आप ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (OCD) की चपेट में आ रहे हैं। बैक्टीरिया को हटाने की आड़ में ये आदम आपको OCD का शिकार बना रही है। Also Read - 11 से 21 साल के युवा ज्यादा होते हैं इस बीमारी के शिकार, जानें लक्षण और बचाव
4. ओसीडी से पीड़ित कुछ लोग अपनी चीजों को एक फिक्स तरह से रखना पसंद करते हैं। जैसे कि उन्हें अपना फोन लेफ्ट साइड, तो वॉटर बोतल राइट साइड रखना पसंद हो सकता है। और वे फिर इन चीजों को हमेशा इसी तरह से रखते हैं। अगर ऐसा न हो तो उन्हें बेचेनी होने लगती है। इन चीजों को लेकर उन्हें अपने आस-पास किसी भी तरह का बदलाव पसंद नहीं होता है।
5. ओसीडी से पीड़ित अधिकांश लोग हर चीज में पूर्णता चाहते हैं। वे अपने लुक्स या किसी खास बॉडी पार्ट को लेकर सबसे ज्यादा सचेत रहते हैं। ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर से जूझ रहे लोग जिस चीज में परफेक्ट होते हैं उसमें फिर वह कम होना नहीं चाहते।