छोटी उम्र में ही बच्चे हो रहे हैं हाइपरटेंशन के शिकार, जानिए क्या है इसके कारण

पिछले कुछ समय से बच्चों में हाइपरटेंशन की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप समय पर बच्चों में नजर आने वाले चेंज और हेल्थ इश्यूज पर पूरा ध्यान दें।

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Written By: Atul Modi | Updated : May 10, 2024 2:48 PM IST

एक समय था जब हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन 50 पार की उम्र में लोगों को होता था। धीरे-धीरे ये युवाओं को प्रभावित करने लगा और अब इसने बच्चों को भी अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ समय से बच्चों में हाइपरटेंशन (Bachcho Me Hypertension) की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप समय पर बच्चों में नजर आने वाले चेंज और हेल्थ इश्यूज पर पूरा ध्यान दें। क्योंकि कम उम्र में ब्लड प्रेशर की परेशानी होने से कई अन्य समस्याएं भी होने लगती हैं। इसलिए बच्चों में हाइपरटेंशन के कारण (Hypertension Causes in Children), लक्षण और जटिलताओं की जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए।

बच्चों में हाइपरटेंशन के कारण

आमतौर पर बच्चों में हाइपरटेंशन के दो कारण होते हैं। पहला, प्राइमरी हाइपरटेंशन और दूसरा सेकेंडरी हाइपरटेंशन। टीनएजर और यंग लोगों में प्राइमरी हाइपरटेंशन ज्यादा कॉमन है। यह अक्सर आपकी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल का नतीजा होता है। कई बार फैमिली हिस्ट्री के कारण भी यह आपको प्रभावित कर सकता है। इसी के साथ अनहेल्दी फूड, मोटापा, डायबिटीज और नमक के ज्यादा सेवन से भी प्राइमरी हाइपरटेंशन होता है। वहीं सेकेंडरी हाइपरटेंशन बच्चों में कम पाया जाता है। यह आमतौर पर किडनी प्रॉब्लम, हाइपरथायरायडिज्म, हार्मोनल इंबैलेंस, हार्ट प्रॉब्लम, बहुत ज्यादा टेंशन और दवाओं के कारण होता है।

समय पर लक्षण पहचानना जरूरी

हाइपरटेंशन कई मायनों में बेहद खतरनाक है। इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते हैं और धीरे-धीरे इसकी समस्या विकट होती जाती है। अगर बच्चों में लगातार कुछ लक्षण नजर आएं तो वो हाइपरटेंशन के लक्षण हो सकते हैं, जैसे- उल्टी या मतली, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, धड़कनें तेज चलना, दिखने में परेशानी होना आदि बच्चों में हाइपरटेंशन के लक्षण हो सकते हैं।

खतरनाक हो सकता है हाइपरटेंशन

हाइपरटेंशन बड़ों के साथ ही बच्चों के लिए भी बेहद खतरनाक स्थिति है। इसे साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि यह कई परेशानियां आपके लिए खड़ी कर सकता है। समय पर इसपर ध्यान नहीं देना गंभीर हो सकता है। अगर बचपन में ही बच्चों की हाइपरटेंशन की समस्या हल न की जाए तो बड़े होने पर भी उन्हें हाई बीपी की परेशानी रहने की आशंका है। हाइपरटेंशन का सीधा असर हार्ट पर पड़ता है। ऐसे में बच्चे कम उम्र में ही हार्ट पेशेंट बन सकते हैं। दिल की धड़कन रुकना और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी के साथ किडनी प्रॉब्लम भी हो सकती है।

जानें क्या है हाइपरटेंशन का इलाज

हाइपरटेंशन का सबसे आसान और सटीक इलाज है हेल्दी लाइफस्टाइल और नियमित दवाएं। हेल्दी डाइट से हाइपरटेंशन को कंट्रोल किया जा सकता है। अपनी डेली डाइट में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। नमक और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम करें। साथ ही रेगुलर एक्सरसाइज जरूर करें। वीक में कम से कम 150 मिनट वॉकिंग, एरोबिक, स्विमिंग और साइकिलिंग आदि करें। ज्यादा वजन के कारण भी हाइपरटेंशन होता है, इसलिए अपना वेट कंट्रोल में रखें। स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें। हर रात कम से कम 8 से 9 घंटे की अच्छी, गहरी नींद लें।

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