Childhood Cancer Day: 14 साल से छोटे बच्‍चों में बहुत आम है ये कैंसर, बुखार और कमजोरी हैं इसके शुरुआती लक्षण

बच्चे कैंसर का शिकार न हो, या बच्चों में कैंसर के लक्षणों का पता समय पर चल सके इसलिए 15 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय बचपन कैंसर दिवस (Childhood Cancer Day) मनाया जाता है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : February 15, 2021 12:09 PM IST

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी उम्र के व्‍यक्ति को हो सकती है। इसलिए इसके बारे में जरूरी जानकारी होना बहुत आवश्‍यक है, ताकि इसके लक्षणों की पहचान कर समय पर इलाज किया जा सके। बच्‍चे कैंसर का शिकार न हो, या बच्‍चों में कैंसर के लक्षणों का समय पर पता चल सके इसलिए 15 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय बचपन कैंसर दिवस (International Childhood Cancer Day) मनाया जाता है। लेकिन अफसोस की बात ये है कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी बच्‍चों में भी तेजी से फैल रही है। भारत में दुनिया के 25% से अधिक बच्चे कैंसर से पीड़ित हैं। कैंसर का इलाज भले ही वर्तमान में काफी हद तक संभव हो गया है, लेकिन ऐसा तभी मुमकिन है जब इसके बारे में शुरुआत में ही पता चल जाए। यानि कि अगर कैंसर का शुरुआती स्‍टेज में पता चल जाता है तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। आज इस लेख में हम जानेंगे कि बच्‍चों को होने वाले आम कैंसर कौन से हैं और इनका इलाज कैसे संभव है।

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (खून का कैंसर) क्या है?

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, जिसे खून का कैंसर या बोन मैरो भी कहते हैं, यह बच्‍चों में होने वाला एक आम कैंसर है। डॉक्‍टर कहते हैं कि ये 0-14 साल के बच्‍चों में होने वाला सबसे सामान्य प्रकार का कैंसर है। रिसर्च बताती हैं कि ये कैंसर 2 से 5 साल की उम्र के बच्‍चों में होता है। लेकिन यह किशोरों और व्‍यस्‍कों को भी हो सकता है। हालांकि डॉक्‍टर यह भी कहते हैं कि यदि इसका समय पर पता चल जाए और इलाज शुरु हो जाए तो डरने की बात नहीं होती है। बच्‍चों को ल्‍यूकेमिया से जान का जोखिम बहुत कम होता है। डॉक्टरों यह भी कहते हैं कि जिन बच्चों में ल्यूकेमिया की संभावना अधिक होती है, उन्हें शरीर में किसी भी तरह की गड़बड़ी दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।

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बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया के लक्षण (What are the symptoms of leukemia in children)

  • भूख की कमी
  • जरूरत से ज्‍यादा नींद आना
  • लंबे समय बुखार रहना और साथ में कमजोरी होना
  • रक्तस्राव होना
  • जोड़ों या हड्डी में दर्द होना
  • वजन का तेजी से कम होना
  • स्‍वभाव में चिड़चिड़ापन आना
  • बार-बार संक्रमण होना
  • साँस की तकलीफ होना

बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया होने के क्‍या कारण हैं? (What are the Causes of leukemia in children?)

  • ब्‍लूम सिंड्रोम
  • डाउन सिंड्रोम
  • फ़ैंकोनी एनीमिया
  • पारिवारिक हिस्‍ट्री
  • इम्‍युन सिस्‍टम को कमजोर या खराब होना

भारत में बच्‍चों के कैंसर पर आंकड़े

भारत में बच्‍चों को कैंसर होना कोई चौंकने वाली बात नहीं है। हर साल दुनिया में जितने भी बच्‍चों को कैंसर होता है उसमें से करीब 25 प्रतिशत मामले भारत से होते हैं। इससे आप अंदाजा लगा ही सकते हैं भारत में बच्‍चों में कैंसर कितना आम है। वहीं अगर देश में कैंसर का इलाज करने वाले सेंटरों की बात करें तो वो 200 के करीब हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 30 प्रतिशत कैंसर पीड़ित बच्‍चों का ही इलाज हो पाता है। बच्‍चों में कैंसर के बढ़ते मामलों को देख बाल कैंसर को राष्ट्रीय नीति में शामिल करने की मांग की जा रही है। भारत में बच्‍चों के बीच व्‍यस्‍कों की तुलना में कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कैंसर के बारे में जागरुकता की कमी, पता लगाने के लिए उपकरण, दवा और उपचार के विकास की कमी भी जिम्‍मेदार हैं। इसके साथ कई बार तो लोग बच्‍चों में लक्षणों के दिखने पर इसलिए भी समय पर जांच नहीं करा पाते हैं ताकि उन पर आर्थिक बोझ न बढ़ जाए। एक रिसर्च में कहा गया था कि क्‍योंकि भारत एक गरीब देश है। ऐसे में यदि यहां किसी परिवार में बच्‍चे को कैंसर होता है तो घरवालों को उसका इलाज कराने के लिए अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ सकती है।

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4 प्रकार का होता है ल्‍यू‍केमिया कैंसर (How Many Types of Leukemia?)

ब्‍लड कैंसर वो स्थिति होती है जब शरीर में रेड ब्‍लड सेल्‍स की तुलना में व्‍हाइट ब्‍लड सेल्‍स की संख्‍या बढ़ जाती है। बहुत कम लोग लाते हैं कि ल्‍यूकेमिया कैंसर 4 प्रकार का होता है। आज हम इसके चारों प्रकारों के बारे में जानेंगे।

एक्यूट ल्यूकेमिया (Acute Leukemia): एक्यूट ल्यूकेमिया वो स्थिति होती है जब खून और मैरो में सेल्‍स तेजी से बढ़कर इकट्ठा हो जाती हैं। ये काफी तेज़ी से बोन मैरो में इकट्ठा हो जाते हैं और काम सही तरह से काम नहीं कर पाते हैं।

क्रोनिक ल्यूकेमिया (Chronic Leukemia): इस स्थिति में शरीर में पहले से मौजूद सेल्‍स तो अपना काम ठीक तरह से करते हैं लेकिन कुछ नए सेल्‍स बन जाते हैं जो अविकसित होते हैं। क्रोनिक ल्यूकेमिया भी समय के साथ बढ़ता रहता है और अगर इलाज न कराया जाए तो यह स्थिति को बहुत गंभीर कर देता है ।

लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (Acute Lymphocytic Leukemia): यह वह स्थिति होती है जब बोन मैरो के सैल्स व्हाइट ब्लड सैल्स में बदलना शुरु हो जाते हैं ।

मायलोजनस ल्यूकेमिया (Myelogenous Leukemia): मौरो सैल्स द्वारा रेड ब्लड सैल्स और व्हाइट ब्लेड सैल्स के अलावा जब प्लेटेट्स का निर्माण होता है, उसे मायलोजनस ल्यूकेमिया कहते हैं।

कैसे होता है ल्यूकेमिया का इलाज? (what is the treatment for leukemia)

एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (खून का कैंसर) का इलाज आमतौर पर कीमोथेरेपी के द्वारा किया जाता है। इसमें बच्‍चे को मुंह या इंजेक्‍शन के द्वारा एंटीकैंसर ड्रग्‍स दी जाती है। इसके अलावा डॉक्‍टर मरीज की स्थिति देखकर भी इलाज करते हैं। कुछ मामलों में मरीज को रेडिएशन थेरेपी भी दी जाती है। इस थेरेपी में ऐसे कैमिकल्‍स होते हैं जो कैंसर को मारते हैं या ट्यूमर को सिकुड़ देते हैं। इसके अलावा सर्जरी भी इलाज का एक भाग हो सकता है, लेकिन ये बहुत कम केसेज में यूज होता है। अगर किसी बच्‍चे को कीमोथेरेपी दी जा रही है तो ये मान के चलिए कि इलाज को पूरा होने में 2 से 3 साल तक का समय लग सकता है। इन सालों में आपको भर्ती नहीं होना पड़ेगा, बल्कि जब आपकी कीमोथेरेपी होगी या डॉक्‍टर को लगेगा कि उन्‍हें आपसे मिलने की जरूरत है, मरीज को केवल तब अस्‍पताल जाना पड़ता है। इलाज के दौरान कभी-कभी बच्‍चों को स्कूल छोड़ना पड़ सकता है। लेकिन इलाज केंद्र, स्कूल, माता-पिता, और छात्र एक साथ काम कर सकते हैं।

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