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Osteosarcoma in Children in Hindi: आज ''चाइल्डहुड कैंसर डे'' यानी ''अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस 2021'' (Childhood Cancer Day 2021 in Hindi) है। भारत में आज भी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता और जानकारी की कमी है। अब कैंसर सिर्फ बड़ों में ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी आम होता जा रहा है। डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में कैंसर (Cancer in kids) के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। कोई भी कैंसर (Cancer) तब होता है, जब शरीर में नॉर्मल कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। बच्चों में कई तरह के कैंसर होते हैं जैसे ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, न्यूरोब्लास्टोमा, सार्कोमा, बोन कैंसर, ब्रेन कैंसर, किडनी और लिवर में होने वाला कैंसर। हड्डी से संबंधित कैंसर भी बच्चों (Bone cancer in kids) में अब कॉमन हो रहा है। हड्डियों के कैंसर के कई प्रकार (type of bone cancer in children) हैं। उन्हीं में से एक है ऑस्टियोसर्कोमा (Osteosarcoma in hindi) कैंसर। बच्चों में कैंसर होने का मुख्य कारण है खराब जीवनशैली, अनहेल्दी खानपान, अनुवांशिक, खराब व प्रदूषित वातावरण आदि। यदि आपके बच्चे को बार-बार हड्डियों में दर्द होता है, हड्डियां फ्रैक्चर हो जाती हैं, तो इसे गंभीरता से लें। हो सकता है, वह ऑस्टियोसर्कोमा से ग्रस्त (child bone cancer) हो। जानते हैं, बच्चों में होने वाले हड्डियों के कैंसर ऑस्टियोसर्कोमा के कारण, लक्षण, इलाज (Osteosarcoma causes, symptoms, treatment in hindi) के बारे में यहां....
बच्चों में हड्डियों में होने वाला कैंसर ऑस्टियोसर्कोमा (osteosarcoma in hindi) है, जो बहुत रेयर कैंसर है। लेकिन यह टीन्स और बच्चों में हड्डियों में होने वाले कैंसर का बहुत कॉमन प्रकार है। हांलाकि, बच्चों में बोन कैंसर शरीर के किसी भी हड्डी में हो सकता है। चाइल्डहुड ऑस्टियोसर्कोमा (Childhood osteosarcoma) उस जगह पर होता है, जहां हड्डियों का विकास तेजी से होता है जैसे पैरों और बाजुओं की लंबी हड्डियों के छोर। इसके अलावा थाई बोन (Femur), शाइन बोन (Tibia) और बाजुओं की ऊपरी हड्डी (Humerus)।
रेयर जेनेटिक कैंसर सिंड्रोम, रेडिएशन या कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट करवाने वाले बच्चों में ऑस्टियोसर्कोमा (Osteosarcoma in Children in Hindi) के होने का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा, 10 से 30 वर्ष के लोगों में, लंबी हाइट, लड़कों और कुछ खास हड्डियों से संबंधित बीमारी से ग्रस्त बच्चों में इसके होने का खतरा अधिर रहता है।
सर्जरी से ब्लीडिंग या इंफेक्शन हो सकता है। बालों का गिरना, मुंह में छाले, उल्टी, डायरिया, इंफेक्शन होना, ब्लीडिंग, कीमोथेरेपी के कारण हर समय थकान महसूस करना, त्वचा में खुजली, ऑर्गन डैमेज, हार्ट और फेफड़े से संबंधित समस्याएं, लर्निंग प्रॉब्लम, कैंसर का वापस आ जाना, शारीरिक विकास में समस्याएं आना आदि जोखिम देखे जा सकते हैं।
बच्चों में होने वाले हड्डी से संबंधित ऑस्टियोसर्कोमा कैंसर (Osteosarcoma in Children in Hindi) का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, क्लिनिकल ट्रायल्स आदि के जरिए किया जाता है।
एक्सरे, ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन, एमआरआई, बोन स्कैन, ट्यूमर का बयोप्सी आदि के जरिए डॉक्टर बच्चों में होने वाले इस रेयर कैंसर का निदान करता है। इसके लिए डॉक्टर आपके बच्चे की हेल्थ हिस्ट्री और लक्षणों के बारे में कुछ सवाल कर सकता है।
बच्चों की लाइफस्टाइल पर ध्यान दें। उनके खानपान की आदतों को सही करें। ध्यान दें कि आपका टीन एजर बच्चा कहीं सिगरेट, एल्कोहल आदि का सेवन तो नहीं करने लगा है। ये सभी आदतें कम उम्र में बच्चों के शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाती हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। अपने बच्चे को पौष्टिक और खनिज तत्वों से भरपूर डाइट दें। उनकी साफ-सफाई क्या ध्यान रखें। फ्रोजेन फूड्स, जंक फूड्स का सेवन महीने में एक बार करना ठीक है। ब्रोकली, मशरूम, लहसुन, गाजर कुछ ऐसी चीजें हैं, जो कैंसर के जोखिम को कम करते हैं।