
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : April 16, 2026 5:17 PM IST
Very-Long-Chain Acyl-CoA Dehydrogenase Deficiency
Real Story : वेदांत (बदला हुआ नाम) को एक सामान्य श्वसन संक्रमण से जुड़ी समस्या हुई। शुरू में वेदांत की समस्या काफी कॉमन दिख रही थी, लेकिन अचानक से उसकी स्थिति खराब हो गई। उन्हें RSV ब्रोंकियोलाइटिस (एक वायरल फेफड़ों का संक्रमण) हो गया, जिसने उनके शरीर को बुरी तरह प्रभावित किया। वेदांग की स्थिति को देखकर डॉक्टर को समझ नहीं आया कि आखिर सामान्य सी परेशानी, अचानक से इतनी गंभीर कैसे हुई? इसके बाद वेदांत की कुछ जांच हुई जिसमें पता चला कि उन्हें वेरी लॉन्ग-चेन फैटी एसिड (Very-Long-Chain Acyl-CoA Dehydrogenase Deficiency (VLCADD) नामक एक दुर्लभ बीमारी है। आइए वेदांत की पूरी कहानी जानते हैं-
वेरी लॉन्ग-चेन फैटी एसिड (Very-Long-Chain Acyl-CoA Dehydrogenase Deficiency-VLCADD) नामक एक दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी से जूझ रहे मरीज का शरीर तनाव या बीमारी के समय सही तरीके से ऊर्जा नहीं बना पाता। ऐसे में सामान्य सी बीमारी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
इंफेक्शन से ग्रसित होने के बाद वेदांत को सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगी। इसके साथ ही उसका ब्लड शुगर बहुत तेजी से गिर गया, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलनी बंद हो गई। कुछ ही समय में उसका दिल भी सही से काम करना बंद करने लगा।
वेदांत की स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो गई कि उसे कार्डियक अरेस्ट (दिल का अचानक बंद हो जाना) हो गया। यह उनके परिवार के लिए बेहद डरावना पल था, क्योंकि उनकी जान को बड़ा खतरा था।
स्थिति गंभीर होने पर वेदांत को तुरंत Narayana Health SRCC Children’s Hospital, मुंबई में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। इस केस में सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक मेडिसिन डॉ. भारत परमार, क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. संकेत सोंटाक्के ने संभाला।
वेदांत की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर्स की टीम ने तुरंत इमरजेंसी रेसुसिटेशनशुरू की। उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट दिया। इसके साथ ही शरीर के मेटाबॉलिक असंतुलन को ठीक किया। डॉ. संकेत सोंटक्के बताते दें कि VLCADD वाले बच्चों में शरीर बीमारी के समय ऊर्जा नहीं बना पाता, इसलिए उनके लिए एक सामान्य वायरस भी जानलेवा बन सकता है।
डॉ. संकेत सोंटक्के का कहना है कि अगले कुछ दिन वेदांत के लिए बहुत कठिन थे। वेदांत ICU में वेंटिलेटर पर था, दिल को सपोर्ट देने के लिए दवाएं दी जा रही थीं। लगातार मॉनिटरिंग हो रही थी।
उनकी हालत कभी बेहतर होती, तो कभी बिगड़ जाती। लेकिन लगातार इलाज से धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार देखने को मिला। उनका दिल मजबूत होने लगा, सांस लेने में सुधार हुआ और शरीर का मेटाबॉलिज्म भी कंट्रोल में होने लगा।
वेदांत का हॉस्पिटल में लंबे समय तक इलाज चला और उसके बाद उसे छुट्टी मिली गई, लेकिन उसे कुछ समय तक BiPAP मशीन (सांस लेने में मदद करने वाला इंस्ट्रूमेंट) की जरूरत रही। लगातार देखभाल और फॉलो-अप के बाद उनकी हालत और बेहतर हुई और कुछ दिनों बाद BiPAP सपोर्ट भी हट गया।
आज वेदांत पूरी तरह से ठीक हो गया है और वो काफी एक्टिव भी है। वो एक सामान्य जीवन भी जी रहा है। ध्यान रखें कि दुर्लभ बीमारियों में छोटी बीमारी भी गंभीर बन सकती है। समय पर सही इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखभाल से जान बचाई जा सकती है।