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Symptoms of Autism in Children: ऐसे बहुत ही कम पेरेंट्स होंगे जो अपने बच्चों की फोन की लत से परेशान ना हों। क्योंकि आजकल बच्चे ज्यादातर समय फोन पर कार्टून वीडियो या शॉर्ट वीडियोज देख कर निकाल रहे हैं। यहां तक कि अगर पेरेंट्स बच्चों से जबरदस्ती फोन छीन लेते हैं, तो बच्चों को गुस्सा आता है और वे चिल्लाने व रोने लगते हैं। इस स्थिति में आपको गुस्सा हो बहुत आता है कि लगा दें 2-4 लेकिन यह स्थिति गुस्सा दिखाने की बिल्कुल नहीं है, क्योंकि हर माता-पिता के मन में इस दौरान सवाल उठना चाहिए कि क्या यह सिर्फ जिद है या किसी गंभीर समस्या का संकेत, जैसे कि ऑटिज्म। तो आइए विस्तार से समझते हैं, क्या है ऑटिज्म? क्या हैं इसके लक्षण और कैसे यह बच्चों के इस तरह के व्यवहार से जुड़ा है।
ऑटिज्म का पूरा नाम ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder) जो एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है। इस स्थिति में अगर कोई बच्चा होता है तो इसका उस बच्चे के दिमाग के विकास पर असर पड़ता है और प्रभाव बच्चे के व्यवहार, संवाद करने की क्षमता और सामाजिक संबंधों पर दिखने लगता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक स्थिति है, जो जन्म से या शुरुआती बचपन के दौरान दिखाई देती है।
(और पढ़ें - ऑटिज्म के प्रकार)
बच्चे का चिल्लाना, गुस्सा करना या फिर रोना ही ऑटिज्म का संकेत नहीं है, बल्कि इसके लक्षण हर बच्चे में अलग-अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं। बल्कि आमतौर पर ऑटिज्म से ग्रस्त हर बच्चों में इसके लक्षण अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर इसमें आंखें मिलाकर बात न करना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, बोलने में देरी या बहुत कम बोलना, बार-बार एक ही हरकत को दोहराते जाना, अचानक गुस्सा करना या चिड़चिड़ापन व्यवहार करना, दिनचर्या में हुआ कोई भी बदलाव सहन न करना और मोबाइल या किसी एक चीज के प्रति अत्यधिक लगाव दिखाना आदि शामिल है। यह सभी संकेत आपको सामान्य लग सकते हैं, लेकिन ऑटिज्म से जुड़े हो सकते हैं।
(और पढ़ें - कैसे पता लगेगा मेरे बच्चे को ऑटिज्म है)
जब बच्चा लगातार मोबाइल चलाता रहता है तो उस इसकी लत लग जाती है और उसका दिमाग लगातार तेज उत्तेजनाओं का आदी हो जाता है। ऐसे में जैसे ही आप उनसे मोबाइल लेने या छीनने प्रयास करते हैं तो उसे असहजता होती है, जिससे उसे गुस्सा आता है या वह चिड़चिड़ापन महसूस करने लगता है। ऑटिज्म से जुड़े बच्चों में यह प्रतिक्रिया और भी तीव्र होती है, क्योंकि वे बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते, जल्दी गुस्सा हो जाते हैं और अनियंत्रित हो जाते हैं।
सुधार लाने से पहले आपको समझना होगा कि हर चिड़चिड़ापन व्यवहार ऑटिज्म नहीं हो सकता, लेकिन समय पर ध्यान देना और सही कदम उठाना जरूरी है। इसलिए बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है कि आप उनमें सुधार लाने का प्रयास करें। आप बच्चे का स्क्रीन टाइम सीमित करने के लिए कुछ नियम बनाएं और उसे पालन करने को कहें। मोबाइल की जगह खेल, कहानी और बातचीत को बढ़ावा दें, एक निश्चित दिनचर्या बनाएं और उसका पालन करवाएं, बच्चे से प्यार और धैर्य के साथ बात करें। लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें, तो बाल रोग विशेषज्ञ या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से से जांच करवाएं। स्पीच थेरेपी और बिहेवियर थेरेपी इस स्थिति में बच्चे के लिए मददगार साबित हो सकती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।