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Chikungunya Explainer: मानसून में चिकनगुनिया के मामले क्यों बढ़ते हैं? जानें लक्षण, कारण और इलाज

मानसून में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसमें चिकनगुनिया भी शामिल है। इस मौसम में चिकनगुनिया का प्रकोप तेज रहता है। जानें, इस बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से-

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Written By: Anju Rawat | Updated : June 26, 2026 9:53 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Raman Kumar

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया...तीनों ऐसी बीमारियां हैं, जो मच्छरों के काटने से फैलती हैं। आज चिकनगुनिया के बारे में विस्तार से जानेंगे...

Chikungunya: चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है, जो चिकनगुनिया वायरस (CHIKV) की वजह से होती है। यह वायरस संक्रमित एडीज मच्छरों के काटने से इंसानों में फैलता है। आमतौर पर चिकनगुनिया के लक्षण डेंगू और जीका वायरस से मिलते-जुलते होते हैं, यही वजह है कि कई बार चिकनगुनिया की पहचान में देरी हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठनके अनुसार, फिलहाल चिकनगुनिया की 2 वैक्सीन को कुछ देशों में नियामक मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, ये वैक्सीन अभी दुनियाभर में अधिक मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। आपको बता दें कि चिकनगुनिया के मामले मानसून में तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन ऐसा क्यों? आइए, आज इस लेख में चिकनगुनिया के लक्षण, इलाज और जोखिक कारक, तक सबकुछ जानते हैं-

मानसून में चिकनगुनिया के मामलों में तेजी देखने को मिलती है। Indian Journal of Microbiology Research के अनुसार, मानसून में जब बारिश होती है तो जगह-जगह पानी जमा हो जाता है, इससे एडीज मच्छर तेजी से पनपने लगते हैं। गर्म और नम मौसम में मच्छरों के जीवित रहने और तेजी से बढ़ने की संभावना रहती है। यही वजह है कि मानसून और इसके बाद के महीनों में में वायरस तेजी से फैलता है।

chikungunya (AI generated) chikungunya (AI generated)

चिकनगुनिया कैसे फैलता है?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, चिकनगुनिया वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता है। दरअसल, बीमारी के पहले जब किसी व्यक्ति को चिकनगुनिया हो जाता है, तो पहले सप्ताह के दौरान उसके खून में वायरस की मात्रा काफी ज्यादा होती है। अगर इस दौरान कोई मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काट लेता है, तो वायरस मच्छर तक पहुंच जाता है और फिर यही मच्छर दूसरे लोगों को संक्रमण फैला सकता है। यह चक्र चलता रहता है और यही वजह है कि चिकनगुनिया के मामलों में तेजी देखने को मिलती है।

आपको बता दें कि चिकनगुनिया वायरस मुख्य रूप से संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों के काटने से फैलता है। आमतौर पर ये मच्छर दिन के समय काटते हैं। ये मच्छर साफ रुके हुए पानी वाले बर्तनों और कंटेनरों में अंडे देते हैं। हालांकि, चिकनगुनिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क से नहीं फैलता है।

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चिकनगुनिया के लक्षण क्या हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को संक्रमित मच्छर काटता है, तो उसमें 4 से 8 दिन के बाद चिकनगुनिया के लक्षण दिखने शुरू हो सकते हैं। अचानक तेज बुखार आना और जोड़ों में तेज दर्द महसूस होना, चिकनगुनिया का सबसे आम लक्षण माना जाता है। चिकनगुनिया की वजह से शरीर में दर्द इतना तेज हो सकता है कि यह व्यक्ति की दिनचर्या को भी प्रभावित कर सकता है। WHO के अनुसार, यह दर्द कुछ दिन, हफ्तों या महीनों तक रह सकता है। चिकनगुनिया होने पर कई अन्य लक्षणों का अनुभव भी हो सकता है। जैसे-

  • जोड़ों में सूजन दिखाई देना
  • मांसपेशियों में दर्द महसूस होना
  • हर वक्त सिरदर्द की समस्या रहना
  • जी मिचलाने और उल्टी जैसा महसूस होना
  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • त्वचा पर चकत्ते नजर आना

हैरानी की बात यह है कि कई मामलों में इन लक्षणों डेंगू और जीका वायरस का समझ लिया जाता है, यही वजह है कि चिकनगुनिया की सही से पहचान नहीं हो पाती है। अगर मरीज में हल्के लक्षण महसूस हो तो संक्रमण का पता तक नहीं चल पाता है। चिकनगुनिया के ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में चिकनगुनिया की वजह से आंखों, हृदय और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर देता है, इन स्थितियों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मामलों में तो चिकनगुनिया मौत का कारण भी बनता है।

क्या चिकनगुनिया दोबारा हो सकता है?

कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या एक बार चिकनगुनिया से ठीक होने के बाद, यह दोबारा हो सकता है? अभी तक मौजूद वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, एक बार चिकनगुनिया से ठीक होने के बाद व्यक्ति के शरीर में इस संक्रमण से लड़ने की प्रतिरक्षा यानी इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। इससे दोबारा संक्रमण होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

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चिकनगुनिया का पहला केस कहां और कब आया?

WHO के अनुसार,  पहली बार चिकनगुनिया वायरस की पहचान 1952 में तंजानिया में हुई थी। इसके बाद, यह वायरस अफ्रीका और एशिया के कई अन्य देशों में भी पाया गया। अगर शहरी क्षेत्रों की बात करें, तो चिकनगुनिया का पहला प्रकोप 1967 में थाईलैंड और 1970 के दशक में भारत में दर्ज किया गया था। आपको बता दें कि साल 2004 के बाद चिकनगुनिया के मामलों में ज्यादा तेजी देखने को मिली। इसका सबसे मुख्य कारण था- एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों का तेजी से फैलना।

चिकनगुनिया का ज्यादा खतरा किसे रहता है?

अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि वैसे तो चिकनगुनिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन, कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। इनमें शामिल हैं-

  • नवजात शिशु
  • बुजुर्ग
  • पहले से गंभीर बीमार लोग

चिकनगुनिया की जांच कैसे की जाती है?

डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि चिकनगुनिया की जांच के लिए डॉक्टर RT-PCR टेस्ट करवा सकते हैं। इस टेस्ट की रिपोर्ट की मदद से वायरस का पता लगाया जा सकता है। इस टेस्ट को बीमारी के पहले सप्ताह में कराया जाता है। अगर बीमारी को एक सप्ताह से ज्यादा हो जाता है, तो इस स्थिति में शरीर में बनने वाली एंटबॉडी की जांच से वायरस की पुष्टि की जाती है।

चिकनगुनिया का इलाज कैसे किया जाता है?

WHO बताता है कि वर्तमान में चिकनगुनिया का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। चिकनगुनिया के मरीजों को, लक्षणों के आधार पर दवा दी जाती है। आमतौर पर बुखार और दर्द कम कम करने वाली दवाइयों का उपयोग किया जाता है। इसके अधिकतर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। लेकिन, गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है। छोटे बच्चों, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। चिकनगुनिया के इलाज के लिए दर्द निवारक दवाइयां दी जाती हैं। साथ ही, मरीज को पर्याप्त पानी और हेल्दी डाइट लेने की सलाह दी जाती है।

चिकनगुनिया से बचाव कैसे करें?

डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि चिकनगुनिया से बचने के लिए आपको मच्छरों से बचना बहुत जरूरी है। अगर आप मच्छरों के काटने से बच गए, तो चिकनगुनिया से भी बच जाएंगे। इन बचाव टिप्स को भी अपनाएं-

  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
  • पानी के बर्तनों को हर सप्ताह खाली करके साफ करें।
  • पूरे शरीर को ढककर रखें और फुल स्लीव्स के कपड़े पहनें।
  • खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं।
  • सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए अपनी डाइट में प्रोटीन, विटामिन सी और जिंक शामिल करें।

Disclaimer: मानसून में चिकनगुनिया के मामलों में ज्यादा तेजी देखने को मिलती है। इस मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, जो बीमारी का कारण बनते हैं। चिकनगुनिया संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए मच्छरों से बचाव के लिए फुल स्लीव्स के कपड़े पहनना सबसे सही है। अगर आपको तेज बुखार, शरीर में दर्द, थकान या जी मिचलाने जैसे लक्षण महसूस हो तो इनकी अनदेखी न करें और तुरंत जांच कराएं। समय पर जांच और निदान से चिकनगुनिया को आसानी से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में चिकनगुनिया जानलेवा भी हो सकता है। खासकर, बच्चों और बुजुर्गों को इस बीमारी से बचाना जरूरी है।