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Written By: Yogita Yadav | Published : February 22, 2019 1:45 PM IST
यह थेरेपी कैंसर के मरीजों के लिए किसी दोस्त से कम नहीं है। इसलिए जरूरी है कि इसके साइड इफैक्ट को भुलाकर कीमोथेरेपी के बारे में जाना जाए। ©Shutterstock.
कीमोथेरेपी को लेकर अकसर लोग बहुत घबराए हुए होते हैं। वे इसके साइड इफैक्ट के कारण थेरेपी होने से पहले ही अपना मन हारने लगते हैं। जबकि यह थेरेपी कैंसर के मरीजों के लिए किसी दोस्त से कम नहीं है। इसलिए जरूरी है कि इसके साइड इफैक्ट को भुलाकर कीमोथेरेपी के बारे में जाना जाए।
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क्या है कीमोथेरेपी
कीमोथेरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है जो कैंसर के मरीजो को दी जाती है। कीमोथेरेपी शरीर में तेजी से बढ़ती कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए बनाई गई एक आक्रामक रासायनिक दवा चिकित्सा का रूप है। जो कैंसर की कोशिकाओ को तेजी से बढ़ने से रोकती है। यह कैंसर की कोशिकाओ की क्षमता को कम कर देती है सामान्यत: कीमोथेरेपी में उपयोग की जाने वाली सभी प्रकार की ड्रग्स कैंसर की कोशिकाओ को ख़त्म करने का काम करती है। इसे हमारे शरीर के उस भाग में दिया जाता है, जहां कैंसर कोशिकाएं या कैंसर की गांठ (Tumour) होती है एक डॉक्टर जो कैंसर के इलाज में माहिर है उन्हें ऑन्कोलॉजिस्ट (oncologist) के रूप में जाना जाता है।
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किस स्तर की दी जानी है कीमो
कीमोथेरेपी का उपयोग अक्सर अन्य उपचारों जैसे कि सर्जरी, विकिरण, या हार्मोन थेरेपी के साथ किया जाता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर का चरण और प्रकार कौन सा है, आपका समग्र स्वास्थ्य कैसा है,आपके पिछले कैंसर के उपचार, कैंसर कोशिकाओं का स्थान क्या है, आपकी व्यक्तिगत उपचार प्राथमिकताएं। इसे एक प्रणालीगत उपचार माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। कीमोथेरेपी के दौरान गंभीर दुष्प्रभाव शरीर पर हो सकते हैं। पर इसके लिए काउंसलर प्रक्रिया से पहले ही मरीज को मानसिक रूप से तैयार करते हैं।
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क्यों जरूरी है कीमोथेरेपी
यदि आपने कैंसर के ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी करवाई है, जैसे स्तन कैंसर के लिए लम्पेक्टोमी, तो आपका ऑन्कोलॉजिस्ट यह सुझाव दे सकता है कि आप कीमोथेरेपी कराएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी प्रकार की बची हुई कैंसर की कोशिकाओं को भी मार दिया जाए। कीमोथेरेपी का उपयोग अन्य उपचारों के लिए भी किया जाता है। इसका उपयोग ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए किया जा सकता है ताकि इसे शल्य चिकित्सा द्वारा हटाया जा सके। अंतिम चरण के कैंसर के मामले में, कीमोथेरेपी दर्द को दूर करने में मदद कर सकती है।
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कैंसर के उपचार के अलावा, प्रतिरक्षा प्रणाली विकारों के लिए अस्थि मज्जा रोग (bone marrow diseases) वाले लोगों को इलाज के लिए तैयार करने के लिए कीमोथेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। इसमें खुराक उन लोगों की तुलना में बहुत कम होती है जिनका उपयोग कैंसर का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग उन विकारों को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है, जैसे कि ल्यूपस या रुमेटीइड गठिया।
कीमोथेरेपी कैसे की जाती है
कीमोथेरेपी आमतौर पर गोली के रूप में या सीधे इंजेक्शन या एक IV द्वारा नसों में दी जाती है। इन दो रूपों के अलावा, कीमोथेरेपी को कई अन्य तरीकों से भी उपयोग किया जा सकता है। कीमोथेरेपी देने की सबसे आम विधियाँ है जो इस प्रकार है।
ओरल कीमोथेरेपी
ओरल कीमोथेरेपी एक ऐसी थेरेपी है। जिसमें आपको टेबलेट्स, पिल्स (pills) लिक्विड (liquid), और कैप्सूल को मुहँ के द्वारा निगलना होता है। कुछ प्रकार की कीमोथेरेपी को गोलियों के माध्यम से मुंह से लिया जा सकता है। जिसका अवशोषण (absorption) पेट और जीभ से होता है यह हमारे शरीर में बहुत जल्दी असर करती है। कीमोथेरेपी की टेबलेट्स बहुत प्रभावशाली होती है। जिसे एक साथ लेने से मरीज को उल्टी (vomiting) की समस्या भी हो सकती है। कुछ दवाए आप ओरल (मुहँ) से नहीं ले सकते है। यह आपके उदर (पेट) को नुकसान पहुचा सकती है। क्योंकि कीमोथेरेपी की कुछ दवाओ का अवशोषण हमारा शरीर नहीं कर पाता है।
इन्जेक्टेड कीमोथेरेपी
इन्जेक्टेड कीमोथेरेपी एक ऐसी थेरेपी है जिसमे कीमोथेरेपी की दवाए इंजेक्शन के माध्यम से मरीज के शरीर में डाली जाती है।
इंट्राप्लूरल कीमोथेरेपी
इंट्राप्लूरल कीमोथेरेपी में आप रोगी के प्लूरल गुहा फेफड़े (lungs) में दे सकते है। सामान्य तौर पर यह फेफड़ो के कैंसर में दिया जाता है। अगर आपके फेफड़ो में कैंसर फ्लूइड (पानी) भर जाता है जिससे मरीज को साँस लेने में तकलीफ होती है। तब इंट्राप्लूरल कीमोथेरेपी दी जाती है। इसे स्क्लेरोसिस (sclerosis) और प्लुरोडेसिस (pleurodesis) भी कहा जाता है।
इसमें कीमोथेरेपी फेफड़ो में एक टूयुब (inhaler) के सहारे दी जाती है। जिसके द्वारा फेफड़ो में भरा पानी बाहर निकाला जाता है। जिससे मरीज को साँस लेने में तकलीफ न हो। फेफड़ो (lung) के कैंसर में इंट्राप्लूरल कीमोथेरेपी थोड़े समय के लिए दी जाती है।
टोपिकल कीमोथेरेपी
कुछ त्वचा के कैंसर का इलाज कीमोथेरेपी क्रीम से किया जा सकता है। टोपिकल कीमोथेरेपी कुछ क्रीम में उपलब्ध होती है जिसे सीधे कैंसर मरीज की त्वचा में लगाया जाता है अगर मरीज को स्किन (त्वचा) का कैंसर है। तो इसके लिए टोपिकल कीमोथेरेपी दी जाती है इसे कम मात्रा में ही मरीज के त्वचा में लगाया जाता है। जिससे कैंसर की कोशिकाओ का अवशोषण हो जाये टोपिकल कीमोथेरेपी से स्किन (त्वचा) कैंसर की कोशिकाओ को पूरी तरह से मार देते है और इनके दोबारा होने की सम्भावना भी कम हो जाती है। इसे टोपिकल कीमोथेरेपी कहते है।