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बदल रही है त्वचा की रंगत, कहीं आप इस बीमारी से पीड़ित तो नहीं ?

त्वचा का उजला होते जाना हो सकता है अल्बिनिज्म का लक्षण।

विश्‍व भर में अल्बिनिज्‍म (Albinism) से पीडि़त लोगों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद इसके बारे में बहुत कम लोग जागरूक हैं। अल्बिनिज्‍म के बारे में लोगों को जागरूक करने के मकसद से 13 जून को 'इंटरनेशनल अल्बिनिज्‍म अवेयरनेस डे' मनाया जाता है।  यदि किसी का रंग असामान्‍य रूप से गोरा एवं बालों का रंग पीला अथवा भूरा है तो यह अल्बिनिज्‍म के लक्षण हो सकते हैं। जिससे आंखों की रोशनी तो प्रभावित होती ही हैं, पर्याप्‍त जागरूकता न हो तो त्‍वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है । ऐसे लोगों को तेज धूप में निकलने एवं आउटडोर एक्टिविटीज से परहेज करना चाहिए।

क्‍या है अल्बिनिज्‍म ?

अल्बिनिज्म एक जेनेटिक बीमारी है जिसके कारण त्वचा असामान्‍य रूप से गोरी, बालों का रंग भूरा या पीला एवं आंखों की रोशनी कम हो जाती है। अल्बिनिज्‍म पर जागरूकता उत्‍पन्‍न करने के लिए 13 जून को विश्‍व भर में इंटरनेशनल अवेयरनेस डे फोर अल्बिनिज्‍म मनाया जाता है। भारत में भी अल्बिनिज्‍म का प्रभाव देखने में आता है। विभिन्‍न हेल्‍थ सर्वे में संयुक्त राज्य अमेरिका में 18,000 से 20,000 लोगों में से किसी एक को अल्बिनिज्म की समस्‍या देखने में आती है। भारत में भी कम नहीं हैं अल्बिनिज्‍म के मरीज ।

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 लक्षण

  •  बालों, त्वचा या आंखों में रंग की अनुपस्थिति।
  • बालों, त्वचा  या आंखों का रंग सामान्य की तुलना में हल्का होना।
  • त्वचा पर हल्‍के रंग के धब्‍बे नजर आना।
  • अल्बिनिज्म के कारण स्ट्रैबिस्मस,  फोटोफोबिया, निस्‍टेगमस (nystagmus), अंधापन होना।

 उपचार

अल्बिनिज्‍म के उपचार का सबसे सटीक तरीका है, इसे उत्‍पन्‍न वाले जीन्‍स की पहचान।यह जेनेटिक टेस्‍ट के माध्‍यम से किया जा सकता है।

बचाव

अल्बिनिज्‍म के लिए अभी तक कोई इलाज संभव नहीं हो सका है। हालांकि, विभिन्‍न तरीकों से इसके लक्षणों की रोकथाम की जा सकती है। अल्बिनिज्‍म से पीडि़त लोगों के लिए सूर्य की किरणें मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि धूप में निकलने से पहले ही आंखों में बेहतर क्‍वालिटी का चश्‍मा लगाएं तथा त्‍वचा के खुले हिस्‍सों को कपड़े से ढक कर रखें। जिससे सूर्य की पराबैंगनी किरणों से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। आंख के अनियंत्रित झपकने को भी आंख की मांसपेशियों की सर्जरी के द्वारा ठीक किया जा सकता है। सामान्‍य अल्बिनिज्‍म का उम्र पर कोई प्रभाव नहीं होता। जबकि हर्मांस्की-पुडलक सिंड्रोम, चेडियाक-हिगाशी सिंड्रोम, और ग्रीस्ली सिंड्रोम का असर व्‍यक्ति की उम्र पर पड़ता है। अल्बिनिज्‍म प्रभावित लोगों को आउटडोर एक्‍टीविटीज से बचना चाहिए। सूर्य से निकलने वाली यूवी किरणें अल्बिनिज्म वाले लोगों में त्वचा कैंसर और अंधेपन की समस्‍या उत्‍पन्‍न कर सकती है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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