Pneumonia in Children: सर्दियों में बढ़ जाती है बच्चों में निमोनिया होने की संभावना, एक्सपर्ट से जानिए बच्चों में निमोनिया का पता लगाने के तरीके
हर साल 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस (World Pneumonia Day 2021) मनाया जाता है ताकि लोगों को निमोनिया के प्रति जागरूक किया जा सके। निमोनिया दिवस के मौके पर आज हमने बच्चों में होने वाले निमोनिया के बारे में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर धनेश अग्रहरी से बात की।
निमोनिया (Pneumonia) फेफड़ों में होने वाला एक इंफेक्शन है जो काफी गंभीर या हल्का हो सकता है, निमोनिया आमतौर पर नवजात शिशुओं (5 वर्ष से कम) में अधिक पाया जाता है। बच्चों में निमोनिया होने की मुख्य वजह बैक्टीरिया या वायरस हो सकते हैं। बच्चों को निमोनिया पहले से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आने से हो सकता है।
सर्दियों में बढ़ जाती है निमोनिया होने की संभावना
फिनिक्स अस्पताल, प्रयागराज के पीडियाट्रिक सर्जन डॉक्टर धनेश अग्रहरी कहते हैं कि, बच्चों में निमोनिया आमतौर पर सर्दियों के महीने में होता है क्योंकि इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस ज्यादा सरवाइव करते हैं, और बच्चे भी घर में ही रहते हैं ऐसे में जब उनका किसी संक्रमित व्यक्ति से कांटेक्ट बढ़ता है तो उन्हें निमोनिया होने की संभावना बढ़ जाती है।
चार से छह हफ्तों तक रह सकता है निमोनिया
डॉक्टर अग्रहरी कहते हैं कि, वायरस के अपेक्षा बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया ज्यादा गंभीर होते हैं। सामान्यतया यह है चार से छह हफ्तों तक रहते हैं जबकि वायरस के कारण होने वाले निमोनिया चार-पांच दिन में ठीक हो जाते हैं।
आपको कैसे पता चलेगा कि आपके बच्चे को निमोनिया है?
डॉक्टर धनेश अग्रहरी कहते हैं कि, निमोनिया में कॉमन सेंटर तो यही होता है कि जैसे बच्चे को बुखार हो रहा है, बच्चा चिड़चिड़ा हो रहा है, खांसी आ रही है और हल्की-फुल्की सांसें फूल रही है, वहीं अगर किसी बच्चे में निमोनिया गंभीर हो जाता है तो उसकी सांसे बढ़ जाती हैं, छाती में दर्द होता है और बुखार का तापमान भी बहुत ज्यादा हो जाता है।
निमोनिया से बचाव कैसे करें?
डॉक्टर धनेश अग्रहरी के मुताबिक, आमतौर पर निमोनिया खांसने से फैलता है। जैसे कोई संक्रमित व्यक्ति हंसता है तो सतह पर उस की बूंदे गिरती हैं जिसके कारण वायरस या बैक्टीरिया का प्रसार होता है। इसके लिए जरूरी है कि संक्रमण व्यक्ति मास्क का प्रयोग करें, यहां तक कि अगर सामान्य वायरल इंफेक्शन है तो भी मास्क का प्रयोग और लोगों से दूरी बना कर रखना चाहिए, खासकर बच्चों के संपर्क में ऐसे लोगों को नहीं आना चाहिए। माता-पिता को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने नवजात शिशुओं को किसी संक्रमित व्यक्ति के हाथों में या गोद में ना दें।