
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : June 9, 2026 8:51 AM IST
Medically Verified By: Dr. Sanjay Gupta
Dengue Vaccine (Image Credit: chatgpt)
भारत में डेंगू हर साल बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनकर सामने आता है। बरसात के मौसम में इसके मामले तेजी से बढ़ जाते हैं और कई बार अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर साल गर्मी और बरसात के मौसम के मौसम में लाखों की संख्या में लोग डेंगू की चपेट में आते हैं और इस बीमारी से सैकड़ों लोगों को मौत हो जाती है। डेंगू मच्छर से फैलने वाली यह बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को प्रभावित करती है। ऐसे में डेंगू से बचाव के लिए वैक्सीन को एक बड़ी उम्मीद माना जा रहा है। हाल के वर्षों में जापानी कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन “Qdenga” को लेकर दुनिया भर में चर्चा बढ़ी है। कई देशों में इसे मंजूरी मिल चुकी है और इसे डेंगू रोकथाम की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि भारत में इस वैक्सीन को बड़े स्तर पर लागू करना आसान नहीं है। भारत जैसे देश में डेंगू की Qdenga वैक्सीन को लगाने को लेकर कई प्रकार की चुनौतियां हैं। आज हम आपको इसी विषय पर जानकारी देने वाले हैं।
Qdenga एक टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन है, यानी यह डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप्स (DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4) से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है। इसे दो डोज में लगाया जाता है और कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पाया गया है कि यह गंभीर डेंगू और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम कर सकती है। डेंगू की सबसे बड़ी समस्या यह है कि व्यक्ति को एक बार डेंगू होने के बाद दूसरी बार संक्रमण अधिक खतरनाक हो सकता है। इसलिए ऐसी वैक्सीन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी जो व्यापक सुरक्षा दे सके।
नई दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के सीनियर डॉ. संजय गुप्ता का कहना है कि किसी भी वैक्सीन को भारत में बड़े स्तर पर इस्तेमाल से पहले ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों की मंजूरी जरूरी होती है। इसके लिए भारतीय आबादी पर पर्याप्त डेटा और ट्रायल की जरूरत पड़ती है। फिलहाल Qdenga को यूरोप और कुछ अन्य देशों में मंजूरी मिली है, लेकिन भारत की आबादी, जलवायु और संक्रमण पैटर्न अलग हैं। इसलिए यहां इसकी प्रभावशीलता को जांचना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
डेंगू वायरस के चार प्रकार होते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन का असर सभी सीरोटाइप पर समान रूप से होना जरूरी है। अगर किसी सीरोटाइप पर सुरक्षा कमजोर रही, तो संक्रमण का खतरा बना रह सकता है। डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग सीरोटाइप एक्टिव रहते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कौन सा सीरोटाइप इस वैक्सीन पर उपयुक्त बैठेगा।
भारत जैसे विशाल देश में किसी नई वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती होती है। यदि Qdenga की कीमत ज्यादा रहती है, तो यह केवल निजी अस्पतालों तक सीमित हो सकती है। जबकि डेंगू की वैक्सीन को सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग और सप्लाई चेन की जरूरत होगी। गरीब और ग्रामीण आबादी तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा।
भारत में आज भी कई लोग डेंगू को गंभीर बीमारी नहीं मानते। वहीं वैक्सीन को लेकर भी भ्रम और डर बना रहता है। डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि भारत में पहले लोग दूसरों द्वारा कही सुनी बातों पर विश्वास करते थे। पर अब उसकी जगह सोशल मीडिया ने ली है। सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक जानकारी लोगों को डेंगू की वैक्सीन लेने से रोक सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने सही जानकारी पहुंचाने और लोगों का भरोसा जीतने की चुनौती होगी।
डेंगू वैक्सीन को लेकर पहले भी कई देशों में बहस हुई है कि यह उन लोगों में कैसे काम करती है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है या नहीं हुआ है। कुछ वैक्सीनों के साथ यह चिंता सामने आई थी कि कुछ मामलों में दूसरी बार संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं नहीं। सिर्फ वैक्सीन के भरोसे डेंगू को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। मच्छरों की रोकथाम, साफ-सफाई, जलभराव रोकना और समय पर इलाज ही डेंगू को रोकने का एकमात्र उपाय है।
Disclaimer: Qdenga वैक्सीन डेंगू के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। लेकिन भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में इसे लागू करना आसान नहीं होगा।