
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : May 2, 2026 9:14 AM IST
Medically Verified By: Dr. Arvind Mehra
Image credits by: सर्वाइकल पेन
Garmiyo Mai Cervical Pain Se Kaise Nipte: गर्मियों में तापमान बढ़ने से चक्कर या आंखों के आगे अंधेरा सा छा जाता है। कई लोगों की गर्दन में तो दर्द भी बढ़ने लगता है, साथ ही चक्कर आने या सिर घूमने जैसा महसूस होने लगता है। हालांकि ये लक्षण अक्सर सर्वाइकल स्पाइन की अंदरूनी समस्याओं से जुड़े होते हैं, लेकिन गर्मियों में इस तरह के दर्द में बढ़ोतरी ज्यादा ही हो जाती है।
सर्वाइकल का दर्द आम तौर पर सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस जैसी बीमारियों से जुड़ा होता है। यह गर्मियों में मांसपेशियों में थकान और अकड़न की वजह से बढ़ जाता है। ज्यादा तापमान से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे मांसपेशियों के काम और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है। इस वजह से कभी-कभी चक्कर आने या असंतुलन जैसा महसूस होता है। आइए पारस हेल्थ गुरुग्राम के ऑर्थोपेडिक्स डॉक्टर अरविंद मेहरा से जानते हैं कि ऐसा होने पर क्या करें?
इस तरह के दर्द के गर्मियों में बढ़ने का एक बड़ा कारण गर्मी के महीनों में रोजाना की आदतों में बदलाव होना है। गर्मी से बचने के लिए लोग ज्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं। इससे स्क्रीन टाइम अक्सर बढ़ जाता है। लैपटॉप और मोबाइल फोन का लंबे समय तक इस्तेमाल अक्सर गलत मुद्रा में होता है जिससे गर्दन की मसल्स और सर्वाइकल स्पाइन पर ज्यादा दबाव डालता है। इस वजह से दर्द और बढ़ जाता है।
कई मामलों में यह समस्या खराब एर्गोनॉमिक्स और चलने-फिरने में कमी की वजह से होती है। बिना पीठ और गर्दन को सही सपोर्ट दिए एयर-कंडीशन्ड माहौल में लंबे समय तक बैठने से मांसपेशियों में अकड़न हो सकती है। इस वजह से सर्वाइकल स्पाइन में दर्द होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्दन पर सीधी ठंडी हवा लगने से यह हालत और गंभीर हो सकती है।
सर्वाइकल की समस्या से होने वाला चक्कर, जिसे सर्वाइकोजेनिक चक्कर कहते हैं, तब होता है जब गर्दन की मांसपेशियां सख्त या खिंची हुई होती हैं और संतुलन बिगड़ता है। लेकिन हर चक्कर सर्वाइकल की वजह से नहीं होता। गर्मियों में डिहाइड्रेशन, ज्यादा गर्मी लगना और ब्लड प्रेशर में बदलाव से भी ऐसा चक्कर आ सकता है।
चेतावनी के संकेतों को पहचानना जरूरी है। लगातार चक्कर आना, गर्दन में तेज दर्द, हाथों में सुन्नपन, या संतुलन बनाए रखने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इसके लिए समय पर मेडिकल जांच जरूर करवाना चाहिए।
गर्मियों में सर्वाइकल दर्द और चक्कर आने से बचने के लिए लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव की ज़रूरत नहीं है। साधारण और नियमित आदतें भी बड़ा फर्क ला सकती हैं-
अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहें- पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से मांशपेशियों का कामकाज बना रहता है और थकान कम होती है।
सही मुद्रा में रहें- स्क्रीन को आंखों के लेवल पर रखें और काम करते समय पीठ और गर्दन को पूरा सपोर्ट दें।
बार-बार ब्रेक लें- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचें। हर 30 से 40 मिनट में अपनी गर्दन और कंधों को स्ट्रेच करें।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें- लचकता बढ़ाने के लिए हल्की एक्सरसाइज, योग या गर्दन को मजबूत करने वाले रूटीन शामिल करें।
AC के सीधे संपर्क में कम आएं- लंबे समय तक गर्दन पर सीधी ठंडी हवा लगने से बचें।
लक्षणों पर जल्दी ध्यान देना बहुत जरूरी है। हल्की तकलीफ को नजरअंदाज करने से धीरे-धीरे क्रोनिक दर्द और बार-बार चक्कर आ सकते हैं। मुद्रा, हाइड्रेशन और एक्टिविटी लेवल में छोटे-मोटे बदलाव सर्वाइकल स्पाइन का स्वास्थ्य बनाए रखने में बहुत मदद कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर- गर्मियों में सेहत से जुड़ी अपनी चुनौतियां होती हैं, इसलिए रीढ़ की हड्डी की देखभाल को तवज्जो देना जरूरी है। सही सावधानियों और जानकारी से सर्वाइकल दर्द और चक्कर आने को अच्छे से संभाला जा सकता है। इससे लोग पूरे गर्मी के मौसम में आराम से, सक्रिय और बिना किसी परेशानी के रह सकते हैं। अगर परेशानी अधिक होती है तो आप डॉक्टर से परामर्श लें।
गर्म पानी की सिकाई, हल्दी वाला दूध और गर्दन के लिए विशेष योगासन सर्वाइकल के लिए रामबाण इलाज साबित हो सकता है।
सर्वाइकल पेन (गर्दन दर्द) तब अधिक होता है जब गर्दन की मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है, जैसे लंबे समय तक स्क्रीन/फोन देखना, गलत मुद्रा (Posture) में बैठना, या अधिक भारी वजन उठाना।
जी हां, सर्वाइकल कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन शुरुआत में ही इसका इलाज शुरू करवाना जरूरी है।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस में सूजन और दर्द कम करने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी), कैल्शियम और मैग्नीशियम युक्त आहार लेना चाहिए। इसमें अदरक, हल्दी, हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), मेवे (अखरोट, बादाम), अलसी के बीज जैसी चीजों का सेवन करना चाहिए।
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