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Cervical Cancer Awareness Month: महिलाओं को क्यों होता है सर्वाइकल कैंसर, एक्सपर्ट से जानिए लक्षण और उपचार

सर्वाइकल कैंसर पूरी दुनिया के लिए आज ज्यादा चिंता का विषय इस लिए बना हुआ है कि इसके प्रति जागरुकता कम है, और खासकर महिलाएं इसकी गिरफ्त में आकर अपनी जान गंवा बैठती हैं। सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के मौके पर जानते हैं कि क्या है इस बीमारी के कारण, बचाव और उपचार।

Cervical Cancer Awareness Month: महिलाओं को क्यों होता है सर्वाइकल कैंसर, एक्सपर्ट से जानिए लक्षण और उपचार
It has improved life by preventing and increasing women's longevity – which goes a long way for a young family. Covid-19 vaccines are the best example of the latest vaccine-preventable disease.

Written by Atul Modi |Updated : January 31, 2023 7:01 AM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर के 6 लाख 4 हजार नए मामले सामने आए थे और 3 लाख 42 हजार रोगियों की मृत्यु हो गई थी। इस कैंसर का उपचार संभव है, लेकिन जानकारी के अभाव में यह काफी खतरनाक साबित होता रहा। वैज्ञानिकों ने माना कि एचपीवी वैक्सीनेशन से इस कैंसर पर काबू पाया जा सकता है। इसीलिए हर वर्ष जनवरी माह को दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह (Cervical Cancer Awareness Month) के रूप में मनाया जाता है। इसके तहत लोगों को सर्वाइकल कैंसर की पहचान, उपचार, सावधानी के साथ एचपीवी (ह्यूमन पैसिलोमा वायरस) वैक्सीन के बारे में भी जागरूक किया जाता है। इस वर्ष इसका थीम रखा गया है कुछ कुछ दशकों के भीतर ही सर्वाइकल कैंसर को खत्म करना।

सर्वाइकल कैंसर क्‍यों होता है?

डॉ. राहुल मनचंदा, सीनियर कंसल्टेंट और हेड गाइनी एंडोस्कोपी डिवीजन, पीएसआरआई हॉस्पिटल, नई दिल्ली ने कारण को विस्तार में बताते हुए कहा है कि, यह शरीर में एचपीवी के पनपने के कारण होता है, जो शरीर में असामान्य ऊतकों (टिश्यू) के विकास और कोशिकाओं में बदलाव का कारण बनता है। ऐसे वायरस से लंबे समय तक संक्रमित रहने के कारण सर्वाइकल कैंसर हो सकता है। यौन सक्रियता वाले लोगों में भी एचपीवी का संक्रमण हो सकता है। एचपीवी संक्रमण के लगभग आधे मामले एचपीवी टाइप कैंसर का कारण बन सकते हैं। खासकर एचपीवी 16 और एचपीवी 18 को सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। एचपीवी संक्रमण को काफी हद तक हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता नियंत्रित करती रहती है, लेकिन एचपीवी 16 और एचपीवी 18 जैसे संक्रमण के समय पर पकड़ में न आने से वे ग्रीवा कोशिकाओं (सर्वाइकल सेल्स) में बदलाव का कारण बनते हैं, जो बाद में कैंसर का कारण बन सकते हैं। इनके अलावा काफी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, धूम्रपान, कम उम्र में ही सेक्स संबंधों में सक्रियता आदि भी इसका कारण बन सकते हैं।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

डॉ. राहुल मनचंदा ने लक्षण क्या हैं इसके बारे में भी बताया की प्रारम्भ में सर्वाइकल कैंसर का खास लक्षण सामने नहीं आता। जब यह फैलने लगता है, तो इसके उभरने वाले लक्षणों में प्रारम्भ में मेनोपॉज और सेक्स के बाद योनि से रक्तस्राव होता है। पीरियड के दौरान भी सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है। योनिस्राव में संक्रमण के बाद उसमें तेज गंध आ सकती है और खून भी। सेक्स के दौरान पेल्विक दर्द भी हो सकता है।

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जब स्थिति गंभीर होने लगती है, यानी वायरस सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) से बाहर निकलकर शरीर के अन्य हिस्से में फैलने लगता है। ऐसे में मल त्याग के समय तेज दर्द हो सकता है या मलाशय से रक्तस्राव भी हो सकता है। पेशाब में भी रक्त आ सकता है।

ये लक्षण किसी और तकलीफ की वजह से भी उभर सकते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से पूरी जांच कराना जरूरी हो जाता है।

सर्वाइकल कैंसर का उपचार

उपचार के बारे में डॉ. अमृता राजदान कौल, सीनियर कंसल्टेंट- प्रसूति एवं स्त्री रोग, एशियन हॉस्पिटल फरीदाबाद बात करते हुए कहती है कि सबसे पहले इससे बचाव जरूरी है। इसके लिए विशेषज्ञ एचपीवी वैक्सीनेशन को सर्वाधिक जरूरी मानते हैं। एक अमेरिकी वैक्सीन गार्डासिल 9 को एचपीवी 16, 18, 31, 33, 45, 52 और 58 के लिए लगभग 100 प्रतिशत असरदार माना जाता है। भारत में भी एचपीवी वैक्सीन का निर्माण कर लिया गया है। सीरम इंस्टीट्यूट की सहायता से तैयार इस वैक्सीन को नाम दिया गया है सर्वावैक।

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विशेषज्ञ सेक्स क्रिया के दौरान कंडोम का इस्तेमान जरूरी बताते हैं। एचपीवी जांच नियमित रूप से कराते रहने से भी सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि हो जाने के बाद इसके उपचार पर पूरा ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमो थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनो थेरेपी आदि का डॉक्टर जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करते हैं।

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