Add The Health Site as a
Preferred Source
Add The Health Site as a Preferred Source

क्यों जरूरी है किशोरों के साथ सर्वाइकल कैंसर पर बात करना?

Dr. Ranajit Kar, कंसल्टेंट- रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, HCG Cancer Center - Cuttack के अनुसार, टीएनएज जीवन का वह चरण है, जब शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलाव तेजी से होते हैं। इसी समय व्यक्ति की आदतें, सोच और स्वास्थ्य से जुड़ा नजरिया विकसित होता है।

क्यों जरूरी है किशोरों के साथ सर्वाइकल कैंसर पर बात करना?
VerifiedVERIFIED By: Dr. Ranajit Kar

Written by Ashu Kumar Das |Updated : February 6, 2026 12:29 PM IST

सर्वाइकल कैंसर अचानक वयस्क अवस्था में नहीं होता। इसकी जड़ें अक्सर टीएनएज में ही पड़ जाती हैं, जब स्वास्थ्य शिक्षा सीमित होती है, जरूरी विषयों पर बात करना असहज माना जाता है और चुप्पी को सुरक्षा समझ लिया जाता है। भारत में आज भी किशोर स्वास्थ्य और प्रजनन शिक्षा को लेकर झिझक बनी हुई है। इसी कारण समय पर सही जानकारी न मिलने से भविष्य में कई महिलाएं गंभीर बीमारियों का सामना करती हैं, जिनमें सर्वाइकल कैंसर प्रमुख है।

Dr. Ranajit Kar, कंसल्टेंट- रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, HCG Cancer Center - Cuttack के अनुसार, टीएनएज जीवन का वह चरण है, जब शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलाव तेजी से होते हैं। इसी समय व्यक्ति की आदतें, सोच और स्वास्थ्य से जुड़ा नजरिया विकसित होता है।

क्यों जरूरी है टीएनएज में सर्वाइकल कैंसर की जानकारी

इस उम्र में सबसे ज्यादा शरीर में हार्मोनल बदलाव आते हैं, जो भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ती है। ये समय सबसे ज्यादा अनुकूल होता है किसी भी व्यक्ति के लिए सामाजिक पहचान बनाने का। इसी दौर में एक लड़की के शरीर के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार तय होते हैं। ऐसे में लड़कियों को इस दौर में सही मार्गदर्शन मिले, तो व्यक्ति जीवन भर स्वास्थ्य के लिहाज से सही फैसले लेता है।

Also Read

More News

सर्वाइकल कैंसर क्यों है गंभीर समस्या?

डॉ. रंजीता कौर कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर लेकिन रोके जा सकने वाला कैंसर है। यह गर्भाशय के निचले हिस्से में धीरे-धीरे विकसित होता है। सर्वाइकल कैंसर की सबसे खराब बात यह है कि ये महिलाओं के शरीर में धीरे-धीरे विकसित होता है। शुरुआती चरण में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण नजर नहीं आते हैं। देर से पता चलने के कारण ही महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का इलाज करना काफी कठिन हो जाता है। खासकर भारत जैसे देश में जहां पर सर्वाइकल कैंसर का पता ही आखिरी स्टेज में इसलिए चलता है, क्योंकि यहां कैंसर के प्रति जागरूकता की बहुत ही ज्यादा कमी है।

HPV और सर्वाइकल कैंसर के बीच कनेक्शन

डॉक्टर बताती हैं महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होने का मुख्य कारण है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)। एचपीवी  एक सामान्य वायरस है, जो त्वचा के संपर्क में आने से फैलता है। 10 में से 8 मामलों में एचपीवी बिना लक्षण के रहता है, लेकिन ये किसी महिला के शरीर में लंबे समय तक रहे तो कैंसर का कारण बन सकता है। अधिकांश HPV संक्रमण यौन जीवन की शुरुआत के शुरुआती वर्षों में होते हैं, लेकिन लोगों को इसका पता नहीं चलता है।

HPV and Cervical Cancer in men

सर्वाइकल कैंसर के प्रति भारत में जागरूकता की कमी क्यों है?

भारत में किए गए कई सर्वे और अध्ययनों से पता चलता है कि सर्वाइकल कैंसर के प्रति किशोरों में HPV की जानकारी बहुत कम है। 10 में 9 लोगों में सर्वाइकल कैंसर को लेकर गलत धारणाएं हैं। सरकार द्वारा किए जा रहे है प्रचार, डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन के बावजूद भारत में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन को लेकर भ्रम बन हुआ है। इतना ही नहीं, भारत में आज भी अक्सर प्रजनन स्वास्थ्य पर बातचीत शादी के बाद शुरू होती है, जबकि रोकथाम का सही समय टीएनएज होता है।

किशोर शिक्षा में मौजूद बड़ा अंतर (Education Gap)

भारत में स्वास्थ्य शिक्षा का मुख्य फोकस अब तक:

  • पोषण
  • स्वच्छता

संक्रामक रोग तक ही सीमित रहा है। प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी आज भी भारत में मौजूद नहीं है। इसका कारण ये है कि बच्चे अधूरी या गलत जानकारी पाते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चे प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हो जाते हैं। इससे जानकारी बढ़ाने की बजाय कम हो जाती है। बच्चों के दिमाग में भ्रम और डर बढ़ने लगता है। ऐसे में बच्चे सही फैसले नहीं ले पाते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

लड़के और लड़कियों में ज्ञान का अभाव

  1. लड़कियों के लिए- भारत में अधिकतर लड़कियों को केवल पीरियड्स को मैनेज करने की जानकारी दी जाती है। पेरेंट्स, स्कूल में लड़कियों को ये नहीं बताया जाता है कि HPV या कोई अन्य संक्रमण उनके शरीर में कैसे फैलता है। HPV वैक्सीन क्यों दी जाती है। शादी के बाद सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के पैप स्मीयर टेस्ट क्यों जरूरी हो जाता है।
  2. लड़कों के लिए- जहां तक तरफ लड़कियों को पीरियड्स तक की जानकारी दी जाती है। वहीं, लड़कों को पीरियड्स, सेक्स एजुकेशन जैसे विषयों से अक्सर दूर रखा जाता है। इससे लड़कों के दिमाग में पीरियड्स और प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर गलत धारणाएं पैदा होती हैं। ये जिम्मेदारी नहीं, बल्कि लड़कों के दिमाग में गलतफहमी को पैदा करती है।

डॉक्टर का कहना है कि भारत जैसे आधुनिक देश में लड़के और लड़कियों दोनों के दिमाग में एचपीवी से जुड़ी सभी जानकारी को भारना जरूरी है। जब देश के बच्चे जागरूक होंगे, तभी महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम होगा।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों से पहले शुरू होनी चाहिए रोकथाम

सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा रोके जा सकने वाले कैंसरों में से एक है। इसकी रोकथाम तीन स्तंभों पर आधारित है। इसमें शामिल हैः

  1. जागरूकता (Awareness)- HPV की जानकारी, नियमित जांच का महत्व, जोखिम के कारक
  2. टीकाकरण (Vaccination)- HPV वैक्सीन टीएनएज में सबसे प्रभावी होती है। ये वैक्सीन भविष्य के खतरे को काफी कम करती है।
  3. स्क्रीनिंग (Screening)- समय-समय पर जांच होने से सर्वाइकल कैंसर का पता जल्दी चल जाता है। इससे सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।

कई लोग मानते हैं कि टीका लगवाने के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शिक्षा जरूरी है ताकि किशोर समझ सकें कि एचपीवी संक्रमण कैसे फैलता है और इसकी जांच के साथ-साथ इससे सावधानी बरतने की जरूरत क्यों है? डॉक्टर बताते हैं कि जब तक लड़के और लड़कियों को इस बात की समझ नहीं होगी, तब तक सर्वाइकल कैंसरसे रोकथाम मुश्किल है।

सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता में इंटरनेट की भूमिका

आज मोबाइल और इंटरनेट हर किशोर तक पहुंच चुके हैं। सर्वाइकल कैंसर, एचपीवी और एचपीवी वैक्सीन से जुड़ी सही जानकारी अगर सरकारी वेबसाइट, हेल्थ ऐप, सोशल मीडिया अभियान और वीडियो प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को पहुंचे, तो इसके प्रति जागरूकता को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर केवल मेडिकल समस्या नहीं, बल्कि एक शैक्षणिक चुनौती भी है। इसलिए टीएनएज में ही इसका ज्ञान देना जरूरी है। इस उम्र में लड़के और लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर के प्रति ज्ञान विकसित हो जाए, तो आगे चलकर जांच और इलाज अपने आप बढ़ जाएगी।

भारत का भविष्य और किशोर स्वास्थ्य

भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को कितना स्वस्थ बनाते हैं।

स्वस्थ किशोर = स्वस्थ वयस्क = मजबूत राष्ट्र

डॉक्टर का कहना है कि आज शिक्षा में निवेश करने से भविष्य में इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा।

सर्वाइकल कैंसर से रोकथाम के लिए क्या है जरूरी?

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।

1. स्कूल स्तर पर

  •  स्वास्थ्य शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना
  • प्रशिक्षित शिक्षक
  • नियमित जागरूकता कार्यक्रम

2. परिवार स्तर पर

  • खुला संवाद
  • भरोसे का माहौल
  • सही मार्गदर्शन

3. स्वास्थ्य व्यवस्था

  • टीकाकरण अभियान
  • मुफ्त जांच
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं

4. सरकारी प्रयास

  • नीति निर्माण
  • डिजिटल जागरूकता
  • निगरानी प्रणाली

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या हैं?

मायो क्लीनिक पर छपी रिसर्च बताती है कि शुरुआती चरणों में सर्वाइकल कैंसर के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, यही कारण है कि इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। हालांकि, जैसे-जैसे यह बढ़ता है, शरीर निम्नलिखित संकेत देने लगता है:

  1. असामान्य रक्तस्राव (Abnormal Bleeding): पीरियड्स (Periods) के बीच में खून आना, संभोग के बाद ब्लीडिंग होना, या मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद अचानक खून आना सबसे बड़ा चेतावनी संकेत है।
  2. सफेद पानी या डिस्चार्ज: योनि से असामान्य तरल पदार्थ निकलना, जिसमें से तेज दुर्गंध आ रही हो या जिसमें खून के अंश हों।
  3. पेल्विक पेन (Pelvic Pain): पेडू या पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना जो पीरियड्स से किसी प्रकार कनेक्टेड नहीं हो।
  4. संबंधों के दौरान दर्द: शारीरिक संबंध बनाते समय अत्यधिक बेचैनी या दर्द महसूस होना।
  5. थकान और वजन कम होना: बिना किसी कारण के बहुत ज्यादा थकान महसूस होना और वजन का तेजी से गिरना।
  6. पैरों में सूजन: कैंसर के एडवांस स्टेज में जाने पर यह लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर सकता है, जिससे पैरों में सूजन आ सकती है।

सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण और जोखिम कारक

सर्वाइकल कैंसर का सबसे मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। यह एक सामान्य वायरस है जो त्वचा के संपर्क से फैलता है।

  1. HPV संक्रमण: लगभग 99% मामलों में यह वायरस ही जिम्मेदार होता है। हालांकि अधिकांश महिलाओं का इम्यून सिस्टम इसे खत्म कर देता है, लेकिन कुछ में यह वायरस शरीर में रहकर कैंसर का रूप ले लेता है।
  2. कम उम्र में विवाह या संबंध: बहुत कम उम्र में यौन सक्रिय होने से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा कई गुणा ज्यादा बढ़ जाता है।
  3. कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): HIV/AIDS या अन्य बीमारियों के कारण कमजोर इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ नहीं पाता है। जिन महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य से कमजोर होती है, उनमें सर्वाइकल कैंसरहोने की संभावना कई गुणा ज्यादा होती है।
  4. धूम्रपान: तंबाकू के सेवन से शरीर की कोशिकाएं डैमेज होती हैं, जिससे कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट बताती है कि जो महिलाएं धूम्रपान और शराब का सेवन करती हैं, उनमें सर्वाइकल कैंसर का खतरा कई गुणा ज्यादा होती है।
  5. साफ-सफाई की कमी: पीरियड्स और यौन संबंध के बाद व्यक्तिगत स्वच्छता (Hygiene) का ध्यान न रखने से भी एचपीवी संक्रमण को बढ़ावा मिलता है।

निष्कर्ष

डॉक्टर के साथ हुई बातचीत और तमाम अध्ययन पर गौर करते हुए हम यह कह सकते हैं कि सर्वाइकल कैंसर से लड़ाई अस्पतालों से पहले घर और स्कूल में शुरू होती है। जब टीएनएज में सही शिक्षा, सही संवाद और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो भविष्य सुरक्षित बनता है। आज जरूरत है सर्वाइकल कैंसर के प्रति चुप्पी तोड़ने की, लड़कियों और महिलाओं के दिमाग में बैठे डर को हटाने की और तमाम जानकारी को शक्ति बनाकर इसके खिलाफ लड़ने की।

किसी ने बिल्कुल सही कहा है कि  जब जागरूकता डर की जगह ले लेती है, तब सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारी भी कमजोर पड़ जाती है। भारत को स्वस्थ और मजबूत बनाना है, तो यह बातचीत आज से ही शुरू करनी होगी  कल के लिए नहीं छोड़नी होगी।

Add The HealthSite as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।