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सर्वाइकल कैंसर अचानक वयस्क अवस्था में नहीं होता। इसकी जड़ें अक्सर टीएनएज में ही पड़ जाती हैं, जब स्वास्थ्य शिक्षा सीमित होती है, जरूरी विषयों पर बात करना असहज माना जाता है और चुप्पी को सुरक्षा समझ लिया जाता है। भारत में आज भी किशोर स्वास्थ्य और प्रजनन शिक्षा को लेकर झिझक बनी हुई है। इसी कारण समय पर सही जानकारी न मिलने से भविष्य में कई महिलाएं गंभीर बीमारियों का सामना करती हैं, जिनमें सर्वाइकल कैंसर प्रमुख है।
Dr. Ranajit Kar, कंसल्टेंट- रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, HCG Cancer Center - Cuttack के अनुसार, टीएनएज जीवन का वह चरण है, जब शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलाव तेजी से होते हैं। इसी समय व्यक्ति की आदतें, सोच और स्वास्थ्य से जुड़ा नजरिया विकसित होता है।
इस उम्र में सबसे ज्यादा शरीर में हार्मोनल बदलाव आते हैं, जो भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ती है। ये समय सबसे ज्यादा अनुकूल होता है किसी भी व्यक्ति के लिए सामाजिक पहचान बनाने का। इसी दौर में एक लड़की के शरीर के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार तय होते हैं। ऐसे में लड़कियों को इस दौर में सही मार्गदर्शन मिले, तो व्यक्ति जीवन भर स्वास्थ्य के लिहाज से सही फैसले लेता है।
डॉ. रंजीता कौर कहती हैं कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर लेकिन रोके जा सकने वाला कैंसर है। यह गर्भाशय के निचले हिस्से में धीरे-धीरे विकसित होता है। सर्वाइकल कैंसर की सबसे खराब बात यह है कि ये महिलाओं के शरीर में धीरे-धीरे विकसित होता है। शुरुआती चरण में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण नजर नहीं आते हैं। देर से पता चलने के कारण ही महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का इलाज करना काफी कठिन हो जाता है। खासकर भारत जैसे देश में जहां पर सर्वाइकल कैंसर का पता ही आखिरी स्टेज में इसलिए चलता है, क्योंकि यहां कैंसर के प्रति जागरूकता की बहुत ही ज्यादा कमी है।
डॉक्टर बताती हैं महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होने का मुख्य कारण है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)। एचपीवी एक सामान्य वायरस है, जो त्वचा के संपर्क में आने से फैलता है। 10 में से 8 मामलों में एचपीवी बिना लक्षण के रहता है, लेकिन ये किसी महिला के शरीर में लंबे समय तक रहे तो कैंसर का कारण बन सकता है। अधिकांश HPV संक्रमण यौन जीवन की शुरुआत के शुरुआती वर्षों में होते हैं, लेकिन लोगों को इसका पता नहीं चलता है।

भारत में किए गए कई सर्वे और अध्ययनों से पता चलता है कि सर्वाइकल कैंसर के प्रति किशोरों में HPV की जानकारी बहुत कम है। 10 में 9 लोगों में सर्वाइकल कैंसर को लेकर गलत धारणाएं हैं। सरकार द्वारा किए जा रहे है प्रचार, डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन के बावजूद भारत में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन को लेकर भ्रम बन हुआ है। इतना ही नहीं, भारत में आज भी अक्सर प्रजनन स्वास्थ्य पर बातचीत शादी के बाद शुरू होती है, जबकि रोकथाम का सही समय टीएनएज होता है।
भारत में स्वास्थ्य शिक्षा का मुख्य फोकस अब तक:
संक्रामक रोग तक ही सीमित रहा है। प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी आज भी भारत में मौजूद नहीं है। इसका कारण ये है कि बच्चे अधूरी या गलत जानकारी पाते हैं। ज्यादातर मामलों में बच्चे प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हो जाते हैं। इससे जानकारी बढ़ाने की बजाय कम हो जाती है। बच्चों के दिमाग में भ्रम और डर बढ़ने लगता है। ऐसे में बच्चे सही फैसले नहीं ले पाते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर का कहना है कि भारत जैसे आधुनिक देश में लड़के और लड़कियों दोनों के दिमाग में एचपीवी से जुड़ी सभी जानकारी को भारना जरूरी है। जब देश के बच्चे जागरूक होंगे, तभी महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम होगा।
सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा रोके जा सकने वाले कैंसरों में से एक है। इसकी रोकथाम तीन स्तंभों पर आधारित है। इसमें शामिल हैः
कई लोग मानते हैं कि टीका लगवाने के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शिक्षा जरूरी है ताकि किशोर समझ सकें कि एचपीवी संक्रमण कैसे फैलता है और इसकी जांच के साथ-साथ इससे सावधानी बरतने की जरूरत क्यों है? डॉक्टर बताते हैं कि जब तक लड़के और लड़कियों को इस बात की समझ नहीं होगी, तब तक सर्वाइकल कैंसरसे रोकथाम मुश्किल है।
आज मोबाइल और इंटरनेट हर किशोर तक पहुंच चुके हैं। सर्वाइकल कैंसर, एचपीवी और एचपीवी वैक्सीन से जुड़ी सही जानकारी अगर सरकारी वेबसाइट, हेल्थ ऐप, सोशल मीडिया अभियान और वीडियो प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को पहुंचे, तो इसके प्रति जागरूकता को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर केवल मेडिकल समस्या नहीं, बल्कि एक शैक्षणिक चुनौती भी है। इसलिए टीएनएज में ही इसका ज्ञान देना जरूरी है। इस उम्र में लड़के और लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर के प्रति ज्ञान विकसित हो जाए, तो आगे चलकर जांच और इलाज अपने आप बढ़ जाएगी।
भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को कितना स्वस्थ बनाते हैं।
स्वस्थ किशोर = स्वस्थ वयस्क = मजबूत राष्ट्र
डॉक्टर का कहना है कि आज शिक्षा में निवेश करने से भविष्य में इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा।
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
2. परिवार स्तर पर
3. स्वास्थ्य व्यवस्था
4. सरकारी प्रयास

मायो क्लीनिक पर छपी रिसर्च बताती है कि शुरुआती चरणों में सर्वाइकल कैंसर के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, यही कारण है कि इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। हालांकि, जैसे-जैसे यह बढ़ता है, शरीर निम्नलिखित संकेत देने लगता है:
सर्वाइकल कैंसर का सबसे मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। यह एक सामान्य वायरस है जो त्वचा के संपर्क से फैलता है।
डॉक्टर के साथ हुई बातचीत और तमाम अध्ययन पर गौर करते हुए हम यह कह सकते हैं कि सर्वाइकल कैंसर से लड़ाई अस्पतालों से पहले घर और स्कूल में शुरू होती है। जब टीएनएज में सही शिक्षा, सही संवाद और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो भविष्य सुरक्षित बनता है। आज जरूरत है सर्वाइकल कैंसर के प्रति चुप्पी तोड़ने की, लड़कियों और महिलाओं के दिमाग में बैठे डर को हटाने की और तमाम जानकारी को शक्ति बनाकर इसके खिलाफ लड़ने की।
किसी ने बिल्कुल सही कहा है कि जब जागरूकता डर की जगह ले लेती है, तब सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारी भी कमजोर पड़ जाती है। भारत को स्वस्थ और मजबूत बनाना है, तो यह बातचीत आज से ही शुरू करनी होगी कल के लिए नहीं छोड़नी होगी।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।