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PCOD And PCOS Ko Kaise Treat Kare: आजकल हर कोई अपनी बीमारियों से परेशान है। खासकर महिलाओं की बात करें तो ज्यादातर महिलाएं पीसीओडी और पीसीओएस से परेशान हैं और इसका ट्रीटमेंट ले रही हैं। लेकिन दवाइयों से पहले अगर आप योग का सहारा लें तो काफी हद तक आपको आराम मिल सकता है। लेकिन कौन से योग करें? अगर आपके मन में भी यही सवाल आ रहा है तो फिक्र न करें।
रूपल सिद्धपुरा एक सेलिब्रिटी योग गुरु हैं, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। वह आलिया भट्ट से लेकर करीना कपूर तक को योग कराती हैं। उन्होंने 5 ऐसे योगासनों के बारे में बताया है जो पीसीओडी और पीसीओएस को कम करने में मदद करेंगे। आइए हम इन योगासनों के फायदों और करने के तरीके के बारे में जानते हैं।
इसे आप बटरफ्लाई पोज भी कह सकते हैं। यह ओवेरीज को स्टीमुलेट करता है और पेल्विक ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसे करने का तरीका बहुत ही ज्यादा आसान है। आपको जमीन पर आलती-पालती मारकर बैठना है। अब आप अपने पैरों के पंजों को आपस में मिलाएं और फिर हाथों से पकड़ लें। अब आप पंजे को जोड़े रखें और घुटनों को तितली के पंख की तरह सामान्य गति में ऊपर नीचे करें।
एक्सपर्ट ने बताया कि अगर आप हलासना करते हैं तो यह थायराइड को रेगुलेट करने और रिप्रोडक्टिव ऑर्गन की मसाज करने में मदद करता है। साथ ही पीसीओडी और पीसीओएस के लिए तो यह फायदेमंद है ही। आपको बस जमीन पर लेट कर अपनी कमर से निचले शरीर को ऊपर उठाकर सिर के पीछे ले जाएं।
सेतु बंधासन को अंग्रेजी में ब्रिज पोज भी कहा जाता है। यह दिमाग को शांत करने और थाइरॉयड फंक्शन को सपोर्ट करने में मदद करता ह। इसके लिए आप जमीन में पीठ के बल सीधा लेट जाएं। अब अपने घुटनों को ऊपर की ओर मोड़ें और पंजों पर टिका दें। इसके बाद कमर को सीधा रखते हुए हिप्स को ऊपर उठाएं। इसी पोजिशन में 30 सेकंड के लिए रहें और फिर कमर को नीचे जमीन पर रख दें।
यह वह पोजीशन है जिसमें हम मल त्याग करते हैं। इसलिए इसे मलासना कहा जाता है, लेकिन रुपल ने इसे करने का दूसरा तरीका बताया है। इसे करने के लिए आप मल करने की पॉजिशन में बैठें और फिर पंजो को बाहर की ओर खोलें। अब अपने हाथों को आगे की बजाय पीछे की ओर से जोड़ें। इससे आपके हिप्स खुलते हैं, डाइजेशन इम्प्रूव होता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी भी ठीक होती है। पीसीओडी और पीसीओएस के लिए यह योगासन तो बहुत ही लाभकारी है।
जैसा की नाम से स्पष्ट है, कैमल यानी की उंठ की तरह बनना। यह पोज एनर्जी को बूस्ट करने और एंडोक्राइन ग्लैंड को स्टीमुलेट करने में मदद करता है। आपको पहले अपने पीछे की ओर पैर मोड़कर जमीन पर बैठ जाना है। इसके बाद आपको अपने ऊपर के आधे शरीर को उठाना है।
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जैसे आप किसी को प्रपोज कर रहे हों। अब आप अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाते हुए और कमर को पीछे की ओर बैंड करते हुए पैरों पर हाथ रख दें। आप देखेंगे कि आप उल्टे डी के आकार के हो गए हैं। यह पोज बहुत ही आसान है और सभी महिलाएं इसे कर सकती हैं।
इसके अलावा योग गुरु ने वक्रासन, पश्चिम मोट्टो आसन, प्रायांकसना आदि जैसे कई योगासनों को पीसीओडी और पीसीओएस के लिए फायदेमंद बताया है। आप इन सभी योगासनों को कर सकती हैं।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
पीसीओएस के लक्षणों से आराम पाने के लिए डाइट, एक्सरसाइज, हेल्दी लाइफस्टाइल और सही डॉक्टरी सहायता बहुत कारगर साबित हो सकता है।
इर्रेग्यूलर पीरियड्स के अलावा मोटापा, एक्ने और ऑयली स्किन, शरीर और चेहरे पर बालों की ग्रोथ बढ़ जाना,थकान, कमजोरी और एंग्जायटी जैसी समस्याएं पीसीओएस के लक्षण हो सकती हैं।
पीसीओडी में महिलाओं को इर्रेग्यूलर पीरयड्स, हेयर फॉल, चेहरे पर पिम्पल्स, फेशियल हेयर बढ़ने और मोटापा बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पीसीओडी के कारण गर्भधारण में भी परेशानी आ सकती है।
मोटापा या अनहेल्दी फूड पीसीओडी का खतरा बढ़ा सकता है। इसीलिए, अपना वजन कम करें। इसके साथ ही हेल्दी डाइट अपनाएं, नियमित एक्सरसाइज करें और अल्कोहल और स्मोकिंग जैसी आदतें छोड़ने से पीसीओडी का रिस्क कम किया जा सकता है।