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Stomach Cancer in Hindi: पेट के कैंसर को गैस्ट्रिक कैंसर के रूप में भी जाना जाता है। साल 2022 में भारत में पेट के कैंसर के 64,611 नए मामले सामने आए थे। भारत में पेट का कैंसर एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। देश में पेट के कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। आमतौर पर पेट का कैंसर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को होता है। लेकिन, आजकल बच्चों और युवाओं में भी पेट के कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। दरअसल, युवाओं में पेट के कैंसर का पता देर से चलता है, जिसकी वजह से समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। पेट में दर्द, पेट में ऐंठन, पेट फूलना या ब्लोटिंग, मतली और उल्टी जैसी समस्याएं पेट के कैंसर के लक्षण (Pet ke Cancer ke Lakshan in Hindi) हो सकते हैं। आइए, सीके बिड़ला अस्पताल, दिल्ली के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा से जानते हैं कि युवाओं को पेट में कैंसर क्यों होता है?
युवाओं को पेट में कैंसर होने के कई मुख्य कारण हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं-
अगर आप समय पर मील नहीं लेते हैं, तो यह पेट के कैंसर का कारण बन सकता है। अनियमित खान-पान पेट में कैंसर का जोखिम कारक हो सकता है। दरअसल, अनियमित खान-पान की आदत की वजह से पाचन-तंत्र और पेट की सेहत प्रभावित हो सकती है। इसकी वजह से पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसमें पेट का कैंसर भी शामिल है। इसलिए पेट के कैंसर से बचाव के लिए आपको अपना खान-पान नियमित करना जरूरी है।
नमक का ज्यादा सेवन भी युवाओं में पेट के कैंसर का कारण बन सकता है। अगर आप ज्यादा नमक या ज्यादा मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करेंगे, तो इससे पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। मसालेदार खाना खाने से पेट की परत को नुकसान पहुंच सकता है। इससे पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, मसालेदार खाना खाने से पेट के कैंसर का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए आपको कम तला-भुना और मसालेदार भोजन ही खाना चाहिए।
अधिक मात्रा में शराब का सेवन भी पेट के कैंसर का कारण बन सकता है। अगर आप भी शराब का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, तो इससे पेट का कैंसर हो सकता है। शराब का ज्यादा सेवन कई अन्य बीमारियों का कारण भी बन सकता है। शराब पीने से लिवर ही नहीं, पेट की सेहत पर भी असर पड़ता है। यह पेट के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
मोटापा या ओवरवेट वाले लोगों में भी पेट के कैंसर का जोखिम अधिक रहता है। अगर आपका ओवरवेट हैं, तो आपको वजन कंट्रोल में करने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि ज्यादा वजन पेट के कैंसर का कारण भी बन सकता है। हालांकि, वजन को कंट्रोल में रखने से पेट के कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
क्रॉनिक एसिड रिफ्लक्स डिजीज (GERD) एक दीर्घकालिक स्थिति है। इस स्थिति में पेट से एसिड अन्नप्रणाली में आ जाता है। इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इसकी वजह से पेट और सीने में जलन का अनुभव हो सकता है। इस स्थिति में पाचन-तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता है। जब अन्नप्रणाली को नुकसान पहुंचता है, तो इससे कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।