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प्रेग्नेंसी एक महिला के जीवन की सबसे खूबसूरत जर्नी होती है। वहीं, डिलीवरी यानी वह समय जब वह बच्चे को जन्म देती है, वह महिला के जीवन का सबसे खुशनुमा लम्हा होता है। जब वह अपने बच्चे को हाथ पर लेती है, तो वह अपने इमोशंस नहीं संभाल पाती है। यह उसके जीवन में खुशियों की बौछार लेकर आ जाता है। लेकिन, एक महिला को प्रेग्नेंसी ही नहीं डिलीवरी के बाद भी कई तकलीफों से गुजरना पड़ता है। डिलीवरी के बाद महिलाओं को शारीरिक और मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। इसमें सबसे आम है बवासीर यानी Piles की समस्या। अक्सर महिलाएं बवासीर के लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं और फिर यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले लेती है। ऐसे में ज्यादातर महिलाएं जानना चाहती हैं कि डिलीवरी के बाद उन्हें बवासीर की समस्या क्यों हो जाती है?
प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं में बवासीर की समस्या बेहद आम है।
डिलीवरी के बाद बवासीर की समस्या हार्मोनल बदलाव की वजह से हो सकता है। दरअसल, इस स्थिति में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है। इससे शरीर की आंतों की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं। इसकी वजह से मल त्याग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे कब्ज की समस्या बनती है और यह बवासीर का एक बड़ा कारण बनता है।
अगर समय रहते बवासीर की पहचान हो जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वरना कई मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है। सौभाग्य की बात है कि आज मिनिमली इनवेसिव और लेजर आधारित उपचारों ने बवासीर के इलाज को ज्यादा प्रभावी बना दिया है। इन तकनीकों की मदद से बवासीर कम दर्दनाक होता है और जल्दी रिवकरी भी हो जाती है। गर्भावस्था और प्रसव के बाद बवासीर होना आम है। लेकिन, इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज बिल्कुल न करें। समय पर जागरूकता और उचित इलाज से महिलाएं बिना दर्द के स्वस्थ जीवन की ओर लौट सकती हैं और मातृत्व पर पूरा ध्यान दे सकती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय का आकार धीरे-धीरे बढ़ता है और इसका मलद्वार क्षेत्र की नसों पर दबाव पड़ता है। यह पेट के निचले हिस्से पर भी दबाव डालता है। इसकी वजह से रक्त संचार धीमा हो जाता है और गुदा के आस-पास की नसें फूलने लगती हैं। इससे पेट साफ होने में दिक्कत होती है और धीरे-धीरे बवासीर रोग विकसित होने लगता है। इस स्थिति में मल त्याग के दौरान गंभीर दर्द हो सकता और खून भी निकल सकता है।
कई बार डिलीवरी के दौरान महिलाएं जोर लगाती हैं। इसकी वजह से मलद्वार की नसों पर अचानक से दबाव पड़ जाता है। इससे बवासीर की समस्या हो सकती है। यही वजह है कि कई महिलाओं को डिलीवरी के बाद मल त्याग के दौरान गंभीर दर्द से गुजरना पड़ता है।