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Breast Milk: शिशु को कराना है स्तनपान, पर नहीं बन रहा है दूध, ये हो सकते हैं ब्रेस्ट मिल्क ना बनने के कारण

स्तनों में कई कारणों से दूध का निर्माण कम हो जाता है। इन कारणों को जानकर सही समय पर कुछ ऐसे उपायों को अपनाना जरूरी है, जिससे दूध अधिक बने और शिशु का पेट भी भर जाए, उसे सारे पौष्टिक तत्व भी प्राप्त हो सकें।

Causes of Low Production of Breast Milk: शिशु जब जन्म लेता है, तो उसके 6 महीने बाद तक उसका मुख्य आहार मां का दूध (Breast Milk) ही होता है। मां का दूध शिशु को स्वस्थ रखता है। उसका पेट भरता है और सारे आवश्यक पोषक तत्व उसके शरीर को दूध के जरिए ही प्राप्त होते हैं। लेकिन, तब क्या हो जब शिशु को पर्याप्त दूध ही ना मिल पाए, उसके शरीर में एक दिन में जितना पोषक तत्व जाना चाहिए, उसमें कमी हो जाए? इससे बच्चा कमजोर हो सकता है। उसका शारीरिक और मानसिक विकास सही तरीके से नहीं होगा। बच्चे का पेट नहीं  भरेगा तो वह भूख से रोता रहेगा। यदि आपका शिशु भी दूध पीने के बाद भी रोता है या फिर वो स्वस्थ नजर नहीं आता, तो इसके पीछे कारण ये हो सकता है कि आपको सही मात्रा में दूध (Breast Milk) नहीं बन रहा है।

शिशु के लिए मां का दूध उसे कई रोगों से भी बचाता है। ऐसे में यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ब्रेस्ट मिल्क का निर्माण अच्छी मात्रा में हो। बच्चे के शरीर में पोषण की कमी रहेगी, तो वह बीमार होने लगेगा। ब्रेस्ट मिल्क पर्याप्त मात्रा में ना आने के पीछे कई कारण (Causes of Low Production of Breast Milk in Hindi) हो सकते हैं, जिन्हें आपको जरूर जान लेना चाहिए।

क्या आप शिशु को रात में दूध पिलाने से बचती हैं?

कुछ महिलाएं रात में आलस के कारण शिशु को अपना दूध नहीं पिलाती हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा सो रहा है और जब तक रोता नहीं, तब तक वे दूध पिलाने से बचती हैं। लेकिन, रात में यदि आप बच्चे को दूध नहीं पिलाती हैं तो इससे दूध का निर्माण कम होने लगता है। दरअसल, रात के समय प्रोलैक्टिन का लेवल शरीर में काफी अधिक बढ़ जाता है। प्रोलैक्टिकन ब्रेस्ट को दूध के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। कोशिश करें कि आप रात में 1 ही मिनट सही, बच्चे को अपना दूध जरूर पिला दें, फिर चाहे वह सोया ही क्यों ना हो।

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हॉर्मोंस के असंतुलित होने से भी कम बनता है दूध

कई कारणों से महिलाओं के शरीर में हॉर्मोंस असंतुलित हो जाते हैं। खासकर प्रेगनेंसी, पोस्ट डिलीवरी, पीरियड्स आदि के समय। ऐसे में भी स्तनों में दूध कम बनने लगता है। कई बार हॉर्मोंस के बैलेंस ना होने से प्रेग्नेंसी के समय और बाद में भी कई तरह की समस्या होने लगती हैं। जिन महिलाओं को पीसीओएस, थाइरॉइड, वजन अधिक होना जैसी समस्याएं हैं, उनमें भी हॉर्मोन असंतुलन होने के कारण दूध का निर्माण थोड़ा कम हो सकता है। ऐसे में आप अपनी डॉक्टर से जरूर संपर्क कर लें।

क्या आप खाती हैं अधिक कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स?

यदि आप दोबारा कम समय के गैप में ही मां बनने से बचना चाहती हैं और उसके लिए गर्भनिरोधक दवाएं खाती हैं, तो इससे भी ब्रेस्ट मिल्क का प्रोडक्शन थोड़ा कम हो सकता है। कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स हॉर्मोन्स के उत्सर्जन (emissions) को रोकती हैं। इसके साइड एफेक्ट्स भी कई हो सकते हैं। बेहतर है कि आप जब तक आपका शिशु 6 महीने का ना हो जाए, गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन बंद कर दें।

सूजन बढ़ने से भी कम बनता है ब्रेस्ट मिल्क

जैसे ही शिशु का जन्म होता है, उसके बाद से ही ब्रेस्ट मिल्क का निर्माण होना शुरू हो जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे को लगातार थोड़े-थोड़े गैप में अपना दूध पिलाना शुरू कर दें। दूध ना पिलाने से ब्रेस्ट के टिशू में सूजन हो सकती है। सूजन के कारण भी ब्रेस्ट मिल्क का निर्माण थोड़ा कम हो सकता है।

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