Intestinal Problems: दुबले-पतले लोगों में भी आंत से जुड़ी बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ रहा है?

Intestine Problems in Skinny People: अगर आपका वजन कम है यानी आप दुबले-पतले हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको बीमारियों का खतरा नहीं है। इस लेख में हम जानेंगे आखिर कैसे दुबले-पतले लोगों में आंतों से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : April 26, 2026 12:08 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Aditya Borawake

Intestinal Problems in Hindi: इस बात में कोई शक नहीं है कि मोटापा हमारे शरीर में तरह-तरह की बीमारियां लेकर आता है, जिनमें कई क्रोनिक बीमारियां व जानलेवा बीमारियां भी होती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दुबले-पतले लोगों को किसी प्रकार की बीमारियों का खतरा नहीं होता है। अक्सर यह माना जाता है कि जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं, उन्हें ही पेट व आंतों से जुड़ी बीमारियां होती हैं। जबकि लोगों को यह समझना होगा कि पेट व आंतों से जुड़ी बीमारियां सिर्फ शरीर के वजन में बदलाव होने से ही नहीं बल्कि खानपान व जीवनशैली से जुड़ी आदतों पर भी निर्भर करता है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि आजकल उन लोगों में भी आंत से जुड़ी बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ रहा है, जिनका वजन कम है या फिर जो लोग दुबले पतले हैं।

सबसे पहले समझना जरूरी है कि हमारे शरीर में “गट हेल्थ” यानी आंतों की सेहत बहुत महत्वपूर्ण होती है। आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बना रहना चाहिए। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो वजन चाहे कम हो या ज्यादा, समस्या शुरू हो सकती है।

Dr. Aditya Borawke, Consultant - Gastroenterologist, Manipal Hospital Kharadi, Pune

खानपान से जुड़ी गलत आदतें

खासतौर पर जिनका वजन कम है यानी दुबले-पतले लोग अपने खानपान का ध्यान नहीं रखते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे कुछ भी खा लें उनका वजन नहीं बढ़ेगा। हालांकि, यह हो सकता है कि उनका वजन न बढ़े लेकिन खराब खानपान उनके पेट व आंतों को नुकसान तो पहुंचा ही रहा होता है। जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड या लंबे समय तक खाली पेट रहना आंतों को नुकसान पहुंचाता है। इससे गैस, एसिडिटी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ज्यादा स्ट्रेस और बिजी लाइफस्टाइल

आपका मानसिक स्वास्थ्य और आपकी आंतों का स्वास्थ्य दोनों एक दूसरे से एक खास कनेक्शन से जुड़े होते हैं और इस कनेक्शन को गट-ब्रेन-एक्सिस कहा जाता है। अगर आपकी आंत ठीक से काम नहीं कर पा रही है, तो उसका असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और वहीं अगर आपको स्ट्रेस या अन्य कोई मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है तो इससे भी आपको आंतों पर असर पड़ने लगता हैय़

बिना डॉक्टर से पूछे बार-बार दवाएं लेना

आजकल यह एक बड़ी समस्या बन चुकी है, कि लोग बिना डॉक्टर से पूछे खुद इंटरनेट पर सर्च करके दवाएं लेने लगे हैं। बिना जरूरत दवाएं लेने से आंतों के अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इससे पाचन गड़बड़ होता है और संक्रमण या एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इसका असर आपके लिवर और किडनी के साथ-साथ आंतों पर भी पड़ता है।

फाइबर को गंभीरता से न लेना

खासतौर पर जिनका वजन काफी कम होता है, यानी दुबले-पतले शरीर वाले लोग अक्सर ऐसी चीजें खाते हैं जो वजन बढ़ाती हैं। क्योंकि उन्हें अपने शरीर का वजन बढ़ाना होता है, ताकि वे पतले-दुबले न दिखें। ऐसे में वे हाई फैट वाली डाइट तो लेते हैं, लेकिन फाइबर को इग्नोर कर देते हैं। शरीर में फाइबर की कमी धीरे-धीरे आंतों पर असर डालती है, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग और पेट दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

आप दुबले-पतले हों या फिर आपको वजन ज्यादा बढ़ा हुआ हो, आंतों को स्वस्थ रखना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है और इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए -

  • फाइबर युक्त आहार लें जैसे साबुत अना, फल और सब्जियां आदि
  • संतुलित डाइट रखें ज्यादा फैट या शुगर वाली चीजें न खाएं
  • दिनभर में पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि आपको डिहाइड्रेशन न हो
  • मेंटल स्ट्रेस न होने दें और अगर हो गया है तो योग व वॉकिंग आदि से कम करें
  • डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई भी दवा न लें

अगर पेट में दर्द या फिर पेट से जुड़ी कोई भी समस्या होती है तो आपको किसी अच्छे गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ पतला होना स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। सही खानपान, अच्छी दिनचर्या और आंतों का संतुलन ही असली सेहत की पहचान है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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