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मेनोपॉज में क्यों परेशान करता है बवासीर, जानें इसका पाचन-तंत्र में क्या असर पड़ता है

मेनोपॉज के दौरान बवासीर का जोखिम बढ़ जाता है। बवासीर से बचने के लिए हेल्दी डाइट लेना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही, हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना भी जरूरी है।

Written By Dr. Pankaj Sharma
Updated : May 20, 2026 6:19 PM IST

piles in menopause

Piles in Menopause: महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक ऐसा चरण होता है, जब शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। आमतौर पर इस समय हॉट फ्लैशेज, मूड स्विंग्स, वजन बढ़ना और अनिद्रा जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं। लेकिन बहुत-सी महिलाएं इस दौरान बवासीर की समस्या का भी सामना करती हैं। कई बार महिलाएं इसे उम्र बढ़ने का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि सही समय पर ध्यान देना जरूरी होता है। मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। इसका असर पाचन-तंत्र पर पड़ता है, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है और यही आगे चलकर बवासीर का कारण बनती है।

मेनोपॉज में क्यों परेशान करता है बवासीर?

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। साथ ही, मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है। इसकी वजह से कई महिलाओं को कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यानी सही से पेट साफ नहीं हो पाता है। ऐसे में जब मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, तो गुदा के आसपास की नसों पर दबाव बढ़ता है और बवासीर हो जाता है।

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लंबे समय तक कब्ज रहने से गुदा की नसों में सूजन आ जाती है। मेनोपॉज के दौरान यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि इस समय शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली में बदलाव होता है।

मेनोपॉज में बवासीर के आम लक्षण

मेनोपॉज में बवासीर होने पर कुछ सामान्य संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसमें शामिल हैं-

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  • मल त्याग के दौरान दर्द या जलन महसूस होना
  • मल त्याग के दौरान गुदा से खून आना
  • गुदा क्षेत्र में खुजली या सूजन महसूस होना होना
  • लंबे समय तक बैठने में मुश्किल होना
  • पेट सही से साफ न हो पाना

शुरुआत में बवासीर का इलाज आसान होता है, लेकिन लोग शर्म या झिझक के कारण देरी कर देते हैं। इससे समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए इसका समय पर इलाज बहुत जरूरी है।

किन महिलाओं में रहता है ज्यादा खतरा?

मेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाओं में बवासीर होने का खतरा ज्यादा बना रहता है।

  • जिन महिलाओं को लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी हुई है, उनमें इसका खतरा ज्यादा हो सकता है।
  • जो महिलाएं पानी कम पीती हैं, उनमें भी इसका खतरा ज्यादा हो सकता है।
  • फाइबर युक्त खाना न खाने से भी बवासीर का जोखिम ज्यादा रहता है।
  • मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी से बवासीर का खतरा बढ़ सकता है।
  • जो महिलाएं लंबे समय तक बैठकर काम करती हैं, उनमें भी बवासीर का जोखिम ज्यादा हो सकता है।

मेनोपॉज के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बहुत जरूरी होता है। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।

क्या बवासीर से बचाव संभव है?

मेनोपॉज के दौरान बवासीर का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन इससे बचाव भी संभव है। इसके लिए आप कुछ टिप्स आजमा सकते हैं।

  • हरी सब्जियां, फल, सलाद, दालें और साबुत अनाज खाएं। इनमें फाइबर अधिक होता है, जो कब्ज से छुटकारा दिलाते हैं।
  • दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। इससे पाचन-तंत्र में सुधार होता है।
  • हल्की वॉक, योग और स्ट्रेचिंग करें। इससे शरीर को एक्टिव रखने में मदद मिलती है।

छोटी-छोटी लाइफस्टाइल आदतें बवासीर से बचाव में मदद कर सकती हैं। खासकर, मेनोपॉज के समय महिलाओं को अपने खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

Disclaimer: आजकल बवासीर के इलाज के लिए आधुनिक और कम दर्द वाली तकनीकें उपलब्ध हैं। इसलिए मरीजों को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मेनोपॉज के दौरान बवासीर होना एक आम हो सकता है। हार्मोनल बदलाव, कब्ज और बदलती जीवनशैली इसके मुख्य कारण बन सकते हैं।