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बच्चों ही नहीं बुज़ुर्गों के लिए भी गम्भीर हो सकता है निमोनिया, जानें किन वजहों से बढ़ता है बीमारी का रिस्क

Buzurgon mein pneumonia ke karan: सर्दियों में अक्सर बुज़ुर्गों में निमोनिया के मामले बढ़ जाते हैं। जानिए कि बुजुर्गों में निमोनिया का खतरा अधिक क्यों होता है।

बच्चों ही नहीं बुज़ुर्गों के लिए भी गम्भीर हो सकता है निमोनिया, जानें किन वजहों से बढ़ता है बीमारी का रिस्क

Written by Sadhna Tiwari |Updated : November 13, 2024 2:16 PM IST

Pneumonia in aged people:  ठंड के मौसम में जो बीमारियां तेजी से फैलती हैं उनमें निमोनिया भी एक बीमारी है। आमतौर पर निमोनिया को बच्चों की बीमारी के तौर पर देखा जाता है। लेकिन, ठंड के मौसम में निमोनिया का खतरा उन लोगों में भी काफी अधिक बढ़ जाता है जिनकी उम्र अधिक हो और जिनकी इम्यून पॉवर  कमजोर होती है। लो इम्यूनिटी के कारण लोग जल्दी-जल्दी बीमार पड़ जाते हैं और इसी वजह से उनके लिए निमोनिया का खतरा बढ जाता है। आइए जानते हैं कि बुजुर्गों में निमोनिया का रिस्क अधिक क्यों होता है और निमोनिया के लक्षण क्या है?

बुजुर्गों में निमोनिया के कारण क्या हैं? (Reasons of higher risk of pneumonia in elderly)

निमोनिया फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें पीड़ित व्यक्ति को लंग्स में इंफेक्शन (Infection in lungs) हो जाता है। इस इंफेक्शन की वजह से फेफड़ों में पानी भर जाता है जिसके कारण मरीजों को बलगम, सांस लेने से जुड़ी तकलीफें, बुखार और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों की तरह ही बुज़ुर्गों में भी निमोनिया फंगस, बैक्टेरिया और वायरस की वजह से होता है।

जैसा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर कमजोर होने लगता है और बीमारियों से लड़ पाने की शरीर की क्षमता भी कमजोर (low immune power in elderly) होने लगती है। ऐसे में बुज़ुर्ग ना केवल जल्दी से निमोनिया जैसी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं बल्कि, उन्हें रिकवर होने में भी काफी समय लग जाता है। वहीं, ठंड के मौसम में वायरस, फंगस और बैक्टेरिया की संख्या काफी अधिक बढ़ जाती है ऐसे में कमजोर इम्यून पॉवर के चलते बूढ़े और उम्रदराज लोग भी इन निमोनया जैसे संक्रमणकी चपेट में आ जाते हैं।

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बुजुर्गों में निमोनिया के कौन-से लक्षण दिखायी देते हैं? (Symptoms of pneumonia in elderly)

तेज बुखार

कंफ्यूजन या भ्रम की स्थिति

सांस लेने से जुड़ी समस्याएं

हार्ट बीट बढ़ जाना

सोचने- समझने में परेशानी

ब्लड प्रेशर कम हो जाना

फोकस नहीं कर पाना

भूख मर जाना

पेशाब न रोक पाना या लीक होना

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साफ-सफाई का ध्यान रखें

जैसा कि निमोनिया एक इंफेक्शन और इसके वायरस को फैलने से अगर रोक लिया जाए तो बीमारी का रिस्क भी कम किया जा सकता है। ऐसे में बुजुर्गों को साफ-सुथरा रहने में मदद करें। उन्हें बार-बार साबुन से हाथ धुलाएं। खाना-खाने से पहले और बाद में भी हाथ धोने में उनकी मदद करें। गंदे हाथों से मुंह और नाक को छून से रोकें।

धूम्रपान ना करने दें

कुछ बुजुर्गों में सिगरेट-बीड़ी पीने और तम्बाकू उत्पादों के इस्तेमाल की आदत देखी जाती है। यह आदत आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। स्मोकिंग करने से निमोनिया और गम्भीर हो सकता है। ऐसे में उन्हें धूम्रपान करने से रोकें और उन्हें ऐसी जगहों पर भी ना जाने दें जहां धुआं या प्रदूषण हो।

ना होने दें शरीर में पानी की कमी

बुजुर्गों को हाइड्रेटेड रहने में मदद करें। उन्हें अधिक से अधिक पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें। दरअसल, पानी की कमी से सांस की नली में बलगम जमा होने लगता है और फेफड़े भी ब्लॉक होने लगते हैं। इसस आपको तकलीफ हो सकती हैं।

इन सबके साथ वैक्सीनेशन, रेग्यूलर हेल्थ चेकअप्स और हेल्दी डाइट जैसी आदतें अपनाने में बुज़ुर्गों की मदद करें। इससे उन्हें निमोनिया से बचाने में सहायता हो सकती है।

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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है