
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : August 29, 2025 12:32 PM IST
Medically Verified By: Dr Sarita Jaiswal
Autoimmune Disease In Children In Hindi: हमारा शरीर एक सुरक्षा कवच के साथ आता है, जिसे इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) कहते हैं। यह तंत्र बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक तत्वों से शरीर की रक्षा करता है। लेकिन जब यही इम्यून सिस्टम गलती से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों को दुश्मन समझकर उन पर हमला करने लगे, तो इसे ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune Disease) कहा जाता है। यह समस्या सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में भी तेजी से देखी जा रही है। बच्चों में ऑटोइम्यून रोग का समय रहते पता लगाना जरूरी है क्योंकि यह उनकी वृद्धि, ऊर्जा और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। आज इस लेख में डॉ सरिता रानी जायसवाल, कंसल्टेंट और प्रोग्राम डायरेक्टर – बीएमटी एवं हीमेटोलॉजी, धर्मशीला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली से जानते हैं बच्चों में ऑटोइम्यून रोग के कारण और लक्षण क्या हो सकते हैं।
ऑटोइम्यून रोग के सटीक कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन शोध से पता चलता है कि इसके पीछे आनुवंशिक, पर्यावरणीय और प्रतिरक्षा संबंधी कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
कुछ बच्चों, खासकर किशोरावस्था की लड़कियों में, हार्मोनल बदलाव ऑटोइम्यून रोग की शुरुआत में भूमिका निभा सकते हैं।
असंतुलित आहार, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव (हाँ, बच्चों में भी तनाव एक बड़ा कारण है) इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है और इसकी कार्यप्रणाली बिगाड़ सकता है।
ऑटोइम्यून रोगों के लक्षण हर बच्चे में अलग हो सकते हैं, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर का कौन-सा अंग प्रभावित हो रहा है। फिर भी कुछ सामान्य संकेत हैं जिन्हें माता-पिता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर बच्चे में ये लक्षण बार-बार दिखाई दें और सामान्य दवाइयों से सुधार न हो, तो तुरंत पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट या इम्यूनोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है। समय पर जांच और इलाज से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और बच्चे को सामान्य जीवन जीने में मदद मिलती है।
बच्चों में ऑटोइम्यून रोग का कारण अक्सर जीन, संक्रमण, पर्यावरण और जीवनशैली का मिश्रण होता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं और कभी-कभी सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों की थकान, बार-बार बुखार, जोड़ों का दर्द, त्वचा में बदलाव और ग्रोथ पर ध्यान देना चाहिए। शुरुआती पहचान और सही इलाज से न केवल रोग की प्रगति को रोका जा सकता है, बल्कि बच्चे का जीवन भी स्वस्थ और संतुलित बनाया जा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।