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महिलाओं में क्यों रहता है कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का ज्यादा खतरा? जानें बचने के कुछ आसान तरीके

Heart Diseases In Women Causes: कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं केवल पुरुषों में ही नहीं जाती हैं, बल्कि महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

महिलाओं में क्यों रहता है कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का ज्यादा खतरा? जानें बचने के कुछ आसान तरीके
VerifiedVERIFIED By: Dr Abhijit Borse

Written by priya mishra |Published : September 9, 2025 12:10 PM IST

Causes of Heart Disease in Women in Hindi: कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD) आज के समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है। अगर आपका कार्डियौवैस्कुलर सिस्टम मजबूत नहीं है तो ऐसे में संभव है कि आप कई बीमारियों जैसे हाइपरटेशन, हार्ट अटैक और स्ट्रोक आदि के शिकार हो सकते हैं। आजकल खराब लाइफस्टाइल और अनियत्रित जीवनशैली फॉलो करने से महिलाएं तेजी से हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक के घेरे में आ रही हैं। हालांकि, यह कहना पूरी तरह से ठीक नहीं है कि कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं केवल महिलाओं में ज्यदा देखी जाती हैं। बल्कि, बहुत से पुरुष भी कार्डियौवैस्कुलर समस्याओं से पीड़ित होते हैं। इस बारे में ज्यादा जानकारी लेने के लिए हमने भारत के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट और मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में डॉक्टर अभिजीत बोरसे से खास बातचीत है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं वो महिलाओं की हार्ट हेल्थ के बारे में:

महिलाओं में क्यों होती है कार्डियोवैस्कुलर डिजीज?

महिलाओं में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज होने के एक नहीं, बल्कि कई कारण जि्म्मेदार हो सकते हैं। इसके पीछे प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले बदलाव को भी हार्ट से जुड़ी समस्याओं का एक बड़ा कारण माना जाता है। अगर चौथी तिमाही के दौरान महिलाओं को प्रीमेच्योर बेबी यानि समय से पहले ही शिशु का जन्म होना और जेस्टेश्नल हाइपरटेंशन आदि जैसी समस्याएं रहती हैं तो इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि गर्भवती महिला को आगे चलकर हार्ट से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही साथ कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी अगर आप पहले से ही कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं से परेशान हैं तो भी आपको आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक (How to Prevent Heart Disease) आदि का सामना करना पड़ सकता है।

महिलाओं में अवरोधक कोरोनरी (INOCA/MINOCA) के साथ इस्केमिया और मायोकार्डियल रोधगलन होने की संभावना अधिक होती है, जो कोरोनरी माइक्रोवैस्कुलर डिसफंक्शन, वाहिका-आकुंचन, प्लाक क्षरण, या आपूर्ति-मांग बेमेल के कारण होता है। रोग का निदान आसान नहीं है, जो तंत्र-निर्देशित जांच (इंट्राकोरोनरी इमेजिंग, वाहिका-सक्रियता परीक्षण) और चिकित्सा की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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सहज कोरोनरी धमनी विच्छेदन (SCAD)। युवा महिलाओं में तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम का एक प्रमुख कारण—गर्भावस्था और प्रसवोत्तर काल सहित—SCAD अक्सर पारंपरिक जोखिम कारकों के बिना होता है और सरसरी एंजियोग्राफी में इसका पता नहीं चल पाता। स्थिर होने पर रूढ़िवादी प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाती है; सावधानीपूर्वक अनुवर्ती कार्रवाई आवश्यक है।

ऑटोइम्यून और इन्फ्लेमेटरी डिजीज। प्रणालीगत ल्यूपस एरिथेमेटोसस और रुमेटीइड गठिया, पुरानी सूजन और एंडोथेलियल डिसफंक्शन के माध्यम से एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ाते हैं; कुछ समूहों में जोखिम मधुमेह के जोखिम के बराबर या उससे भी अधिक हो सकता है। इन रोगियों में नियमित हृदय रोग जोखिम मूल्यांकन और आक्रामक जोखिम-कारक संशोधन आवश्यक है।

कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से बचने के लिए क्या करें?

1. समय-समय पर कराएं जांच

अगर आप कार्डियोवैस्कुलर डिजीज की रोकथाम करना चाहते हैं तो ऐसे में समय-समय पर अपने हार्ट की जांच कराना जरूरी है। ईकोकार्डियोग्राम, ईसीजी और एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट कराकर आप आसानी से हार्ट में होने वाली समस्याओं का पता लगा सकते हैं। इसके लिए शरीर में किसी प्रकार का भी लक्षण दिखाई देने पर आपको डॉक्टर की सलाह के बाद तुरंत अपनी जांच करा लेनी चाहिए, ताकि जल्दी से जल्दी बीमारी का पता लगाया जा सके।

2. लाइफस्टाइल में करें बदलाव

कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को दुरुस्त रखने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करना चाहिए। लाइफस्टाइल में छोटे-मोटे बदलाव करके भी आसानी से हार्ट हेल्थ को दुरुस्त रखा जा सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) के मुताबिक हार्ट को हेल्दी रखने के लिए आपको अपने सोने के पैटर्न को बदलना चाहिए साथ ही साथ वजन को भी नियंत्रित रखना चाहिए। इसके साथ ही साथ आपको ब्लड प्रेशर और ब्लड ग्लूकोज को भी नियंत्रित रखने पर ध्यान देना चाहिए।

3. गर्भावस्था के इतिहास को आजीवन देखभाल में शामिल करें

एपीओ के बाद, प्रसवोत्तर (6-12 हफ़्तों के भीतर) और वार्षिक हृदय रोग जोखिम समीक्षा की योजना बनाएं; रक्तचाप, उपवास लिपिड, ग्लूकोज/HbA1c और वजन की निगरानी करें; भविष्य में गर्भावस्था के जोखिम के बारे में परामर्श दें; और प्रसूति, प्राथमिक देखभाल और हृदय रोग विशेषज्ञों के साथ समन्वय करें। स्टैटिन गर्भावस्था/स्तनपान के अलावा अन्य मानक संकेतों के लिए उपयुक्त हैं।

4. कार्डियोलॉजी-रुमेटोलॉजी साझेदारी के साथ ऑटोइम्यून डिजीज को मैनेज करें

पारंपरिक रोकथाम के साथ-साथ इन्फ्लेमेशन पर सख्त नियंत्रण (लक्ष्य तक उपचार) का लक्ष्य रखें: धूम्रपान बंद करना, उचित होने पर रक्तचाप <130/80 mmHg, संकेतानुसार उच्च-तीव्रता वाले स्टैटिन, और स्टेरॉयड-संबंधी चयापचय प्रभावों के प्रति सतर्कता।

5. खान-पान को अच्छा रखें

अगर आप चाहते हैं कि आपका हार्ट हेल्दी रहे तो ऐसे में खान-पान और डाइट को हेल्दी रखना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको अपनी डाइट में फल, सब्जियों और ड्राई फ्रूट्स जैस अखरोट, खजूर आदि का सेवन करना चाहिए। अगर आप पहले से ही हार्ट की बीमारियों से पीड़ित रहते हैं तो ऐसे में सुबह खाली पेट उठकर अर्जुन की छाल का काढ़ा और दालचीनी का पानी भी पी सकते हैं।

6. स्वास्थ्य समस्याओं पर दें ध्यान

कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को अच्छा और हेल्दी रखने के लिए आपको अपनी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हाइपरटेंशन और डायबिटीज का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। कहीं न कहीं डायबिटीज और हाइपरटेंशन आगे चलकर आपके लिए हार्ट से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि आपको पहले अपनी पुरानी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

7. औषधीय उपचार को अनुकूलित करें—उपचार के अंतराल को कम करें

एमआई के बाद महिलाओं को दिशानिर्देश-निर्देशित स्टैटिन, एंटीप्लेटलेट्स और पुनर्वास मिलने की संभावना कम होती है। अपर्याप्त उपचार को ठीक करें:

लिपिड: जोखिम के अनुसार उच्च-तीव्रता वाले स्टैटिन का उपयोग करें; अपूर्ण लक्ष्यों के लिए एज़ेटिमीब/पीसीएसके9 पर विचार करें।

उच्च रक्तचाप और मधुमेह: दिशानिर्देश लक्ष्यों के अनुसार उपचार करें; छिपे हुए उच्च रक्तचाप (प्रसवोत्तर सामान्य) की जाँच करें।

एंटीप्लेटलेट्स: तंत्र के आधार पर MINOCA में वैयक्तिकृत करें; प्लाक विघटन के बिना दीर्घकालिक उपचार स्वचालित नहीं होता है।

8. समान मार्ग बनाएं

महिलाएं—विशेषकर वे जिनके जोखिम परस्पर जुड़े हुए हैं (जैसे, दक्षिण एशियाई वंश, कम संसाधन)—पहचान और देखभाल में देरी का सामना करती हैं। संरचित प्रोटोकॉल (असामान्य लक्षणों के लिए प्राथमिकता, SCAD मार्ग, प्रसवोत्तर CVD क्लीनिक) और टीम-आधारित देखभाल छूटे हुए निदान को कम कर सकते हैं।

सबसे जरूरी बात

हर महिला की नियमित जांच में गर्भावस्था का इतिहास, रजोनिवृत्ति का समय, स्व-प्रतिरक्षित रोग, स्तन कैंसर की चिकित्सा और "सामान्य" एंजियोग्राम के साथ सीने में दर्द शामिल होना चाहिए। 2) "सीमा रेखा" से "तुरंत कार्रवाई" की ओर बढ़ने के लिए जोखिम बढ़ाने वाले पदार्थों का उपयोग करें, जिसमें चिकित्सा को व्यक्तिगत बनाने के लिए CAC भी शामिल है। 3) INOCA/MINOCA और SCAD का उपचार तंत्र-विशिष्ट रणनीतियों से करें, आश्वासन से नहीं। 4) जीवनशैली और औषधीय रोकथाम को पुरुषों के समान तीव्रता के साथ प्रदान करें - फिर अनुपालन और परिणामों की पुष्टि करें।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।