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दिल्ली में बढ़े वॉकिंग निमोनिया के केस, जानिए साधारण निमोनिया और वॉकिंग निमोनिया हैं एक-दूसरे से कितने अलग ?

Walking Pneumonia Kya Hai?: वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ वॉकिंग निमोनिया का रिस्क बढ़ जाता है। आइए जानें निमोनिया के इस प्रकार के बारे में।

दिल्ली में बढ़े वॉकिंग निमोनिया के केस, जानिए साधारण निमोनिया और वॉकिंग निमोनिया हैं एक-दूसरे से कितने अलग ?

Written by Sadhna Tiwari |Updated : November 28, 2024 4:08 PM IST

वायु प्रदूषण से पस्त हो चुके दिल्ली शहर में अब नयी-नयी बीमारियों का रिस्क भी बढ़ने लगता है। फेफड़ों से लेकर ब्रेन से जुड़ी प्रॉब्लम्स में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। वहीं, वॉकिंग निमोनिया के मामले भी तेजी से बढ़ रहा हैं। वॉकिंग निमोनिया साधारण निमोनिया से अलग होता है और इसमें मरीजों को भी लक्षण भी निमोनिया से भिन्न दिखायी देते हैं। वायु प्रदूषण के कारण क्यों बढ़ते हैं वॉकिंग निमोनिया के मामले और इससे बचने के लिए किस तरह की सावधानियां हैं जरूरी, पढ़ें इस लेख में।

वॉकिंग निमोनिया के कारण क्या हैं? (What causes Walking Pneumonia)

वॉकिंग निमोनिया फेफड़ों से जुड़ा हुआ एक इंफेक्शन है। इसे एटिपिकल निमोनिया (Atypical Pneumonia) के नाम से भी जाना जाता है। साधारण निमोनिया की बीमारी की तुलना में वॉकिंग निमोनिया कम गम्भीर होता है। हालांकि, इस बीमारी से उबरने में मरीज को समय अधिक लगता है। वॉकिग निमोनिया में मरीजों को कमजोरी के साथ-साथ बुखार, सर्दी-खांसी, मसल्स में दर्द और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन, वॉकिंग निमोनिया के मरीजों को निमोनिया के मरीजों की तरह बिस्तर पकड़ने की स्थिति नहीं आती। इन मरीजों को सामान्य शारीरिक गतिविधियां करने या चलने-फिरने भर की शक्ति होती है। इसी वजह से निमोनिया के इस प्रकार को वॉकिंग निमोनिया कहा जाता है।

कॉमन निमोनिया से कितना अलग है वॉकिंग निमोनिया? (Difference between common Pneumonia and Walking Pneumonia)

सर्दियों में होनेवाली निमोनिया की बीमारी श्वसन मार्ग से जुड़ा हुआ एक गम्भीर संक्रमण है। निमोना में मरीज को हाई ग्रेड बुखार, कंपकंपी के साथ ठंड लगने, खांसी, बलगम बनने और छाती में दर्द की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह निमोनिया वॉकिंग निमोनिया की तुलना में अधिक गम्भीर होता है। वहीं, वॉकिंग निमोनिया के मरीजों में आमतौर पर बुखार हल्का होता है लेकिन, इसमें मरीज को ड्राई कफ की समस्या हो जाती है।

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वॉकिंग निमोनिया का संक्रमण वायरस या माइकोप्लाज्मा की वजह से फैलता और गम्भीर होता है। बता दें कि, साधारण निमोनिया के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है। वहीं, वॉकिंग निमोनिया की ट्रीटमेंट के लिए एंटीवायरल दवाओं की मदद ली जाती है।

इन लोगों में होता है वॉकिंग निमोनिया का खतरा अधिक ? (High risk group of walking Pneumonia)

वायु प्रदूषण वॉकिंग निमोनिया का खतरा बढ़ा सकता है। इसीलिए, ऐसे लोग जो प्रदूषण या खराब एयर क्वालिटी वाले इलाकों में रहते हैं उनमें वॉकिंग निमोनिया होने का रिस्क बढ़ जाता है। दरअसल, प्रदूषण के माहौल में सांस लेने से लोगों के लंग्स में सूजन हो जाती है। यह शरीर की इम्यून पॉवर कमकर देता है। इन दोनों ही कारणों से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और लोग आसानी से इंफेक्शन की चपेट में आ जाते हैं।

ठंड के मौसम में घरों के भीतर भी प्रदूषण का स्तर अधिक होता है जिससे लोगों में  घर के भीतर रहते हुए भी इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है। वहीं, ऐसे लोग जो हार्ट डिजिज, अस्थमा और डायबिटीज जैसी क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी वॉकिंग निमोनिया होने का रिस्क अधिक होता है।

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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।