Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
ग्लूकोमा आंखों से जुड़ी एक समस्या है और हाल के समय में ग्लूकोमा के मामलों बहुत अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आनेवाले समय में भारत में ग्लूकोमा के मामलों में बहुत अधिक बढ़ोतरी हो सकती है। एक नयी स्टडी के अनुसार साल 2040 तक देश में ग्लूकोमा के मरीजों की संख्या (cases of Glaucoma in India) में 2 गुना इजाफा हो सकता है। वहीं, आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल भारत में 120 मिलियन लोग ग्लूकोमा की बीमारी से पीड़ित हैं, वहीं इनमें से 40 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें पता नहीं चल पाता कि उन्हें ग्लूकोमा है। ग्लूकोमा में आंखों की रोशनी जाने की भी संभावना बहुत अधिक होती है। ग्लूकोमा की बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल जनवरी में ग्लूकोमा जागरूकता माह (Glaucoma Awareness Month) मनाया जाता है। यहां पढ़ें आंखों से जुड़ी इस बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां। ( symptoms and causes of Glaucoma in Hindi)
ग्लूकोमा को बोलचाल की भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है। यह आंखों से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है और इसके निदान या इलाज में देरी हो जाने पर पीड़ित व्यक्ति की आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा उत्पन्न हो जाता है। कुछ समय पूर्व तक ग्लूकोमा को केवल बुजुर्गों और 40 पार की उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था।। लेकिन, बीते कुछ वर्षों से कम उम्र के लोग और बच्चों में भी ग्लूकोमा के मामले देखे जा रहे हैं।जैसा कि हमारी आंखों का आकार एक बलून या गुब्बारे की तरह होता है और आंखों में मौजूद तरल पदार्थ के निर्माण की प्रक्रिया जब प्रभावित होती है तो आंखों की नसों पर दबाव बनने लगता है। इन नसों को ऑप्टिक नर्व भी कहा जाता है ये ब्रेन तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने का काम करती हैं। इन नसों पर अतिरिक्त दबाव बनने पर दृष्टि कमजोर होने लगती है और इस स्थिति को ग्लूकोमाकहा जाता है। (symptoms and causes of Glaucoma in Hindi)
एक्सपर्ट्स के अनुसार ग्लूकोमा की बीमारी के दो प्रकार हो सकते हैं जिन्हें, ओपन एंगल ग्लूकोमा और क्लोज एंगल ग्लूकोमा कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ग्लूकोमा के पहले प्रकार या ओपन एंगल ग्लूकोमा में नजर धीरे-धीरे कमजोर होत है वहीं, क्लोज एंगल ग्लूकोमा में आंखों के एंगल्स धीरे-धीरे पूरी तरह से बंद हो जाते हैं जिससे पीड़ित व्यक्ति को अचानक से पूरी तरह से दिखायी देना बंद हो सकता है।
ओपन एंगल ग्लूकोमा के लक्षण काफी देर से दिखायी पड़ते हैं और बीमारी के प्रारंभिक चरण में पीड़ितों का इसका पता आसानी से नहीं चल पाता।
(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई बीमारी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)