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Written By: Yogita Yadav | Published : August 14, 2019 10:34 AM IST
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार महामारी विज्ञान की मानें तो एक साल पहले की तुलना में डेंगू के मामलों में 55% का इजाफा हुआ है। इससे अब तक 720 लोग मारे गए हैं। ©Shutterstock.
डेंगू का कहर (Dengue Fever) अब भी जारी है। पिछले माह फिलीपीन सरकार ने डेंगू को महामारी (Dengue Fever) घोषित किया था। इसके बावजूद इसमें कमी नहीं आ रही है। पिछले छह माह में ही डेंगू के मामले दोगुने यानी डबल हो गए हैं। फिलीपीन के स्वास्थ्य विभाग के सचिव फ्रांसिस्को ड्यूक तृतीय ने लोगों से अपील की है कि हर व्यक्ति निजी स्तर पर भी इसके लिए सतर्क रहे। जैसे ही डेंगू के लक्षण दिखाई दें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। किसी भी तरह की लापरवाही आपकी जान जोखिम में डाल सकती है।
फिलीपीन सरकार ने पिछले माह डेंगू के मामलों में अचानक उछाल आने के कारण इसे महामारी घोषित किया था। ताकि इससे बेहतर ढंग से निपटा जा सके। अब तक डेंगू के मामले 167,607 हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार महामारी विज्ञान की मानें तो एक साल पहले की तुलना में डेंगू के मामलों में 55% का इजाफा हुआ है। इससे अब तक 720 लोग मारे गए हैं। जनवरी से जुलाई तक डेंगू के लगभग 170,000 मामले हैं।
27 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह की पिछले वर्ष से तुलना करें तो पाएंगे कि इनमें 70% बढ़कर 12,880 हो गए हैं। अकेले उस सप्ताह में ही 39 लोगों की मौत हो गई। जुलाई तक पीड़ितों में से 23% या 38,268 बच्चों की उम्र 5 से 9 साल है।
बरसात में डेंगू का सबसे ज्यादा डर रहता है। खासतौर से बच्चों में। क्योंकि वे खुले में खेलते हैं और अपने स्वास्थ्य के प्रति इतने सजग नहीं होते। ऐसे में आपकी जिम्मेदारी बनती है कि अगर बच्चों में ये लक्षण नजर आएं तो उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले कर जाएं।
बच्चों में अधिक तीव्रता से फैलता है। शुरुआत में बच्चों में डेंगू के लक्षणों को पहचानने में थोड़ी दिक्कतें आती हैं, लेकिन 3 से 4 दिन में डेंगू की पहचान आसानी से की जा सकती है। डेंगू के लक्षण, डेंगू के प्रकार पर निर्भर करते हैं। डेंगू तीन प्रकार का होता है और इनके लक्षण व प्रभाव भी अलग-अलग होते हैं।
बच्चे की खेलकूद में कोई रूचि नहीं रहती। वह आराम करना चाहता है। बच्चे में सामान्य बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं। डेंगू के कारण बच्चों का ब्लड प्रेशर भी लो हो सकता है। बच्चे में चलने-फिरने की हिम्मत नहीं रहती। डेंगू को फैलने से रोकने के लिए बच्चे की समय-समय पर सामान्य जांच भी करवाते रहें।
आमतौर पर बच्चों में होने वाले बुखार से ही डेंगू की पहचान की जाती है। यदि बच्चे में बुखार के कारण ज्ञात नहीं होते और तेज बुखार के साथ कंपकपी और शरीर में दर्द होता है, तो रक्त जांच से डेंगू की पहचान की जाती है।
वयस्कों की तरह ही बच्चों के शरीर पर लाल रैशेज हो जाते हैं। बच्चे को भूख न लगाना, मुंह का स्वाद खराब होना डेंगू के ही लक्षण हैं। सिर दर्द, बदन दर्द, जोड़ों आदि में दर्द की शिकायत डेंगू के ही लक्षण हैं। लगातार प्लेटलेट्स का स्तर कम होना। बच्चा बार-बार चक्कर आने की शिकायत करता है।
यह बीमारी अक्सर एक से दो हफ्ते तक रहती है। ऐसे में बच्चों को खूब तरल पदार्थ पिलाएं। पानी की कमी को पूरा करना बहुत जरूरी है।मच्छरों से बचाने का हर सम्भव प्रयास करें। बच्चों को मच्छरदानी में सुलाएं। पूरी बांह के कपड़े पहनाएं आदि। डेंगू का इलाज इससे होने वाली परेशानियों को कम कर के ही किया जा सकता है। बुखार में आराम करने दें।
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