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जानें, कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज क्या है और कैसे करें इससे अपना बचाव

कार्डियोवस्कुलर हार्ट डिजीज होने का मुख्‍य कारण है कोलेस्‍ट्राल के स्तर में वृद्धि। © Shutterstock.

कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज दिल और रक्त वाहिकाओं के विकारों के कारण होती हैं। इनमें कोरोनरी हृदय रोग, स्ट्रोक, हाइपरटेंशन, जन्मजात हृदय रोग तथा दिल का फेल होना शामिल है।

कार्डियोवस्कुलर हार्ट डिजीज होने का मुख्‍य कारण है कोलेस्‍ट्राल के स्तर में वृद्धि। कार्डियोवैस्कुलर हार्ट डिजीज दिल और रक्त वाहिकाओं के विकारों के कारण होती हैं। इनमें कोरोनरी हृदय रोग (दिल के दौरे), केर्ब्रोवैस्कुलर रोग (स्ट्रोक), बढ़ा हुआ रक्तचाप (हाइपरटेंशन), जन्मजात हृदय रोग तथा दिल का फेल होना शामिल है। मोटापा भी इन बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। ऐसे में वजन घटाने के लिए नियमित व्यायाम तथा साधारण तथा संतुलित भोजन करना चाहिए। दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम और सुबह या शाम के समय चहलकदमी करनी चाहिए। ट्रीग्लिसीराइड भी कार्डियोवैस्कुलर रोग का एक कारण हो सकता है। सोया प्रोटीन लेने से शरीर में एचडीएल कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ती है, इसे गुड कोलेस्ट्राल माना जाता है। यह कोलेस्ट्राल रक्त नलिकाओं से बुरे कोलेस्ट्राल को हटाने में सहायक होता है। हाई कोलेस्ट्रॉल को करें इन घरेलू नुस्खों से कंट्रोल

कार्डियोवैस्कुलर हृदय रोग के लक्षण

- शरीर में सूजन।

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- चक्कर आना।

- अत्यधिक पसीना आना।

- तेजी से सांस लेना, त्वचा, होंठ और उंगलियों के नाखूनों में नीलापन, थकान और खून का संचार कम होना।

- सांस फूलना।

- सीने, जबड़े या बांह में दर्द होना। थकान, सांस में तकलीफ हो सकते हैं हार्ट डिजीज के लक्षण : एक्सपर्ट

- थकान व कमजोरी महसूस होना।

- सांस रोकने में तकलीफ, रक्त जमना और फेफड़ों में द्रव जमा होना।

- पैरों, टखनों और टांगों में पानी का जमा होना।

कार्डियोवस्कुलर रोग से बचाव

- कार्डियोवस्कुलर रोगों से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव व सुधार करना बहुत जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि शारीरिक सक्रियता को बनाएं रखा जाए। जितना हो सके तनाव से बचें। सकारात्मक सोचें। आशावादी रहें। तनाव से बचने के लिए मनपसंद संगीत सुनें। लाइफस्टाइल में इन 5 चीजों को अपनाकर देखें, दिल रहेगा सेहतमंद

-नियमित रूप से व्यायाम करके आसानी से जानलेवा हृदय रोग से बचा जा सकता है। सुबह सैर पर जाएं। योग करें। परिवार में पूर्व में किसी को हृदय रोग रहा हो तो शारीरिक श्रम से आप लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

- यदि दवाएं और नियमित देखभाल हृदय रोग के लक्षणों को कम नहीं करती हैं, तो आप सर्जरी के विकल्प के बारे में अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं। अनेक प्रक्रियाएं जैसे हार्ट वॉल्व सर्जरी, इनफ्रेक्ट एक्सक्लूजन सर्जरी, हार्ट ट्रासप्लान्ट (हृदय प्रत्यारोपण) तथा बाईपास सर्जरी आदि संकीर्ण या अवरुद्ध धमनियों को फिर से खोलने या सीधे हृदय की चिकित्सा के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।

- तला-भुना अधिक न खाएं। फास्ट फूड और चिकनाई वाला खाना खाने से वजन भी बढ़ता है और यह चिकनाई रक्त धमनियों में जम जाती है जिससे खून का बहार धीरे−धीरे कम होता जाता है। संतुलित व पौष्टिक आहार ही लें। फल व सब्जियों का सेवन करें। बच्चों में जन्मजात हार्ट डिजीज के अनिवार्य जांच पर राष्ट्रीय नीति बनाने की जरूरत

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