Add The Health Site as a
Preferred Source
Add The Health Site as a Preferred Source

डाउन सिंड्रोम में दिल की बीमारी का बड़ा खतरा! जन्म के बाद ये टेस्ट कराना जरूरी

डॉक्टर बताते हैं कि डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों के लिए जन्म के तुरंत बाद दिल की जांच कराना बेहद आवश्यक होता है। इसका सबसे प्रभावी तरीका है इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram)।

डाउन सिंड्रोम में दिल की बीमारी का बड़ा खतरा! जन्म के बाद ये टेस्ट कराना जरूरी
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Pankaj Bajpai

Written by Ashu Kumar Das |Published : March 24, 2026 12:17 PM IST

Cardiac Health in Down Syndrome Early Heart Screening to Prevent Silent Complications : डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक स्थिति है, जो तब होती है जब बच्चे के शरीर में 21वें क्रोमोसोम की एक अतिरिक्त कॉपी मौजूद होती है। डाउन सिंड्रोम जैसी स्थिति बच्चों के शारीरिक विकास, चेहरे की विशेषताओं और मानसिक क्षमता को प्रभावित करती है। हालांकि, इसके साथ जुड़ा एक महत्वपूर्ण और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला पहलू है दिल से जुड़ी समस्याएं।

मेदांता सिटी हॉस्पिटल के डॉ. पंकज बाजपेयी का कहना है कि डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Defects) होने की संभावना सामान्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक होती है। ये समस्याएं जन्म से ही मौजूद रहती हैं और कई बार शुरुआती समय में इनके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

डाउन सिंड्रोम और दिल की समस्याओं के बीच कनेक्शन

डॉ. पंकज बाजपेयी बताते हैं कि डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में अतिरिक्त क्रोमोसोम उनके शरीर के विकास को प्रभावित करता है, खासकर गर्भावस्था के दौरान दिल के निर्माण पर इसका असर पड़ता है। यही कारण है कि इन बच्चों में दिल की सरंचनाओं में असामान्यतादेखी जाती है। कुछ मामलों में ये हल्की होती हैं और समय के साथ अपने आप ठीक भी हो सकती हैं, लेकिन कई बार ये गंभीर रूप ले लेती हैं। गंभीत स्थिति में बच्चे का तुरंत इलाज करवाना जरूरी होता है। इतना ही नहीं, डाउन सिंड्रोम के कारण होने वाली दिल की बीमारियों में कई बार बच्चे को तुरंत सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।

  1. एट्रियोवेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (AVSD) - दिल के बीच में बड़ा छेद होना
  2. वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) - दिल के निचले चेंबर में छेद
  3. एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) - ऊपरी चेंबर में छेद
  4. पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) - जन्म के बाद एक रक्त वाहिका का बंद न होना

इनमें से कई समस्याएं बिना किसी स्पष्ट संकेत के भी मौजूद हो सकती हैं। यही कारण है कि केवल लक्षणों के आधार पर इनका पता लगाना मुश्किल होता है।

Also Read

More News

क्यों जरूरी है शुरुआती स्क्रीनिंग?

डॉक्टर बताते हैं कि डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों के लिए जन्म के तुरंत बाद दिल की जांच कराना बेहद आवश्यक होता है। इसका सबसे प्रभावी तरीका है इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram)। यह एक सुरक्षित, बिना दर्द वाला और अत्यंत उपयोगी टेस्ट है, जो ध्वनि तरंगों की मदद से दिल की संरचना और उसकी कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी देता है। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर आसानी से यह पता लगा सकते हैं कि दिल में कोई संरचनात्मक समस्या है या नहीं।

बच्चे के शुरुआती जांच के फायदे

  1. समय रहते इलाज की योजना- अगर किसी तरह की हृदय समस्या का पता चल जाता है, तो डॉक्टर तुरंत उसके इलाज की योजना बना सकते हैं। कुछ मामलों में दवाओं से इलाज संभव होता है, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
  2. नियमित निगरानी संभव- अगर समस्या गंभीर नहीं है, तब भी डॉक्टर समय-समय पर जांच करके स्थिति पर नजर रख सकते हैं। इससे भविष्य में होने वाली जटिलताओं को रोका जा सकता है।
  3. गंभीर स्थिति से बचाव- कई बार बिना इलाज के दिल की समस्याएं आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं, जिससे बच्चे के विकास और जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। शुरुआती जांच इन जोखिमों को काफी हद तक कम कर देती है।
  4. बेहतर जीवन गुणवत्ता- समय पर इलाज और देखभाल से बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है, जिससे वह एक स्वस्थ जीवन जी सकता है।
  5. समय-समय पर चेकअप कराने से किसी भी नई समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर बच्चे की स्थिति के अनुसार जीवनशैली, दवाओं और अन्य देखभाल से जुड़ी सलाह भी देते हैं।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Add The HealthSite as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source