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A surprising fact about cardiac arrest says the survival is linked with the day of the week. ©Shutterstock.
अकसर आपने सुना होगा कि एथलीट्स को अचानक कार्डियक अरेस्ट आया और उसकी मृत्यु हो गई। श्रीदेवी सहित कई नामी शख्सियत ऐसी रहीं हैं, जिनकी अचानक मृत्यु हो गई। इनमें से अधिकांश की वजह कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) सामने आई। कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) उन मेडिकल इमरजेंसी में शामिल है जिनके लक्षण बहुत कम नजर आते हैं। इनका सर्वाइवल रेट भी बहुत कम है। आइए जानें क्या हैं वे लक्षण जिन्हें पहचान कर कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) में बचाव किया जा सकता है।
अकसर कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) को हृदयाघात मान लिया जाता है। जबकि यह उससे अलग है। कार्डियक अरेस्ट एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। असल में जब दिल धड़कता है तो उससे विद्युत संवेग पैदा होता है। इसी विद्युत संवेग की मदद से शरीर में रक्त का संचार होता है। कार्डियक अरेस्ट से पहले यह रक्त संचार अनियमित हो जाता है। कभी तेज, कभी धीमी गति होने के कारण यह फेफड़ों, मस्तिष्क तथ्या अन्य अंगों तक ऑक्सीजन युक्त ब्लड की सप्लाई नहीं कर पाता। जिससे ये हिस्से काम करना बंद कर देते हैं और मरीज अचेत हो जाता है।
हालांकि कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest)के लक्षण पहले से पहचान पाना मुश्किल होता है। पर हाल ही में CMAJ (कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल) की समीक्षा में पाया गया कि जिन एथलीट्स को कार्डियक अरेस्ट आया उनमें से 29 फीसदी ऐसे थे जिनमें पहले से ही ये लक्षण देखे गए थे। एथलीट्स में कार्डियक अरेस्ट के बाद सर्वाइवल रेट सबसे ज्यादा है। इसकी वजह यही है कि उन लक्षणों को पहचान कर उन्हें तुरंत बचाव सहायता मुहैया करवाई गई।
कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) से बचाव के लिए चिकित्सकों को नियमित रूप से एथलीटों से पूछना चाहिए कि क्या वे चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ, व्यायाम के दौरान या बाद में सीने में दर्द का अनुभव करते हैं? साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि उनकी फैमिली हिस्ट्री में इस बीमारी का कोई इतिहास रहा है या नहीं। परिवार में किसी को कार्डियक अरेस्ट होने पर भी इसका जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
जब भी किसी को कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest) हो तो उसके लिए तात्कालिक उपचार है सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन)। इस प्रक्रिया में मरीज के सीने पर हाथों से दबाव दिया जाता है। मरीज के सीने को एक मिनट के भीतर 100 से 120 बार तक दबाना चाहिए। हर 30 बार दबाने के बाद उसकी सांस चैक करनी चाहिए। साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना देर किए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
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