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Written By: Jitendra Gupta | Published : February 5, 2021 9:06 AM IST
कैंसर होने पर शरीर के इन 4 अंगों में होता है तेज दर्द, 10 में से 9 लोग होते हैं इस दर्द का शिकार
दर्द एक ऐसा दुखदायी फैक्टर होता है जिसका सामना हर तरह के कैंसर मरीज करते है। दो तरह की परिस्थितियां होती है जहां पर कैंसर का मरीज दर्द को महसूस कर सकता है। पहला तब होता है जब कैंसर मेटास्टेसाइजिंग होता है, या शरीर के अन्य भागों में फैलता है और इस प्रक्रिया में तंत्रिका तंत्र पर दबाव पड़ता है। दूसरा यह है कि भले ही कैंसर आकार में छोटा होता है लेकिन स्पाइनल कॉर्ड या नर्व को दबाता है इससे दर्द होता है। जिन मरीजों का सफलतापूर्वक ट्रीटमेंट पूरा हो चुका होता है वे भी सर्जरी या रेडियोथेरेपी के बाद दर्द महसूस कर सकते है जबकि कुछ मरीज में यह कीमोथेरेपी के लॉन्गटर्म का साइड-इफेक्ट होता है। सभी कैंसर में दर्द नही होता है भले ही वे बड़े क्षेत्र में फैले हो। ऐसा माना जाता है कि हर 10 में से 3 से 6 लोग यानी कि कैंसर से पीड़ित 30 से 60% लोग कैंसर के किसी न किसी रूप में दर्द का सामना करते हैं। एडवांस कैंसर के मरीजों को दर्द ज्यादा होता है। कुछ स्टडी से पता चला है कि एडवांस कैंसर वाले 10 में से 9 लोग, यानी, एडवांस कैंसर के 90 % मरीजों में दर्द का अनुभव होता है।
कैंसर के मरीज को क्रोनिक या तीव्र पीड़ा हो सकती है। कैंसर सर्जरी के केसेस में तीव्र पीड़ा होना आम बात है और यह दर्द कुछ ही समय के लिए रहता है इस दौरान पेन किलर दवाएं खाने से दर्द को नियंत्रण में रखा जा सकता हैं। क्रोनिक दर्द ज्यादा लगातार होता है और यह नर्व में परिवर्तन के कारण हो सकता है। यह परिवर्तन तब होता है जब कैंसर नर्व्स पर दबाव डालता है या केमिकल के कारण होता है जो एक ट्यूमर पैदा करता है। कैंसर ट्रीटमेंट के कारण नर्व में परिवर्तन से क्रोनिक दर्द हो सकता हैं यह दर्द हल्का से लेकर गंभीर तक हो सकता हैं। कभी-कभी दर्द जल्दी से ठीक हो सकता है - उदाहरण के लिए, जब आपकी ड्रेसिंग बदली जाती है या आप घूमते हैं और पोजीशन बदलते हैं तब यह दर्द होता है, इसे आकस्मिक दर्द के रूप में जाना जाता है। कैंसर के दर्द के कुछ प्रकार निम्नलिखित हैं:
कैंसर से होने वाले इस तरह के दर्द को न्यूरोपैथिक दर्द के रूप में भी जाना जाता है, यह नर्व्स या रीढ़ की हड्डी पर दबाव के कारण होता है या नर्व को नुकसान पहुंचाता है। यह स्किन के नीचे जलन, झुनझुनी, टपकने या रेंगने जैसे दर्द के रूप में महसूस हो सकता है। रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी या सर्जरी जैसे कैंसर ट्रीटमेंट की वजह से इस तरह का दर्द होता है।
इस तरह का दर्द तब होता है जब कैंसर हड्डी में फैल जाता है और हड्डी के टिश्यू को नुकसान पहुंचाता है। इस तरह के कैंसर हड्डी के एक विशिष्ट क्षेत्र या कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। दर्द, सुस्त या बहुत तेज दर्द को
सोमेटिक पेन (दैहिक दर्द) के रूप में भी जाना जाता है।
यह दर्द मांसपेशी या किसी अंग से उत्पन्न होता है। ऐंठन, तेज, दर्द या थ्रोबिंग सेंसेशन के रूप में इसे महसूस किया जा सकता है। इसे आंत के दर्द के रूप में भी जाना जाता है।
जब शरीर के एक हिस्से को कैंसर के ट्रीटमेंट में हटा दिया जाता है, जैसे कि ब्रेस्ट को हटाने से या अंगों के काटने के कारण, इसे हटाने के बाद कुछ समय के लिए व्यक्ति में दर्द की भावना पैदा हो सकती है। अनुमान के मुताबिक 50% कैंसर मरीज में हाथ या पैर को हटाने वाली सर्जरी करवाई है और लगभग 3 में से 1 महिला ने शल्य चिकित्सा से एक ब्रेस्ट को हटवाने का दर्द झेला है।
दर्द का अनुभव करने वाला ही वह उपयुक्त व्यक्ति होता है जो दर्द को समझने में डॉक्टर की मदद करता है। ऐसा करने के लिए मरीजों को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:
दर्द का इलाज करने के लिए दवाएं मौजूद हैं। दर्द का अनुभव करने वाले कैंसर मरीजों को विभिन्न तरीकों से इन दवाओं को खाने के लिए कहा जा सकता है, जिसमें ओरल, इंजेक्टेबल, त्वचा में, मलाशय में दवा डालने से लेकर साथ ही रीढ़ की हड्डी के चारों ओर एक पंप डालने जैसे एडवांस साधन उपलब्ध हैं। सर्जरी के बाद तीव्र दर्द और कुछ क्रोनिक दर्द समस्याओं के लिए अस्थायी तंत्रिका ब्लॉक किया जा सकता है, इसे न्यूरल ब्लोकेज (तंत्रिका अवरोध) भी कहा जाता है, यह थोड़े समय के लिए दर्द से राहत प्रदान कर सकता है। ज्यादा दर्द होने पर एपिड्यूरल के एडवांस ट्रीटमेंट (रीढ़ की हड्डी के बाहरी झिल्ली के ठीक बाहर का स्थान) या इंट्राथिकल (रीढ़ की हड्डी को कवर करने वाले शेथ्स (म्यानो) के बीच का स्थान) पंप उपलब्ध होता हैं जो या तो एक थैली में रखा जाता है या लगातार दवाइयां देने के लिए त्वचा के नीचे रखा जाता है। कैंसर मरीजो को शार्ट टर्म साइकोथेरेपी और कोगनिटिव-बिहैविरियल थेरेपी जैसी मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने से दर्द से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है।
(इनपुट : डॉ. अरुण गिरी, सर्जिकल ओन्कोलोजी डायरेक्टर, आकाश हेल्थकेयर एंड सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल, द्वारका )