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अक्सर बहुत से लोग ऐसे अंगों में कैंसर का शिकार हो जाते हैं, जिसके लक्षण न तो उन्हें समझ आते हैं और न ही महसूस होते हैं। बहुत बार लोग इन्हें मामूली समझ लेते हैं, जो आगे चलकर गंभीर परिणामों की वजह बनता है। कुछ ऐसा ही मामला दिल्ली से सटे गुरुग्राम के सीके बिरला हॉस्पिटल से सामने आया, जहां एक हाई रिस्क वाली मैराथन सर्जरी की गई। ये सर्जरी सफल रही जिसमें 66 वर्षीय पुरुष मरीज का जीवन बचाया गया। इस पूरी सर्जरी में 6 से 7 घंटे का वक्त लगा। पेट और खाने की नली के बीच कैंसर था और मरीज की उम्र को देखते हुए ये सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी।
मरीज को शुरुआत में कुछ लक्षण आए। उनका धीरे-धीरे वजन घटने लगा और खाने-पीने का मन नहीं करता था। मरीज की जांच पड़ताल करने पर पता चला कि उनके पेट और भोजन नली के जंक्शन पर कैंसर था। इसके बाद मेडिकल टीम ने केस पर चर्चा की और सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
ये सर्जरी बेहद कॉम्प्लेक्स थी। इसमें चेस्ट और पेट दोनों को एक साथ खोलने की जरूरत थी। जिस जगह ट्यूमर था वो हार्ट, मेजर ब्लड सेल्स और दोनों फेफड़ों के करीब था। इस पोजिशन के कारण ऑपरेशन से जुड़े जोखिम और ज्यादा थे। इसके अलावा मरीज को मेजर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत थी। इन सब तमाम वजहों से ये एक हाई रिस्क केस बन गया था।
सीके बिरला अस्पताल गुरुग्राम के स्किल्ड डॉक्टरों की देखभाल में ये सर्जरी की गई और 6-7 घंटों में इसे पूरा कर लिया गया। इसके बाद मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया।
लीड सर्जन डॉक्टर विनय गायकवाड़ ने बताया, ''सीके बिरला अस्पताल की सर्जिकल टीम पर हमें बहुत गर्व है। टीम ने एक हाई रिस्क सर्जरी को बहुत ही शानदार तरीके से पूरा किया है। सर्जरी की चुनौतियों के साथ मरीज की उम्र, इस केस को काफी चुनौतीपूर्ण बना रही थी। लेकिन अच्छी प्लानिंग, सटीक एग्जीक्यूशन और ऊपर वाले के करम से सर्जरी का पॉजिटिव रिजल्ट आया।''
सीके बिरला अस्पताल के ऑन्कोलॉजी सेंटर में कंसल्टेंट डॉक्टर ज्योति भट्ट ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीज ने बहुत ही अच्छी रिकवरी की। सर्जरी के चार दिन बाद ही मरीज नॉर्मल डाइट लेने लगे जिससे रिकवरी में और ज्यादा मदद मिली। हमारे यहां मेडिकल टीम सतर्क रहती है और मरीज की सही ढंग से देखभाल के लिए लगातार प्रयास करती रहती है।
डॉक्टरों की यह उपलब्धि सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों से निपटने के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस हाई रिस्क मैराथन सर्जरी की सफलता, अस्पताल द्वारा मरीज की देखभाल के लिए उसके समर्पण को दिखाता है। साथ ही इससे ये भी पता चलता है कि मेडिकल टीम मुश्किल से मुश्किल मामलों को भी सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाने में कितनी स्किल्ड और सक्षम है।