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Written By: Anshumala | Published : December 16, 2019 5:33 PM IST
26 वर्षों में कैंसर के मामलों में दोगुनी हुई है वृद्धि, जानें कैंसर से बचने के उपाय और इलाज। © Shutterstock.
मैक्स हॉस्पिटल (साकेत) ने मॉलीक्युलर ऑन्कोलॉजी और कैंसर जेनेटिक्स के फायदों के बारे में चर्चा के लिए जागरूकता कार्यक्रम (cancer awareness) का आयोजन लखनऊ में किया। इसमें भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों, उनकी रोकथाम और इलाज में प्रगति के बारे में चर्चा की गई। भारत में, विशेषतौर पर अर्बन क्षेत्रों में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के हालिया डाटा के अनुसार, पिछले 26 सालों में कैंसर के मामलों में दोगुनी वृद्धि हुई है। विश्व स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ओरल कैंसर और लंग कैंसर की 41 प्रतिशत आबादी भारत की है, जो अन्य देशों की तुलना में बहुत ज्यादा है। टेक्नोलॉजी में प्रगति के साथ आज कैंसर की पहचान, रोकथाम और इलाज करना आसान हो गया है।
मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर के चेयरमैन डॉ. हरित चतुर्वेदी ने कैंसर के बढ़ते मामलों पर कहा कि भारत में ऑन्कोलॉजी की सबसे बड़ी टीम मैक्स हॉस्पिटल में है। सर्जिकल, मेडिकल, रेडिएशन के 80 एक्सपर्ट्स को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेनिंग मिली है, जिसके कारण हम कैंसर के ज्यादा से ज्यादा मरीजों का सफल इलाज करने में सक्षम हैं। हमारी टीम विभिन्न अंगो के कैंसरों की रोकथाम व इलाज करती है। हर मरीज से उसके ट्यूमर वाले अंग की समस्या के बारे में बात की जाती है और फिर पूरी जांच-परीक्षण के बाद ही रोकथाम व इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी के प्रमुख सलाहकार, डॉ. देववृत आर्या ने बताया कि नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग जैसी जेनेकिट टेस्ट के जरिए ट्यूमर में आए बदलावों की स्टडी की जा सकती है। इसके आधार पर उचित इलाज का चुनाव किया जाता है, जिससे स्टेज 4 में होने का बाद भी इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं। यह प्रक्रिया हमारे क्लिनिक में लंग, गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल और ओवरियन कैंसर के कई मरीजों के लिए रोज इस्तेमाल की जाती है।”
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सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की एसोसिएट सलाहकार डॉ. अदिती चतुर्वेदी ने बताया कि “भारत में, प्रति 28 महिलाओं में एक महिला ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। जागरूकता में कमी के कारण आज भी लोग इसे एक कलंक के रूप में देखते हैं। आज भी लोग इसके बारे में बात करने से हिचकते हैं, जिसके कारण कई मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पाता है। यह समस्या हमारे देश में एक बड़ी चुनौती का रूप ले चुकी है। शुरुआती निदान के साथ परिणाम बेहतर हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए लोगों के बीच ब्रेस्ट कैंसर और उससे संबंधित स्क्रीनिंग के बारे में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है।
लोगों को यह बताने की जरूरत है कि आज ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी, सेंटिनल नोड बायोप्सी, दवाइयों और रेडिएशन तकनीकों की उपलब्धता के साथ न सिर्फ ब्रेस्ट कैंसर का सफल इलाज संभव है, बल्कि इसके बाद महिलाएं फिर से एक नॉर्मल जीवन व्यतीत कर सकती हैं।